IT सेक्टर से भारी निकासी, इंफ्रा-फाइनेंशियल शेयरों में बढ़ा निवेश; 15 दिन में FIIs ने कहां बढ़ाया और घटाया पैसा
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की तेज प्रतिस्पर्धा और वैश्विक अनिश्चितता के बीच विदेशी निवेशकों ने भारतीय IT सेक्टर में बिकवाली बढ़ा दी है. फरवरी के पहले पखवाड़े में IT से बड़ी निकासी हुई, जबकि कैपिटल गुड्स, फाइनेंशियल सर्विसेज और एनर्जी सेक्टर में मजबूत निवेश देखने को मिला.
FIIs Increase and Cut Sector after AI Effect: वैश्विक टेक इंडस्ट्री इन दिनों आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की तेज रफ्तार के कारण बड़े बदलावों के दौर से गुजर रही है. एआई टूल्स लगातार बेहतर और कंपटेटिव होते जा रहे हैं, जिससे दुनिया भर की टेक कंपनियों पर अपने सिस्टम को अपग्रेड करने और नई तकनीकों में भारी निवेश करने का दबाव बढ़ गया है. हाल में Anthropic से जुड़े घटनाक्रम ने इस प्रतिस्पर्धा और अनिश्चितता को और तेज कर दिया है, जिसका असर निवेशकों की धारणा पर भी दिखाई दे रहा है.
IT सेक्टर पर क्यों बढ़ा दबाव?
AI के तेजी से विस्तार का मतलब है कि आईटी कंपनियों को रिसर्च, इंफ्रास्ट्रक्चर, क्लाउड कैपेसिटी पर ज्यादा खर्च करना पड़ेगा. अल्पकाल में इससे लागत बढ़ सकती है और मुनाफे पर दबाव आ सकता है. जो कंपनियां तेजी से बदलाव को अपनाने में सक्षम नहीं होंगी, उनके लिए प्रतिस्पर्धा में टिके रहना मुश्किल हो सकता है. हालांकि, जो कंपनियां AI को रणनीतिक रूप से अपनाती हैं, उन्हें लंबी अवधि में बड़ा लाभ मिल सकता है. इसी अनिश्चित माहौल के बीच विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने भारतीय आईटी शेयरों में अपनी हिस्सेदारी कम करनी शुरू कर दी है.
फरवरी की शुरुआत में IT से बड़ी निकासी
1 से 15 फरवरी के बीच आईटी सेक्टर में FII निवेश घटकर करीब 4.49 लाख करोड़ रुपये रह गया, जो जनवरी के अंत की तुलना में लगभग 16 फीसदी कम है. कभी लगभग 7 लाख करोड़ रुपये के शिखर पर पहुंचा FII निवेश अब लगातार गिरावट के रुझान में है. इससे साफ संकेत मिलता है कि विदेशी निवेशकों ने इस सेक्टर में बिकवाली बढ़ाई है. वैश्विक टेक स्पेस में बढ़ती प्रतिस्पर्धा, एआई को लेकर असमंजस और संभावित नियामकीय या लागत संबंधी चुनौतियों ने निवेशकों को सतर्क बना दिया है.
किन सेक्टर्स में हुई बिकवाली?
1–15 फरवरी के दौरान FII आउटफ्लो के आंकड़े बताते हैं कि-
| सेक्टर | निकासी (₹ करोड़) |
|---|---|
| IT | -10,956 |
| FMCG | -1,182 |
| हेल्थकेयर | -1,051 |
| कंज्यूमर ड्यूरेबल्स | -434 |
| टेलीकम्युनिकेशन | -106 |
यह संकेत देता है कि विदेशी निवेशकों ने पारंपरिक रूप से मजबूत और डिफेंसिव माने जाने वाले सेक्टर्स में भी एक्सपोजर घटाया है.
किन सेक्टर्स में आया पैसा?
दूसरी ओर, शुरुआती फरवरी में कुछ सेक्टर्स में मजबूत खरीदारी देखी गई-
| सेक्टर | निवेश (₹ करोड़) |
|---|---|
| कैपिटल गुड्स | 8,032 |
| फाइनेंशियल सर्विसेज | 6,175 |
| ऑयल एंड गैस | 4,678 |
| मेटल्स एंड माइनिंग | 3,279 |
| पावर | 3,272 |
| कंस्ट्रक्शन | 1,745 |
| सर्विसेज | 1,286 |
| कंज्यूमर सर्विसेज | 1,066 |
| रियल्टी | 786 |
| केमिकल्स | 642 |
| ऑटो | 511 |
| कंस्ट्रक्शन मटेरियल्स | 378 |
इन आंकड़ों से साफ है कि विदेशी निवेशक कैपिटल इंटेंसिव और सिलिकल यानी चक्रीय सेक्टर्स की ओर रुख कर रहे हैं, खासकर इंफ्रास्ट्रक्चर, एनर्जी और वित्तीय सेवाओं से जुड़े क्षेत्रों में.
क्या है यह रोटेशन स्ट्रैटेजी?
इसे “सेक्टोरल रोटेशन” कहा जाता है. यानी निवेशक एक सेक्टर से पैसा निकालकर दूसरे सेक्टर में लगा रहे हैं. जनवरी में जिन सेक्टर्स में बिकवाली थी, उनमें से कई फरवरी की शुरुआत में सकारात्मक प्रवाह दिखा रहे हैं. इससे संकेत मिलता है कि FIIs वैश्विक मैक्रो-आर्थिक संकेतों, वैल्यूएशन और ग्रोथ आउटलुक को देखते हुए अपनी रणनीति बदल रहे हैं.
आगे क्या?
आईटी सेक्टर फिलहाल मुश्किल दौर से गुजर रहा है. AI बेस्ड टेक्नोलॉजी में निवेश अनिवार्य होता जा रहा है, लेकिन इससे जुड़ी लागत और प्रतिस्पर्धा अल्पकालिक दबाव पैदा कर सकती है. वहीं, इंफ्रास्ट्रक्चर, एनर्जी और वित्तीय सेवाओं जैसे क्षेत्रों में निवेश बढ़ना यह दर्शाता है कि विदेशी निवेशक भारत की घरेलू विकास कहानी और कैपेक्स चक्र पर भरोसा जता रहे हैं. कुल मिलाकर फरवरी के शुरुआती पखवाड़े के आंकड़े यह दिखाते हैं कि बाजार में रिस्क लेने की रणनीति बदल रही है. आईटी से निकासी और कैपिटल गुड्स व फाइनेंशियल्स में निवेश बढ़ना निवेशकों के बदलते नजरिए का संकेत है, जो आने वाले महीनों में बाजार की दिशा तय कर सकता है.
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