FPIs ने चार दिनों में निकाले 13740 करोड़ रुपये, इक्विटी में सबसे ज्यादा बिकवाली; जानिए क्यों भाग रहे हैं विदेशी निवेशक
भारतीय शेयर बाजारों में पिछले हफ्ते अचानक विदेशी निवेशकों की बिकवाली तेज हो गई. कुछ ही दिनों में उन्होंने अरबों रुपये निकाल लिए. जानिए इस गिरावट के पीछे क्या वजह है, कौन से सेक्टर पर सबसे ज्यादा असर पड़ा और क्या आने वाले हफ्तों में हालात सुधर सकते हैं.
भारतीय शेयर बाजारों से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) का भरोसा इस हफ्ते कमजोर पड़ा. नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड (NSDL) के आंकड़ों के मुताबिक, 3 नवंबर से 7 नवंबर 2025 के बीच FPIs ने कुल 13,740.43 करोड़ रुपये की निकासी की. चार कारोबारी सत्रों के दौरान हुई इस बिकवाली ने बाजार के मूड पर असर डाला और निफ्टी-सेंसेक्स दोनों हफ्ते के अंत तक गिरावट के साथ बंद हुए.
सोमवार को सबसे बड़ी बिकवाली
सप्ताह की शुरुआत से ही एफपीआई ने बिकवाली का रुख बनाए रखा. सबसे बड़ी निकासी सोमवार को दर्ज की गई जब उन्होंने 6,422.49 करोड़ रुपये बाजार से निकाल लिए. शुक्रवार को भी उन्होंने 3,754 करोड़ रुपये की बिकवाली की. मंगलवार को 1,583.52 करोड़ रुपये का आउटफ्लो हुआ, जबकि गुरुवार को मामूली 20.14 करोड़ रुपये की खरीदारी दर्ज हुई. बुधवार को बाजार अवकाश के वजह से बंद था.
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट डॉ. वी के विजयकुमार के अनुसार, “अक्टूबर में एफआईआई ने 3,902 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी की थी, लेकिन नवंबर की शुरुआत से ही वे लगातार विक्रेता बने हुए हैं. अब तक नवंबर में एफआईआई ने 13,367 करोड़ रुपये की शुद्ध बिक्री की है, जिससे 2025 में अब तक की कुल बिकवाली 2,07,568 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है.”
इक्विटी बाजार में सबसे ज्यादा दबाव
FPIs ने इस सप्ताह केवल इक्विटी से ही 12,568.66 करोड़ रुपये की भारी निकासी की. सोमवार को 7,586.75 करोड़ रुपये का आउटफ्लो हुआ, जबकि शुक्रवार को 2,723.56 करोड़ रुपये और मंगलवार को 1,932.18 करोड़ रुपये की बिक्री दर्ज हुई. हालांकि, गुरुवार को थोड़ी राहत मिली जब 326.17 करोड़ रुपये की मामूली बिकवाली ही देखने को मिली.
प्राइमरी मार्केट में निवेश बरकरार, डेब्ट मार्केट का हाल
हालांकि सेकेंडरी मार्केट में बिकवाली तेज रही, लेकिन प्राइमरी मार्केट यानी आईपीओ और नई लिस्टिंग्स में एफपीआई का भरोसा कायम दिखा. इस दौरान उन्होंने कुल 798.67 करोड़ रुपये का निवेश किया. गुरुवार को 444.26 करोड़ और शुक्रवार को 329.15 करोड़ रुपये की एफपीआई खरीदारी हुई.
डेब्ट सेगमेंट में एफपीआई की गतिविधियां संतुलित रहीं. डेब्ट-एफएआर कैटेगरी में उन्होंने 1,003.81 करोड़ रुपये का निवेश किया, जबकि डेब्ट-VRR में 1,416.67 करोड़ रुपये की खरीदारी दर्ज हुई. वहीं, जनरल डेब्ट लिमिट सेगमेंट से 1,857.59 करोड़ रुपये की निकासी हुई.
बाजार पर असर और आगे की राह
सप्ताह के अंत में निफ्टी 0.89 फीसदी गिरकर 25,492.30 पर और सेंसेक्स 0.86 फीसदी फिसलकर 83,216.28 पर बंद हुआ. रुपये में भी मामूली कमजोरी दर्ज की गई जो सोमवार के ₹88.72 से घटकर शुक्रवार को ₹88.60 प्रति डॉलर पर आ गया.
डॉ. विजयकुमार नेBI के हवाले से कहा, “ग्लोबल मार्केट्स में एआई थीम वाले देशों को ‘विजेता’ और भारत को ‘AI लूजर’ के तौर पर देखा जा रहा है. इसी धारणा के कारण एफपीआई फिलहाल अन्य बाजारों की ओर झुक रहे हैं. हालांकि, अगर भारत की अर्निंग ग्रोथ बेहतर बनी रही तो एफपीआई फिर से खरीदार बन सकते हैं, लेकिन इसमें थोड़ा वक्त लगेगा.”
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