पश्चिम एशिया संकट का असर, Citi Research ने निफ्टी का टारगेट घटाया, जानें साल के अंत तक कहां जा सकता है इंडेक्स
Citi Research ने Nifty 50 के साल के अंत तक के लक्ष्य को घटाकर 27,000 कर दिया है. ब्रोकरेज का मानना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते युद्ध और तेल कीमतों में उछाल से भारत की आर्थिक वृद्धि और कंपनियों की कमाई पर दबाव पड़ सकता है.
Citi Research ने भारत के प्रमुख शेयर बाजार सूचकांक Nifty 50 का साल के अंत तक का लक्ष्य 28,500 से घटाकर 27,000 कर दिया है. ब्रोकरेज का कहना है कि मिडिल ईस्ट में बढ़ते युद्ध और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से भारत की अर्थव्यवस्था और कॉर्पोरेट कमाई पर जोखिम बढ़ गया है. हालांकि मौजूदा स्तर से यह लक्ष्य अभी भी करीब 17% की संभावित बढ़त दर्शाता है. साथ ही Citi ने निफ्टी के वैल्यूएशन मल्टीपल को भी घटाकर 20x से 19x (एक साल के फॉरवर्ड पी/ई) कर दिया है.
सप्लाई रुकने से पड़ सकता है असर
Citi Research के सुरेंद्र गोयल का कहना है कि कंपनियों की कमाई पर असर इस बात पर निर्भर करेगा कि सप्लाई बाधित होने की स्थिति कितने समय तक बनी रहती है. ब्रोकरेज के मुताबिक अगर सप्लाई में तीन महीने तक बाधा रहती है तो इसका भारत की अर्थव्यवस्था पर कई तरह का असर हो सकता है.
- FY27 की GDP ग्रोथ में 20-30 बेसिस पॉइंट की कमी
- महंगाई में 50-75 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी
- राजकोषीय घाटा 10 बेसिस पॉइंट बढ़ सकता है
- चालू खाते के घाटे में 25 अरब डॉलर का इजाफा
RBI की नीति पर भी असर संभव
Citi का अनुमान है कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) अप्रैल में अपनी मौद्रिक नीति में कोई बदलाव नहीं करेगा. हालांकि अगर सरकार वित्तीय उपायों से महंगाई के दबाव को संभाल लेती है तो केंद्रीय बैंक की नीति का झुकाव ग्रोथ को सपोर्ट करने की ओर हो सकता है.
एनर्जी संकट से बढ़ा सप्लाई शॉक
ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमले के बाद शुरू हुआ युद्ध अब तीसरे हफ्ते में पहुंच गया है. इसका असर वैश्विक कमोडिटी, करेंसी और इक्विटी बाजारों पर दिखने लगा है. Nifty 50 और BSE Sensex भी पिछले हफ्ते रिकॉर्ड ऊंचाई से करीब 9% की तकनीकी गिरावट में आ गए. युद्ध शुरू होने के बाद से दोनों सूचकांक करीब 8% तक गिर चुके हैं जबकि भारतीय रुपया भी रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया है.
कई सेक्टरों पर पड़ेगा असर
Citi के मुताबिक यह संकट अब केवल तेल कीमतों तक सीमित नहीं है, बल्कि सप्लाई बाधा में बदल रहा है. इससे LPG, LNG, उर्वरक, पेट्रोकेमिकल और एल्यूमिनियम जैसे सेक्टर प्रभावित हो सकते हैं. इसके चलते कई उद्योगों की लागत और कच्चे माल की उपलब्धता पर दबाव बढ़ सकता है.
इसका असर इन सेक्टरों पर पड़ सकता है:
- ऑटोमोबाइल
- कंस्ट्रक्शन
- फूड इंडस्ट्री
- फार्मा
- पेंट्स
- शिपिंग
सबसे ज्यादा खतरे में ये सेक्टर
Citi के अनुसार, उर्वरक और पेट्रोकेमिकल सेक्टर इस संकट से सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं क्योंकि भारत इन उत्पादों के लिए मिडिल ईस्ट पर काफी हद तक निर्भर है. इसी जोखिम को देखते हुए ब्रोकरेज ने ऑटो सेक्टर की रेटिंग ‘ओवरवेट’ से घटाकर ‘न्यूट्रल’ कर दी है. साथ ही Mahindra & Mahindra को अपने टॉप पिक्स से हटा दिया है, जबकि Mahanagar Gas को भी मिड-कैप टॉप पिक्स की सूची से बाहर कर दिया गया है.
यह भी पढ़ें: 100 साल पुरानी कंपनी को अगले 10 साल के लिए मिला मेगा ऑर्डर, रेखा झुनझुनवाला का है 8% स्टेक, शेयर पर टूट पड़े निवेशक
डिस्क्लेमर: Money9live किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है. यहां पर केवल स्टॉक्स की जानकारी दी गई है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.
Latest Stories
Nifty Outlook 17 March: शैडो के साथ चार्ट पर बना बुलिश कैंडल, आएगी तेजी या फिसलेगा निफ्टी? क्या हो रणनीति?
REC Ltd Dividend: सरकारी कंपनी ने घोषित किया 32% का डिविडेंड, निवेशकों की मौज, जानिए रिकॉर्ड डेट
रिकॉर्ड लो लेवल पर रुपया! डॉलर के मुकाबले पहुंचा 92.49, जानें पिछले 5 साल में कब-कब फिसली भारतीय करेंसी
