Adani Power vs Tata Power: कौन है पावर सेक्टर का बॉस, कमाई के लिए कौन सा शेयर सुपरहिट, एक ने दिया 1367% रिटर्न

दुनिया में तेजी से बढ़ती बिजली की मांग पावर सेक्टर को नई ऊंचाइयों पर ले जा रही है. डेटा सेंटर्स, इंडस्ट्री और कूलिंग की जरूरतों से कंपनियों का कारोबार और मुनाफा बढ़ रहा है. इसी रेस में अडानी पावर और टाटा पावर अपने-अपने विस्तार, ग्रीन एनर्जी और वैश्विक योजनाओं के दम पर निवेशकों के लिए आकर्षक विकल्प बनकर उभर रही हैं.

Adani Power vs Tata Power Image Credit: @AI/Money9live

Adani Power vs Tata Power: दुनिया भर में बिजली की खपत तेजी से बढ़ रही है. ग्लोबल इलेक्ट्रिसिटी डिमांड 2025 में 3.3% और 2026 में 3.7% बढ़ने का अनुमान है, जो डेटा सेंटर्स, इंडस्ट्री और कूलिंग की वजह से हो रहा है. हाई डिमांड की वजह से पावर सेक्टर में काम करने वाली कंपनियों का बिजनेस बढ़ रहा है. कारोबार बढ़ने और मुनाफे में इजाफे का असर कंपनी के शेयरहोल्डर्स पर पड़ता है. इससे निवेश पर रिटर्न से लेकर डिविडेंड या बोनस जैसे फायदे के चांस ज्यादा हो जाते हैं. अडानी पावर और टाटा पावर इस सेक्टर की दो दिग्गज कंपनियां हैं. इनका विस्तार सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि ये विदेशों में भी अपना कारोबार फैला रही हैं.

अडानी पावर बांग्लादेश को बिजली सप्लाई कर रही है और भूटान में हाइड्रो प्रोजेक्ट्स पर काम कर रही है, जबकि टाटा पावर भूटान में बड़े रिन्यूएबल प्रोजेक्ट्स विकसित कर रही है. इस रिपोर्ट में आप इन दो कंपनियों के ग्रोथ प्लान, ऑर्डर बुक, शेयरों के प्रदर्शन से लेकर 7 ऐसे फैक्टर के बारे में जानेंगे, जिससे यह अनुमान लगाना आसान हो जाएगा कि भविष्य में निवेश के लिए कौनसी कंपनी बेहतर विकल्प हो सकती है.

कैसे काम करती है कंपनी?

अडानी पावर भारत की सबसे बड़ी निजी थर्मल पावर कंपनी है, जिसकी क्षमता 18,150 मेगावाट है. यह बड़े पैमाने पर बिजली उत्पादन करती है और इसकी 91% क्षमता लंबे समय के पावर परचेज एग्रीमेंट (PPA) से जुड़ी है. यानी कंपनी पहले ही पावर बेचने के लिए खरीदार से तय कीमत पर समझौता कर लेती है. इससे इसकी आय सुरक्षित रहती है. कंपनी का लक्ष्य 2032 तक क्षमता 18 गीगावाट से बढ़ाकर 42 गीगावाट करना हैं.

दूसरी ओर, टाटा पावर एक इंटिग्रेटेड यूटिलिटी कंपनी है. इसका मतलब है कि बिजली प्रोडक्शन से लेकर उसके ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन का काम कंपनी खुद संभालती है. ये 1.3 करोड़ ग्राहकों को बिजली डिस्ट्रीब्यूट करती है. यह थर्मल पावर के साथ-साथ ग्रीन एनर्जी पर ध्यान दे रही है और 2045 तक नेट जीरो का लक्ष्य रखती है.

ऑर्डर बुक और ग्रोथ प्लान

अडानी पावर ने दूसरी तिमाही में 4.5 गीगावाट के नए लॉन्ग टर्म के PPA हासिल किए, जिनमें बिहार के लिए 2,400 मेगावाट, मध्य प्रदेश के लिए 1,600 मेगावाट और कर्नाटक के लिए 570 मेगावाट शामिल हैं. कंपनी 23 गीगावाट विस्तार के लिए 2 लाख करोड़ रुपये का निवेश करेगी.

टाटा पावर का फोकस ग्रीन एनर्जी पर है. इसने रूफटॉप सोलर में 907 मेगावाट के ऑर्डर हासिल किए और इस सेगमेंट में कंपनी के पास 20% से ज्यादा बाजार हिस्सेदारी है. इसके अलावा, 10.4 गीगावाट की क्लीन एनर्जी परियोजनाएं और 838 मेगावाट के विंड टरबाइन ऑर्डर इसके पाइपलाइन में हैं.

