गंगा एक्सप्रेसवे का इंतजार खत्म! फरवरी में खुलेगा 594 KM का मेगा हाईवे, इन 12 जिलों की बदलेगी सूरत, जानें कितना बचेगा समय

उत्तर प्रदेश में भारत का सबसे लंबा गंगा एक्सप्रेसवे अब तैयार है. 594 किलोमीटर लंबा यह एक्सप्रेसवे मेरठ से प्रयागराज तक जाएगा और राज्य के पश्चिमी व पूर्वी हिस्सों को जोड़ेगा. UPEIDA ने बताया कि FASTag टोल सिस्टम के सफल ट्रायल के बाद यह प्रोजेक्ट अंतिम चरण में है और अगले महीने यात्रियों के लिए खुल जाएगा. इससे यात्रा समय में बड़ी कमी आएगी और विकास को नई गति मिलेगी.

गंगा एक्सप्रेसवे Image Credit: TV9

Ganga Expressway Explained: उत्तर प्रदेश में भारत का सबसे लंबा गंगा एक्सप्रेसवे अगले महीने खुलने वाला है. यह 594 किलोमीटर लंबा एक्सप्रेसवे मेरठ से प्रयागराज तक जाएगा और उत्तर प्रदेश के पूर्वी व पश्चिमी हिस्सों को जोड़ेगा. उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवेज इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (UPEIDA) ने अपने आधिकारिक X हैंडल पर इसकी जानकारी दी है. FASTag टोल सिस्टम के सफल ट्रायल के बाद अब यह प्रोजेक्ट अंतिम चरण में है और अगले महीने यात्रियों के लिए जल्द खुल जाएगा.

गंगा एक्सप्रेसवे का रूट और जिले

यह एक्सप्रेसवे 12 जिलों से होकर गुजरेगा. इसमें मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़ और प्रयागराज शामिल है. यह गंगा नदी के साथ-साथ बनाया गया है और पूर्व-पश्चिम कनेक्टिविटी को मजबूत करेगा. इससे पश्चिमी उत्तर प्रदेश से पूर्वी हिस्से तक यात्रा आसान और तेज हो जाएगी.

FASTag टोल सिस्टम के सफल ट्रायल

एक्सप्रेसवे पर FASTag आधारित टोल बूथ का ट्रायल सफल रहा है. बदायूं जिले में एक ट्रायल पूरा हुआ, जहां कारें धीमी हुईं और FASTag स्कैन होते ही बूम बैरियर खुद-ब-खुद खुल गया. अधिकारियों ने कहा कि यह कॉन्टैक्टलेस टोल सिस्टम बहुत अच्छा काम कर रहा है. इससे ट्रैफिक जाम कम होगा और सफर सुगम बनेगा. अब बाकी टोल प्लाजा पर भी इसी तरह के ट्रायल चल रहे हैं. कई टोल प्लाजा बनाए जा रहे हैं और सिस्टम की जांच अलग-अलग ग्रुप में हो रही है.

एक्सप्रेसवे की खास सुविधाएं और संरचनाएं

इसकी कुल लंबाई 594 किलोमीटर है. इसमें कई ओवर ब्रिज, इंटरचेंज, पुल, फ्लाईओवर, अंडरपास है.

  • 7 रोड ओवर ब्रिज
  • 17 इंटरचेंज
  • 14 बड़े पुल और 126 छोटे पुल
  • 28 फ्लाईओवर
  • 50 व्हीकल अंडरपास
  • 171 लाइट व्हीकल अंडरपास
  • 160 छोटे व्हीकल अंडरपास
  • 946 कल्वर्ट

इन सबकी वजह से आसपास के इलाकों को कम परेशानी होगी और लोकल व लंबी दूरी की गाड़ियां आसानी से चल सकेंगी. सड़क की क्वालिटी को चेक करने के लिए स्विस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया है. ETH Zurich यूनिवर्सिटी और RTDT Laboratories AG के साथ मिलकर AI आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम लगाया गया है. एक इनोवा गाड़ी में 7 एक्सेलरोमीटर सेंसर लगे हैं, जो रोड की क्वालिटी और कम्फर्ट को रियल-टाइम में चेक करते हैं. इससे निर्माण के दौरान ही खामियां पकड़ ली जाती हैं और ठीक की जाती हैं.

12 की जगह 6 घंटे में पूरा होगा सफर

जब यह पूरी तरह चालू हो जाएगा, तो पश्चिमी उत्तर प्रदेश से पूर्वी हिस्से तक यात्रा का समय बहुत कम हो जाएगा. पहले जो रास्ते लंबे और समय लेने वाले थे, अब तेज और सीधे हो जाएंगे. एक्सप्रेसवे शुरू होने के बाद मेरठ से प्रयागराज की यात्रा, जो अभी लगभग 12 घंटे में पूरी होती है, वह सिर्फ 6 से 7 घंटे में संभव हो जाएगी. इससे लोगों की यात्रा आसान होगी, खासकर पश्चिम से पूर्व जाने वालों के लिए. एक्सप्रेसवे से इलाके में इंडस्ट्री, व्यापार और रोजगार बढ़ेगा. सड़क सुरक्षा और अच्छी राइड एक्सपीरियंस पर भी बहुत ध्यान दिया गया है. यह उत्तर प्रदेश की इंफ्रास्ट्रक्चर में एक बड़ा कदम है और राज्य के विकास को नई रफ्तार देगा.