NTPC छोड़िए… ये 3 छोटी कंपनियां बन सकती हैं बड़ी विजेता, 2047 तक 100 GW का सपना, 20000 करोड़ के न्यूक्लियर PLI
भारत की कुल बिजली क्षमता में अभी परमाणु ऊर्जा की हिस्सेदारी करीब 1.7 प्रतिशत है. सरकार इसे साल 2030 तक 2 प्रतिशत से ज्यादा और लंबे समय में 5 प्रतिशत से ऊपर ले जाना चाहती है. साल 2047 तक 100 गीगावॉट क्षमता बनाने का रोडमैप तैयार किया गया है.
3 atomic underdogs: भारत की न्यूक्लियर एनर्जी योजना अब सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं रह गई है. सरकार नियम आसान कर रही है, पैसा लगा रही है और निजी कंपनियों के लिए रास्ते खोल रही है. इसी दिशा में नया SHANTI बिल लाया गया, जिससे निजी कंपनियों की भागीदारी संभव हुई और सप्लायर कंपनियों की जिम्मेदारी की सीमा तय की गई. साथ ही सरकार का लक्ष्य 2047 तक 100 गीगावॉट परमाणु बिजली क्षमता बनाने का है.
बजट 2026 में परमाणु ऊर्जा विभाग को हजारों करोड़ रुपये दिए गए हैं और जरूरी उपकरणों पर कस्टम ड्यूटी भी घटाई गई है. इसके अलावा 20,000 करोड़ रुपये की प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव योजना का प्रस्ताव भी आया है. बड़े सरकारी नामों के साथ अब कुछ छोटी लेकिन खास तकनीक वाली कंपनियां भी इस सेक्टर में तेजी से उभर रही हैं. निवेशकों की नजर इन “एटॉमिक अंडरडॉग्स” पर टिकी है, जो आने वाले सालों में बड़ा फायदा उठा सकती हैं.
सरकार की बड़ी योजना
एक्सपर्ट के मुताबिक भारत की कुल बिजली क्षमता में अभी परमाणु ऊर्जा की हिस्सेदारी करीब 1.7 प्रतिशत है. सरकार इसे साल 2030 तक 2 प्रतिशत से ज्यादा और लंबे समय में 5 प्रतिशत से ऊपर ले जाना चाहती है. साल 2047 तक 100 गीगावॉट क्षमता बनाने का रोडमैप तैयार किया गया है. बजट 2026 में परमाणु ऊर्जा विभाग को 24,124 करोड़ रुपये मिले हैं, जिनमें से करीब 10,000 करोड़ रुपये पूंजीगत खर्च के लिए हैं. 2035 तक न्यूक्लियर प्रोजेक्ट के लिए आयात होने वाले सामान पर छूट दी गई है. फरवरी 2026 से कुछ अहम उपकरणों पर बेसिक कस्टम ड्यूटी भी खत्म कर दी गई है.
MTAR टेक
MTAR टेक पिछले 40 सालों से परमाणु रिएक्टरों के लिए बेहद सटीक मशीन और पार्ट्स बनाती रही है. कंपनी ईंधन भरने वाली मशीन, कूलिंग सिस्टम और दूसरे जरूरी हिस्से सप्लाई करती है. मैनेजमेंट के अनुसार एक 700 मेगावॉट रिएक्टर से कंपनी को 350 से 400 करोड़ रुपये तक का काम मिल सकता है. हाल ही में उसे काइगा यूनिट 5 और 6 के लिए 500 करोड़ रुपये से ज्यादा का ऑर्डर मिला है, जो तीन साल में पूरा होगा. अभी इस सेगमेंट से कम कमाई हो रही है, लेकिन साल 2027 से इसमें तेज बढ़त आने की उम्मीद है.

HCC
HCC कई बड़े परमाणु प्रोजेक्ट में सिविल कंस्ट्रक्शन का काम कर चुकी है. इसमें राजस्थान, कूडनकुलम, काकरापार और नारोरा जैसे प्रोजेक्ट शामिल हैं. कंपनी अभी कलपक्कम में फास्ट रिएक्टर फ्यूल साइकिल फैसिलिटी बना रही है. HCC का अनुमान है कि उसके पास करीब 40000 करोड़ रुपये की बोली पाइपलाइन है, जिसमें से 15 से 20 प्रतिशत काम परमाणु और जल क्षेत्र से आ सकता है. कंपनी भविष्य में छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों से भी मौके देख रही है.

Azad Engineering
अजाद इंजीनियरिंग विदेशी कंपनियों के लिए टरबाइन के बेहद जटिल पार्ट्स बनाती है. न्यूक्लियर सेक्टर में इसके प्रोडक्ट को मंजूरी मिलने में कई साल लगते हैं, जिससे Competition कम रहती है और ग्राहक लंबे समय तक जुड़े रहते हैं. कंपनी ने हाल में 53.5 मिलियन डॉलर का एक बड़ा अंतरराष्ट्रीय समझौता किया है. अज़ाद अपनी क्षमता दस गुना तक बढ़ाने की योजना पर काम कर रही है और नए प्लांट खोल चुकी है.

| कंपनी | EV/EBITDA | 3Y Median EV/EBITDA | Industry EV/EBITDA | ROCE (%) | ROE (%) |
| MTAR Tech | 67.8 | 41.0 | 64.0 | 10.5 | 7.5 |
| HCC | 9.2 | 10.5 | 10.2 | 25.2 | -0.7 |
| AZAD | 43.8 | 59.7 (1.5Y) | 19.1 | 12.2 | 8.9 |
| सोर्स: Screener.in, FE, Groww | |||||
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