STT बढ़ने के बाद शेयर बाजार में ₹1000 की कमाई पर कितना टैक्स लगेगा? समझ लीजिए पूरा हिसाब-किताब
Budget 2026: STT की दर बढ़ाने की घोषणा के बाद निवेशकों और ट्रेडर्स के बीच यह सवाल आम हो गया है कि अब शेयर बाजार में कमाई पर टैक्स का असर कितना पड़ेगा, नया STT रेट 0.02% से बढ़ाकर 0.05% कर दिया गया है.
Budget 2026: केंद्र सरकार ने बजट 2026 में सिक्योरिटीज ट्रांजेक्शन टैक्स (STT) को 0.02 फीसदी से बढ़ाकर 0.05 फीसदी करने का ऐलान किया है. इस घोषणा का असर तुरंत दिखा और शेयर बाजार में भारी गिरावट आ गई . STT की दर बढ़ाने की घोषणा के बाद निवेशकों और ट्रेडर्स के बीच यह सवाल आम हो गया है कि अब शेयर बाजार में कमाई पर टैक्स का असर कितना पड़ेगा, नया STT रेट 0.02% से बढ़ाकर 0.05% कर दिया गया है, जिसका सीधा असर इक्विटी ट्रेडिंग की लागत पर पड़ेगा.
STT क्या है?
STT यानी सिक्योरिटीज ट्रांजेक्शन टैक्स, शेयर बाजार में खरीद या बिक्री के समय लगने वाला टैक्स है. यह टैक्स प्रॉफिट पर नहीं, बल्कि ट्रांजैक्शन वैल्यू यानी शेयर की खरीद या बिक्री की कुल रकम पर लगाया जाता है.
नया STT रेट कितना है?
अब निवेशकों को हर 100 रुपये के ट्रांजेक्शन पर 5 पैसे STT देना होगा. पहले यही टैक्स 2 पैसे था. यानी टैक्स बोझ में सीधी बढ़ोतरी हुई है.
1000 कमाई का उदाहरण
मान लीजिए किसी निवेशक ने कोई शेयर 10,000 रुपये में खरीदा और फिर उसे 11,000 रुपये में बेचा. इस तरह निवेशक को 1,000 रुपये का मुनाफा हुआ.
अब STT की गणना इस तरह होगी
- STT = 0.05% × ₹11,000 = ₹5.50
- यानी निवेशक को 5.50 रुपये का STT चुकाना होगा.
बजट ऐलान से फ्यूचर्स ट्रेडिंग में कितना बढ़ेगा आपका खर्च?
- अगर निफ्टी फ्यूचर के एक लॉट की वैल्यू 1,0000 रुपये है. पहले के नियम के अनुसार आपको इस पर 0.02% की दर से केवल 2 रुपये का सिक्योरिटी ट्रांजैक्शन टैक्स देना पड़ता था. अब नए बजट प्रस्ताव के बाद इस टैक्स को बढ़ाकर 0.05 फीसदी कर दिया गया है. इसका मतलब यह है कि अब उसी 10000 रुपये के लॉट पर आपको 5 रुपये का टैक्स देना होगा.
- बजट ऐलान से ऑप्शंस ट्रेडिंग में कितना बढ़ेगा आपका खर्च?
- मान लीजिए कि आपने निफ्टी ऑप्शन का एक लॉट खरीदा है जिसकी प्रीमियम वैल्यू 10000 रुपये है. पुराने नियमों के मुताबिक, इस पर 0.1% के हिसाब से 10 रुपये का STT देना होता था. अब 0.15 फीसदी के हिसाब से इस प्रीमियम पर 15 रुपये का टैक्स चुकाना होगा.
पहले और अब का फर्क
- अगर यही ट्रांजैक्शन पुराने STT रेट (0.02%) पर होता, तो टैक्स सिर्फ 2.20 रुपये लगता.
- नए रेट के बाद निवेशक को 3.30 रुपये ज्यादा टैक्स देना पड़ेगा.
अक्सर लोग सोचते हैं कि अगर 1000 रुपये कमाए हैं, तो STT भी 1000 रुपये पर लगेगा. जबकि हकीकत यह है कि STT मुनाफे पर नहीं, बल्कि शेयर की बिक्री कीमत पर लगता है.
निवेशकों के लिए क्या मतलब?
- शॉर्ट टर्म और हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडिंग महंगी होगी
- इंट्राडे और ऑप्शन ट्रेडर्स पर ज्यादा असर
- लॉन्ग टर्म निवेशकों पर सीमित प्रभाव
STT में बढ़ोतरी से शेयर बाजार में ट्रेडिंग की लागत जरूर बढ़ेगी, लेकिन इसका असर इस बात पर निर्भर करेगा कि निवेशक कितनी बार और किस वैल्यू पर ट्रेड कर रहा है.