शेयर प्रदर्शन

पिछले छह महीनों में अडानी पावर के शेयर 24.80% बढ़े और एक साल में 40.60% की उछाल आई. पांच साल में यह 1,367.06% बढ़ा है. इसका PE अनुपात 22.71 है. 1 जनवरी 2026 को बाजार बंद होने के बाद कंपनी के शेयर की कीमत BSE पर 148.85 रुपये तो वहीं NSE 148.76 रुपये है.

वहीं, टाटा पावर के शेयर छह महीने में 6.08% और एक साल में 2.59% गिरे. लेकिन पांच साल में यह 389.24% बढ़ा है. इसका PE रेश्यो 28.25 है. गुरुवार को बाजार बंद होने के बाद कंपनी के शेयर की कीमत NSE पर 381.85 रुपये था तो वहीं BSE पर 381.80 रुपये था.

सप्लाई चेन की जंग

अडानी पावर ने अपने 23 गीगावाट विस्तार के लिए बॉयलर, टरबाइन और जनरेटर जैसे सभी जरूरी उपकरणों के ऑर्डर पहले ही दे दिए हैं. इससे वह स्टील और इंजीनियरिंग की बढ़ती कीमतों से बच रही है.

टाटा पावर ने अपनी सप्लाई चेन को मजबूत करने के लिए तिरुनेलवेली में 4.3 गीगावाट का सोलर प्लांट शुरू किया, जिसने पहली छमाही में 340 करोड़ रुपये का मुनाफा दिया. कंपनी अब 10 गीगावाट का वेफर और इंगोट फैक्ट्री बनाने पर विचार कर रही है.

भूटान में नई जंग

दोनों कंपनियां भूटान में हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स के लिए प्रतिस्पर्धा कर रही हैं. टाटा पावर ने 1,125 मेगावाट के दोर्जिलुंग और 600 मेगावाट के खोरलोच्चु प्रोजेक्ट्स पर काम शुरू किया है. यह भूटान में 5,000 मेगावाट की क्लीन एनर्जी विकसित करेगी.

अडानी पावर ने भूटान की ड्रुक ग्रीन पावर कॉर्प (Druk Green Power Corp, DGPC)के साथ 570 मेगावाट के वांगछु हाइड्रो प्रोजेक्ट के लिए समझौता किया है, जिसकी लागत 6,000 करोड़ रुपये है.

वित्तीय ताकत

अडानी पावर का EBITDA मार्जिन 41% है और इसने कर्ज को काफी कम किया है. अब इसका डेट-टू-इक्विटी रेश्यो 0.83 है. इसका नेट डेट टू EBITDA अनुपात FY19 में 9.75x से घटकर 1.75x हो गया है. सितंबर तिमाही में कंपनी ने 14308 करोड़ रुपये का रेवेन्यू कमाया है. वहीं मुनाफे के मोर्चे पर कंपनी का प्रदर्शन जून तिमाही से खराब रहा है. यह घटकर 2906 करोड़ रुपये हो गए हैं, जो जून में 3305 करोड़ रुपये थे.

टाटा पावर ने लगातार 24 तिमाहियों तक मुनाफा बढ़ाया है. इसके ओडिशा डिस्कॉम ने दूसरी तिमाही में 362% ज्यादा मुनाफा कमाया. पिछले दो तिमाही से कंपनी का रेवेन्यू घटा है. सितंबर तिमाही में कंपनी ने 16050 करोड़ रुपये का रेवेन्यू कमाया है जो जून तिमाही के 18397 करोड़ से कम है. सितंबर में कंपनी का मुनाफा 1245 करोड़ रुपये रहा.

ब्राउनफील्ड बनाम ग्रीन सप्लाई चेन

अडानी पावर अपनी मौजूदा जगहों जैसे मुंद्रा, तिरोडा और गोड्डा में विस्तार कर रही है. इससे नए प्रोजेक्ट्स की तुलना में 20-25% लागत बचती है. कंपनी ने 2024 की कीमतों पर 2030 के लिए इक्विपमेंट ऑर्डर करके लागत को काबू में रखा है.

टाटा पावर 4.3 गीगावाट के सोलर प्लांट और 10 गीगावाट की प्रस्तावित फैक्ट्री के साथ अपनी ग्रीन सप्लाई चेन बना रही है. इसके अलावा, यह भूटान में 1,700 मेगावाट के हाइड्रो प्रोजेक्ट्स पर काम कर रही है.

डिस्क्लेमर: Money9live किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है. यहां पर केवल स्टॉक्स की जानकारी दी गई है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.