1 साल में 33% टूटे Dixon Technologies के शेयर, फिर भी फंडामेंटल और ग्रोथ दमदार, क्‍या खरीदारी का है सही मौका

Dixon Technologies (India) का शेयर EMS सेक्टर की कमजोरी के चलते इस साल करीब 33% गिरा है, लेकिन कंपनी की मजबूत ग्रोथ, विस्तार योजनाएं और हाई रिटर्न रेशियो इसकी लंबी अवधि की कहानी को सपोर्ट कर रहे हैं. अगर आप भी इसमें दांव लगाने की सोच रहे हैं तो इसके फायदे और नुकसान जान लें.

Dixon के शेयरों में गिरावट Image Credit: money9 live AI image

Dixon Technologies (India) share price: पिछले कुछ महीनों में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सर्विसेज (EMS) और कंज्यूमर ड्यूरेबल सेक्टर के शेयरों में कमजोरी देखने को मिली. इसकी वजह इम्पोर्ट पॉलिसी से जुड़ी चुनौतियों का बढ़ना, ग्लोबल प्रतिस्पर्धा और कई शेयरों में मल्टी-ईयर तेजी के बाद मुनाफावसूली है. इसका असर Dixon Technologies (India) के शेयर पर भी दिखा है. महज एक साल में Dixon का शेयर करीब 33% टूट चुका है. जनवरी 2025 में ये 18397 रुपये पर था जो गिरकर अब 12091 रुपये पर आ गया है. हालांकि गिरावट के बावजूद कंपनी के बिजनेस फंडामेंटल्स अब भी दमदार बने हुए हैं. ऐसे में निवेशकों के मन में सवाल है कि क्‍या ये खरीदारी का सही समय है. ऐसे में हम आपको कंपनी से जुड़े फायदे और नुकसान दोनों के बारे में बताएंगे.

Dixon Technologies का कामकाज

Dixon Technologies भारत की सबसे बड़ी EMS कंपनी है, जो ग्लोबल और घरेलू ब्रांड्स को एंड-टू-एंड डिजाइन और मैन्युफैक्चरिंग सॉल्यूशंस देती है. कंपनी के पास 24 आधुनिक मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी, 6 R&D सेंटर और 35,000 से ज्यादा कर्मचारियों की मजबूत टीम है.

क्‍यों दमदार है ग्रोथ स्‍टोरी?

शानदार वित्‍तीय स्थिति

पिछले 3 साल में कंपनी की सेल्स CAGR 53.7% रही है, जबकि नेट प्रॉफिट CAGR 86.4% के दमदार स्तर पर पहुंची है. इसी दौरान शेयर ने भी करीब 45.1% CAGR का रिटर्न दिया है. इसके अलावा 30 सितंबर 2025 तक कंपनी का ROCE 49.1% और ROE 34.3% रहा, जो इसके बिजनेस मॉडल की मजबूती और स्थिरता को दर्शाता है. Q2FY26 में कंपनी की कंसॉलिडेटेड एडजस्टेड रेवेन्यू ₹148.58 अरब रही, जो पिछले साल की समान तिमाही के ₹115.28 अरब से 29% ज्यादा है. वहीं, नेट प्रॉफिट ₹3.23 अरब रहा, जो साल-दर-साल 27% की बढ़त दर्शाता है.

डिस्प्ले मॉड्यूल्स में बड़ा दांव

HKC के साथ 74:26 के जॉइंट वेंचर में Dixon पहले चरण में स्मार्टफोन के लिए 24 मिलियन यूनिट और नोटबुक्स के लिए 2 मिलियन यूनिट सालाना क्षमता तैयार कर रही है. दूसरे चरण में स्मार्टफोन डिस्प्ले की क्षमता 60 मिलियन यूनिट तक ले जाने की योजना है. कंपनी LED TV और ऑटोमोटिव डिस्प्ले सेगमेंट में भी एंट्री कर रही है, जहां मार्जिन हाई डबल डिजिट रहने की उम्मीद है.

विस्तार योजनाएं

अगले 6 से 9 महीनों में Dixon अपनी मैन्युफैक्चरिंग क्षमता और गहराई बढ़ाने के लिए निवेश करेगी. स्मार्टफोन कैमरा मॉड्यूल की क्षमता 40 मिलियन से बढ़ाकर 190–200 मिलियन यूनिट सालाना करने का लक्ष्य है. इसके अलावा कंपनी ने डिस्प्ले मॉड्यूल, कैमरा एन्क्लोजर, लिथियम-आयन बैटरी और अन्य कंपोनेंट्स के लिए करीब ₹30 अरब के निवेश के साथ ECMS आवेदन दाखिल किए हैं.

क्‍या है चुनौतियां?

सप्लाई चेन पर निर्भरता

कंपनी सेमीकंडक्टर्स समेत कई अहम कंपोनेंट्स के लिए इम्पोर्ट पर निर्भर है, जिससे ग्लोबल सप्लाई डिसरप्शन, करेंसी उतार-चढ़ाव और लॉजिस्टिक्स लागत का जोखिम बना रहता है.

कस्टमर वॉल्यूम शिफ्ट का खतरा

बड़े क्लाइंट्स अगर प्रोडक्शन का कुछ हिस्सा दूसरे देशों या प्रतिस्पर्धियों को आउटसोर्स करते हैं, तो Dixon की घरेलू वॉल्यूम और मार्जिन पर दबाव आ सकता है.

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लो-मार्जिन बिजनेस

कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग में मार्जिन सीमित होते हैं. ऐसे में बढ़ती इनपुट लागत, फ्रेट चार्ज और प्राइसिंग प्रेशर कंपनी के लिए चुनौती बने रहते हैं.

शेयर का प्रदर्शन

Dixon Technologies के शेयर की वर्तमान कीमत 12091 रुपये है. ये एक साल यानी 2025 में लगभग 33 पर्सेंट गिरा था. हालांकि 3 साल में इसने 207 फीसदी और 5 साल में 340 फीसदी तक का रिटर्न दिया है.

डिस्क्लेमर: Money9live किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है. यहां पर केवल स्टॉक्स की जानकारी दी गई है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.