1 अप्रैल से 150% महंगी होगी F&O ट्रेडिंग, जानें हर ट्रांजैक्‍शन पर कितना देना पड़ेगा STT, ये है पूरा कैलकुलेशन

1 अप्रैल से F&O ट्रेडिंग पर STT में बढ़ोतरी होगी, जिससे हर ट्रांजैक्शन महंगा हो जाएगा. बार-बार ट्रेड करने वाले निवेशकों पर सबसे ज्यादा असर पड़ेगा, जबकि डिलीवरी निवेश पर कोई बदलाव नहीं देखने को मिलेगा. तो कितना बढ़ाया गया एसटीटी जानें पूरी डिटेल.

option trading Image Credit: TV9 Bharatvarsh

F&O trading to get costlier: शेयर बाजार में डेरिवेटिव्स यानी फ्यूचर्स और ऑप्शंस (F&O) में ट्रेडिंग अब महंगी होने जा रही है. 1 अप्रैल से सरकार और RBI के नए नियम लागू होंगे, जिनका मकसद सट्टेबाजी पर लगाम लगाना है, लेकिन इससे ट्रेडर्स की जेब पर सीधा असर पड़ेगा. तो नए नियम लागू होने से अब ट्रेडिंग कितनी महंगी पड़ेगी आज हम आपको इसी के बारे में बताएंगे.

क्‍या बदले नियम?

बजट 2026-27 में सरकार ने फ्यूचर्स ट्रेडिंग पर सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) को 0.02% से बढ़ाकर 0.05% करने का ऐलान किया था, यानी इसमें 150% की बढ़ोतरी का फैसला. वहीं ऑप्शंस ट्रेडिंग पर भी टैक्स बढ़ाया गया, जहां प्रीमियम और एक्सरसाइज पर STT 0.10% और 0.125% से बढ़कर 0.15% हो जाएगा. ये सभी नियम 1 अप्रैल, 2026 यानी बुधवार से लागू होंगे.

इसके अलावा भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने भी ब्रोकर्स के लिए कड़े लेंडिंग नियम लागू किए हैं. अब कैपिटल मार्केट इंटरमीडियरी को दिए जाने वाले सभी लोन 100% कोलैटरल से सुरक्षित होने चाहिए. इससे ब्रोकर्स की फंडिंग सीमित होगी और ट्रेडिंग पर असर पड़ेगा.

कितना बढ़ेगा खर्च?

उदाहरण से समझते हैं, अगर कोई Futures ट्रेडिंग में ₹10 लाख की खरीदारी करता है तो पहले इस पर STT 0.02% था, तो उस हिसाब से इस पर ₹200 रुपये टैक्‍स देना हेाता था, लेकिनअब STT बढ़ाकर 0.05% कर दिया गया है. ऐसे में 10 लाख रुपये की खरीदारी पर ₹500 शुल्‍क देना होगा. यानी पहले के मुकाबले आपको 300 रुपये अतिरिक्‍त फीस देनी पड़ेगी.

वहीं अगर मान लीजिए आप Options ट्रेडिंग प्रीमियम पर ₹20,000 की खरीदारी की, जिस पर पहले STT 0.10% था, और इसके बदले आपको 20 रुपये चुकाने होते थे. अब STT के 0.15% होने पर इमें 30 रुपये देने होंगे. यानी अब पहले से 10 रुपये ज्‍यादा चुकाने होंगे.

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जानकारों की राय

जेएम फाइनेंशियल के जानकारों के मुताबिक STT बढ़ने से डिलीवरी निवेश प्रभावित नहीं होगा. चूंकि सरकार ने साफ किया है कि यह बदलाव केवल डेरिवेटिव्स (F&O) पर लागू होगा. डिलीवरी बेस्ड इक्विटी, इंट्राडे कैश और इक्विटी म्यूचुअल फंड पर STT में कोई बदलाव नहीं किया गया है. वहीं लो-फ्रीक्वेंसी यानी कम ट्रेड करने वाले निवेशकों पर इसका असर सीमित रहेगा. लेकिन जो ट्रेडर्स बार-बार (इंट्राडे या वीकली ऑप्शंस) ट्रेड करते हैं, उनके लिए कुल लागत काफी बढ़ सकती है, क्योंकि हर ट्रेड पर STT देना होता है.

मान लीजिए आपने निफ्टी ऑप्शन खरीदा, जिसका प्रीमियम ₹100 है और लॉट साइज 50 है. कुल वैल्यू = ₹5,000, पहले STT 0.10% था और टैक्स = ₹5 लगता था, लेकिन अब STT 0.15% हो गई है तो टैक्स = ₹7.50 लगेगा. यानी हर ट्रेड पर ₹2.50 ज्यादा देना होगा. ये अंतर छोटा लग सकता है, लेकिन अगर आप दिन में कई ट्रेड करते हैं, तो यही लागत धीरे-धीरे काफी बड़ी हो जाती है और मुनाफे को कम कर देती है.