पावर सेक्टर में Adani-Tata के बीच कांटे की टक्कर, किसकी कंपनी है ज्यादा दमदार, आंकड़े दे देंगे पूरा हिसाब
भारत का बिजली सेक्टर तेजी से ग्रो कर रहा है. 500 गीगावाट से अधिक क्षमता, रूरल इलेक्ट्रिफिकेशन और सोलर-विंड जैसे क्लीन सोर्स की बढ़ती हिस्सेदारी ने हालात बदल दिए हैं. स्मार्ट ग्रिड, बैटरी स्टोरेज और नई तकनीकों से कंपनियों का दायरा बढ़ रहा है. इसी बदलते दौर में अडानी पावर और टाटा पावर दो बड़े खिलाड़ी के रूप में उभरे हैं.
Power Stocks: भारत का बिजली क्षेत्र पिछले कुछ सालों में काफी तेजी से बढ़ा है. अब देश में 500 गीगावाट से ज्यादा बिजली बनाने की क्षमता हो गई है. पहले जहां बिजली की बहुत किल्लत थी अब वो लगभग खत्म हो गई है. आधी से ज्यादा बिजली अब सोलर और विंड जैसे क्लीन एनर्जी सोर्स से बन रही है. गांवों में DDUGJY (Deen Dayal Upadhyaya Gram Jyoti Yojana) और सौभाग्या योजना से करोड़ों घरों तक बिजली पहुंच गई है.
बिजली बनाने में कोयला अभी भी काफी इस्तेमाल होता है लेकिन अब हाइड्रो, न्यूक्लियर और ग्रीन हाइड्रोजन जैसी नई तकनीक भी तेजी से आ रही है. इसलिए प्राइवेट कंपनियां इस सेक्टर में रुचि दिखा रही है. स्मार्ट ग्रिड और बैटरी स्टोरेज का काम भी जोरों पर है. इससे कंपनियों का कारोबार बढ़ रहा है. साथ ही इस सेक्टर में एक्टिव कंपनियों के निवेशकों को मुनाफा हो रहा है या होने की उम्मीद है. इस सेक्टर की दो दिग्गज कंपनी अडानी पावर और टाटा पावर है. इस रिपोर्ट में आप जानेंगे कि दोनों कंपनियों की क्षमता क्या है.
Adani Power
अडानी ग्रुप की कंपनी अडानी पावर भारत की सबसे बड़ी प्राइवेट थर्मल पावर कंपनी है. इसकी मार्केट वैल्यू 2 लाख 87 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा है. शेयर अभी 149 रुपये पर कारोबार कर कर रहा है. पिछले 5 साल में 1839% का रिटर्न दे चुका है.
ट्रेड ब्रेन के अनुसार, कंपनी के पास अभी 18,150 मेगावाट थर्मल पावर प्लांट हैं. लंबे समझौते और अच्छी लॉजिस्टिक्स की वजह से इनका खर्च कम रहता है. कंपनी 74 मिलियन टन कोयला हर साल हैंडल करती है और अपना 14 मिलियन टन का कोल माइन भी बना रही है. कंपनी का लक्ष्य 41,870 मेगावाट बिजली बनाने का है .
Tata Power Company
टाटा पावर बिजली बनाने वाली कंपनी है जो अभी लगभग 26,326 मेगावाट बिजली बनाती है. इसमें से 8,860 मेगावाट कोयले से और बाकी सोलर, विंड जैसे क्लीन एनर्जी स्रोतों से प्रोडक्शन होता है. शुक्रवार को बाजार बंद होने तक इसके शेयर की कीमत 387 रुपये था. कंपनी का लक्ष्य है कि 2030 तक उसकी 70% बिजली क्लीन एनर्जी से बने और साल 2045 तक कार्बन उत्सर्जन बिल्कुल जीरो हो जाए. कंपनी के पास 4,659 सर्किट किलोमीटर लंबी ट्रांसमिशन लाइनों का नेटर्वक भी है. साथ ही कंपनी मुंबई, दिल्ली जैसे शहरों में 1.3 करोड़ से ज्यादा घरों तक बिजली पहुंचाती है.
इसके अलावा टाटा पावर 4.9 गीगावाट क्षमता के सोलर पैनल भी खुद बनाती है. कंपनी पूरे देश में 5,600 से ज्यादा इलेक्ट्रिक गाड़ियों के चार्जिंग स्टेशन चला रही है. अपना कोयला ये ज्यादातर इंडोनेशिया की दो बड़ी खदानों कल्टिम प्राइमा कोल (KPC) और बारामल्टी सुक्सेसराना (BSSR) से लाती है जिनमें इनकी हिस्सेदारी है. इसकी कुल क्षमता 78 मिलियन टन सालाना है.
दोनों कंपनियां कैसे अलग हैं
अडानी पावर सिर्फ थर्मल पावर पर फोकस है और भारत के अंदर ही कोयला खदानों और लॉजिस्टिक्स पर जोर दे रही है. टाटा पावर पूरी चेन कंट्रोल करती है और तेजी से रिन्यूएबल एनर्जी की तरफ जा रही है. ट्रांसमिशन डिस्ट्रीब्यूशन, सोलर मैन्युफैक्चरिंग और EV चार्जिंग में भी हाथ आजमा रही है.
डिस्क्लेमर: Money9live किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है. यहां पर केवल स्टॉक्स की जानकारी दी गई है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.
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