Tax savings FD vs NSC: कहां मिलेगा ज्यादा टैक्स फायदा? निवेश से पहले जान लें दोनों स्कीम की पूरी डिटेल
टैक्स बचाने के लिए सुरक्षित निवेश विकल्पों में Tax Saving FD और National Savings Certificate (NSC) काफी लोकप्रिय हैं. दोनों ही योजनाएं इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80C के तहत ₹1.5 लाख तक की टैक्स छूट देती हैं. Tax Saving FD में ब्याज पूरी तरह टैक्सेबल होता है, जबकि NSC में मिलने वाला ब्याज हर साल पुनर्निवेश माना जाता है, जिससे अतिरिक्त टैक्स डिडक्शन का फायदा मिल सकता है.
FD vs NSC: टैक्स बचाने के लिए कई निवेश विकल्प उपलब्ध हैं, लेकिन सुरक्षित रिटर्न चाहने वाले निवेशकों के बीच टैक्स सेविंग फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) और National Savings Certificate (NSC) काफी लोकप्रिय हैं. दोनों ही स्कीम इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80C के तहत टैक्स बचाने का मौका देती हैं. हालांकि, इनकी ब्याज दर, नियम और सुविधाओं में कुछ अंतर है. ऐसे में निवेश से पहले यह समझना जरूरी है कि आपके लिए कौन-सा विकल्प ज्यादा फायदेमंद हो सकता है.
FD कैसे काम करती है?
Tax Saving FD बैंक द्वारा दी जाने वाली फिक्स्ड डिपॉजिट स्कीम है, जिसमें निवेश कर आप टैक्स बचा सकते हैं. इस स्कीम में निवेश करने पर सेक्शन 80C के तहत अधिकतम ₹1.5 लाख तक की टैक्स छूट मिलती है. इस FD की लॉक-इन अवधि कम से कम 5 साल होती है और अधिकतम 10 साल तक निवेश किया जा सकता है. मौजूदा समय में अलग-अलग बैंकों में इस स्कीम पर करीब 5.5% से 7.75% तक ब्याज मिल रहा है.
हालांकि, इस स्कीम में मिलने वाला ब्याज पूरी तरह टैक्सेबल होता है और यह आपकी इनकम में जुड़ जाता है. यानी जिस टैक्स स्लैब में आप आते हैं, उसी के हिसाब से ब्याज पर टैक्स देना पड़ता है. साथ ही इस FD को मैच्योरिटी से पहले तोड़ा नहीं जा सकता और इस पर लोन की सुविधा भी नहीं मिलती.
National Savings Certificate (NSC)
National Savings Certificate एक सरकारी बचत योजना है, जिसे इंडिया पोस्ट के जरिए ऑपरेट किया जाता है. यह भी सेक्शन 80C के तहत ₹1.5 लाख तक की टैक्स छूट देता है. इस स्कीम में निवेश की लॉक-इन अवधि 5 साल होती है और फिलहाल इस पर 7.7% सालाना ब्याज दिया जा रहा है. निवेश की शुरुआत ₹1,000 से की जा सकती है और इसके बाद कम से कम ₹100 के मल्टीप्लायर में निवेश किया जा सकता है.
NSC की खास बात यह है कि इसमें मिलने वाला ब्याज हर साल पुनर्निवेश (reinvest) माना जाता है और यह भी सेक्शन 80C के तहत टैक्स डिडक्शन के लिए पात्र हो सकता है (आखिरी साल को छोड़कर). इससे कई मामलों में टैक्स सेविंग का फायदा थोड़ा अधिक हो सकता है.
| टैक्स सेविंग एफडी | नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट | |
|---|---|---|
| अवधि (Tenure) | न्यूनतम 5 साल, अधिकतम 10 साल तक का विकल्प | 5 साल |
| जोखिम (Risk) | कम जोखिम, स्थिर रिटर्न | कम जोखिम, सरकार द्वारा तय निश्चित ब्याज |
| टैक्स बचत (Tax Saving) | सेक्शन 80C के तहत ₹1.5 लाख तक | सेक्शन 80C के तहत ₹1.5 लाख तक |
| न्यूनतम निवेश (Minimum Deposit) | ₹1,000 से ₹10,000 (बैंक के अनुसार) | ₹1,000 |
| कहां उपलब्ध (Access) | सभी बैंकों में उपलब्ध | सभी पोस्ट ऑफिस में उपलब्ध |
| लोन के लिए कोलेटरल (Loan Collateral) | लोन के लिए स्वीकार नहीं | लोन के लिए कोलेटरल के रूप में स्वीकार |
| ब्याज दर (Interest Rate) | 5.5% से 7.75% सालाना (बैंक के अनुसार) | 7.7% तय (हर तिमाही समीक्षा) |
| कौन ऑपरेट कर सकता है | व्यक्ति, जॉइंट अकाउंट और नाबालिग के नाम | व्यक्ति, जॉइंट अकाउंट और नाबालिग के नाम |
दोनों में कहां ज्यादा टैक्स बच सकता है?
अगर केवल टैक्स बचत की बात करें तो दोनों योजनाओं में ₹1.5 लाख तक का निवेश ही टैक्स छूट के लिए मान्य है. लेकिन ब्याज पर टैक्स के नियम अलग होने के कारण वास्तविक लाभ में फर्क पड़ सकता है. Tax Saving FD में ब्याज सीधे आपकी इनकम में जुड़ता है और उस पर टैक्स देना पड़ता है. वहीं NSC में ब्याज हर साल reinvest माना जाता है, जिससे शुरुआती वर्षों में अतिरिक्त टैक्स डिडक्शन का फायदा मिल सकता है.
किसके लिए कौन सा विकल्प बेहतर?
अगर आप बैंक के जरिए निवेश करना चाहते हैं और सरल विकल्प चाहते हैं तो FD बेहतर हो सकती है. वहीं अगर आप थोड़ा ज्यादा ब्याज और सरकारी योजना की सुरक्षा चाहते हैं तो NSC एक अच्छा विकल्प बन सकता है.
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निवेश से पहले क्या ध्यान रखें?
निवेश करते समय केवल टैक्स बचत ही नहीं, बल्कि ब्याज दर, लॉक-इन अवधि, लिक्विडिटी और अपने वित्तीय लक्ष्यों को भी ध्यान में रखना जरूरी है. सही विकल्प वही होगा जो आपकी आय, टैक्स स्लैब और निवेश अवधि के अनुसार सबसे बेहतर बैठता हो. कुल मिलाकर, दोनों ही योजनाएं सुरक्षित निवेश के साथ टैक्स बचाने का मौका देती हैं, लेकिन सही फैसला आपकी जरूरत और वित्तीय योजना पर निर्भर करेगा.
