US-Iran टेंशन से इन अमेरिकी डिफेंस-ऑयल कंपनियों की चांदी, लेकिन दबाव में हैं ये सेक्टर; जानें डिटेल्स
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का असर वैश्विक बाजारों पर दिखने लगा है. जहां डिफेंस और ऑयल कंपनियों के शेयरों में तेजी आई है, वहीं ट्रैवल, लग्जरी और टेक सेक्टर पर दबाव बढ़ गया है. अगर यह लड़ाई लंबी चली तो कई इंडस्ट्रीज की दिशा बदल सकती है.
Middle East Tension and Benefitted US Stocks: मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य टकराव ने ग्लोबल मार्केट में हलचल तेज कर दी है. इस लड़ाई का असर सिर्फ जियो पॉलिटिक्स तक सीमित नहीं है, बल्कि कई इंडस्ट्री और कंपनियों के कारोबार पर भी इसका सीधा असर पड़ सकता है. डिफेंस, एनर्जी और शिपिंग जैसे कुछ सेक्टर इस स्थिति से फायदा भी कमा सकते हैं, जबकि ट्रैवल, लग्जरी और टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों के लिए यह चुनौती बन सकता है. अगर यह संघर्ष लंबा खिंचता है तो वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी बड़ा असर देखने को मिल सकता है.
डिफेंस कंपनियों को मिल सकता है बड़ा फायदा
फोर्ब्स ने अपनी एक रिपोर्ट में अमेरिकी सेना की सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के हवाले से लिखा है कि ईरान के खिलाफ जारी सैन्य कार्रवाई में 20 से ज्यादा तरह के हथियार और सिस्टम इस्तेमाल किए जा रहे हैं. इन हथियारों का निर्माण मुख्य रूप से अमेरिकी रक्षा कंपनियां करती हैं. इनमें Lockheed Martin, RTX और उसकी सहायक कंपनी Raytheon, Boeing, Northrop Grumman, L3Harris Technologies और General Atomics Aeronautical जैसे बड़े नाम शामिल हैं. युद्ध की खबरों के बाद इन कंपनियों के शेयरों में तेजी देखने को मिली है.
ऐसे में ये माना जा सकता है कि जिन कंपनियों का कारोबार मिसाइल डिफेंस और ड्रोन टेक्नोलॉजी से जुड़ा है, उन्हें सबसे ज्यादा फायदा हो सकता है. उदाहरण के तौर पर Raytheon द्वारा बनाए जाने वाले Tomahawk मिसाइल और Lockheed Martin के THAAD इंटरसेप्टर मिसाइल सिस्टम इस समय चर्चा में हैं. इसके अलावा SpektreWorks द्वारा बनाए गए “LUCAS” नाम के कम लागत वाले ड्रोन भी सैन्य अभियानों में इस्तेमाल किए जा रहे हैं. सॉफ्टवेयर कंपनी Palantir के शेयर भी बढ़े हैं क्योंकि यह अमेरिकी सेना को डेटा और एनालिटिक्स से जुड़ी सेवाएं उपलब्ध कराती है. यूरोप की रक्षा कंपनियां भी इस स्थिति से फायदा उठा सकती हैं.
एनर्जी कंपनियों को भी मिल सकता है फायदा
इस युद्ध का असर एनर्जी मार्केट पर भी साफ दिखाई दे रहा है. मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ने और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से तेल की कीमतों में तेजी आई है. यह समुद्री मार्ग दुनिया के लगभग 20 फीसदी तेल व्यापार के लिए बेहद अहम माना जाता है. तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से ExxonMobil, Chevron और Occidental Petroleum जैसी अमेरिकी तेल कंपनियों के शेयरों में उछाल देखा गया. हालांकि बाजार में अनिश्चितता के कारण इन शेयरों में उतार-चढ़ाव भी बना हुआ है. Talos Energy जैसी मिड-साइज तेल कंपनियां भी इस स्थिति से फायदा उठा सकती हैं क्योंकि तेल के ऊंचे दाम उनके मुनाफे को बढ़ा सकते हैं. अगर लड़ाई लंबी खिंचती है और तेल की कीमतें नई ऊंचाई पर पहुंचती है तब रिन्यूएबल एनर्जी कंपनियों को भी फायदा हो सकता है.
शिपिंग कंपनियों के लिए मिलाजुला असर
ग्लोबल ट्रेड के लिहाज से शिपिंग सेक्टर पर इस लड़ाई का असर जटिल हो सकता है. FedEx, UPS और DHL जैसी बड़ी लॉजिस्टिक्स कंपनियों को ईंधन की बढ़ती कीमतों और एयरस्पेस बंद होने के कारण नुकसान उठाना पड़ सकता है. इससे उनकी लागत बढ़ सकती है और डिलीवरी समय भी लंबा हो सकता है. दूसरी ओर कंटेनर शिपिंग कंपनियों के लिए कुछ अवसर भी पैदा हो सकते हैं. जब जहाजों को सुएज नहर और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे मार्गों से बचते हुए लंबा रास्ता अपनाना पड़ता है, तो कंपनियां लंबी दूरी के लिए अधिक शुल्क ले सकती हैं. इस वजह से डेनमार्क की Maersk और जर्मनी की Hapag-Lloyd जैसी कंपनियों के शेयरों में बढ़त देखी गई है. हालांकि सुरक्षा जोखिम के कारण कई कंपनियों ने मिडिल ईस्ट के बंदरगाहों में अपने ऑपरेशन अस्थायी रूप से रोक दिए हैं.
इन सेक्टरों पर पड़ सकता है नकारात्मक असर
जहां कुछ इंडस्ट्री इस लड़ाई से फायदा उठा सकते हैं, वहीं कई सेक्टरों के लिए यह स्थिति नुकसानदेह साबित हो सकती है. सबसे ज्यादा असर ट्रैवल और टूरिज्म सेक्टर पर पड़ा है. तेल की कीमतें बढ़ने से एयरलाइंस की लागत बढ़ जाती है और सुरक्षा चिंताओं के कारण लोग यात्रा करने से बचते हैं. इसके चलते एयरलाइंस, क्रूज कंपनियों और होटल चेन के शेयरों में गिरावट देखी गई है. इसके अलावा लग्जरी ब्रांड्स पर भी असर पड़ा है. LVMH, Burberry और Richemont जैसी कंपनियों के शेयरों में कमजोरी आई है. विश्लेषकों के मुताबिक लग्जरी सामान की मांग आमतौर पर तब ज्यादा रहती है जब आर्थिक माहौल स्थिर और सकारात्मक हो. अनिश्चितता बढ़ने पर उपभोक्ता ऐसे खर्च कम कर देते हैं.
टेक सेक्टर पर भी दबाव
लड़ाई के दौरान निवेशक अक्सर जोखिम भरे निवेश से दूरी बनाते हैं और सुरक्षित विकल्पों की ओर रुख करते हैं. इस कारण टेक्नोलॉजी कंपनियों के शेयरों पर भी दबाव देखा जा सकता है क्योंकि निवेशक अस्थिर बाजार में ज्यादा सतर्क हो जाते हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, इन सभी सेक्टरों पर असर काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगा कि यह संघर्ष कितने समय तक चलता है. अगर युद्ध जल्दी खत्म हो जाता है तो रक्षा और एनर्जी कंपनियों में आई तेजी सीमित रह सकती है. वहीं अगर संघर्ष लंबा चलता है तो हथियारों की मांग बढ़ने के कारण रक्षा कंपनियों को लंबे समय तक फायदा मिल सकता है. दूसरी ओर लंबे समय तक ऊंचे तेल दाम वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव डाल सकते हैं. कुछ अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि इस संघर्ष के कारण अमेरिकी अर्थव्यवस्था को 50 अरब डॉलर से लेकर 210 अरब डॉलर तक का आर्थिक नुकसान हो सकता है.
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