NSE का बड़ा फैसला! 4 शेयरों में F&O ट्रेडिंग होगी बंद, SEBI के नए नियमों का दिखा असर
NSE ने सेबी के सख्त नए मानदंडों के बाद चार शेयरों में F&O ट्रेडिंग चरणबद्ध तरीके से बंद करने का फैसला किया है. 29 अप्रैल 2026 के बाद इन कंपनियों में कोई भी डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट उपलब्ध नहीं रहेगा, हालांकि मौजूदा कॉन्ट्रैक्ट अपनी एक्सपायरी तक जारी रहेंगे. सेबी के नए नियमों का मकसद कम लिक्विडिटी वाले शेयरों में मैनिपुलेशन रोकना और डेरिवेटिव बाजार को ज्यादा पारदर्शी व सुरक्षित बनाना है.
F&O Trading ban on these companies: शेयर बाजार के डेरिवेटिव सेगमेंट में बड़ा बदलाव होने जा रहा है. नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया यानी NSE ने चार कंपनियों के फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस यानी F&O कॉन्ट्रैक्ट्स को बंद करने का ऐलान किया है. यह कदम सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया यानी SEBI के नए और सख्त नियमों के बाद उठाया गया है.
किन शेयरों पर लगेगी रोक?
NSE ने साफ किया है कि चार कंपनियों में नए एक्सपायरी महीने के लिए कोई नया F&O कॉन्ट्रैक्ट लॉन्च नहीं किया जाएगा. इनमें शामिल कंपनियों के नाम इस प्रकार हैं.
- हाउसिंग एंड अर्बन डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (Housing & Urban Development Corporation Limited)
- पीरामल फार्मा लिमिटेड (Piramal Pharma Limited)
- टाटा टेक्नोलॉजी लिमिटेड (Tata Technologies Limited)
- टॉरेंट पावर लिमिटेड (Torrent Power Limited)
अप्रैल सीरीज की एक्सपायरी के बाद इन शेयरों में डेरिवेटिव ट्रेडिंग पूरी तरह बंद हो जाएगी. 29 अप्रैल 2026 के बाद इन चारों शेयरों में कोई भी F&O कॉन्ट्रैक्ट ट्रेडिंग नहीं हेा पाएगी.
मौजूदा निवेशकों के लिए राहत
NSE ने यह भी साफ किया कि फरवरी, मार्च और अप्रैल 2026 की मौजूदा अनएक्सपायर्ड कॉन्ट्रैक्ट्स अपनी-अपनी एक्सपायरी तक ट्रेडिंग के लिए उपलब्ध रहेंगे. साथ ही इन मौजूदा कॉन्ट्रैक्ट महीनों में नए स्ट्राइक प्राइस भी जोड़े जाते रहेंगे. यानि जिन निवेशकों के पास पहले से पोजिशन है, उन्हें अचानक बाहर नहीं किया जाएगा. लेकिन नए लंबे समय के कॉन्ट्रैक्ट की एंट्री बंद कर दी जाएगी.
SEBI के नियम
अगस्त 2024 में SEBI ने F&O सेगमेंट में शेयरों की एंट्री और बने रहने के लिए नए पात्रता मानदंड जारी किए थे. इसके तहत शेयर अपने औसत मार्केट कैप और ट्रेडेड वैल्यू के आधार पर टॉप 500 में होना चाहिए. वहीं MQSOS यानी मीडियन क्वार्टर-सिग्मा ऑर्डर साइज कम से कम 75 लाख रुपये होना जरूरी है. इसके अलावा MWPL यानी मार्केट वाइड पोजिशन लिमिट 1500 करोड़ रुपये हो. वहीं ADDV यानी औसत दैनिक डिलीवरी वैल्यू 35 करोड़ रुपये होनी चाहिए. सेबी का कहना है कि अगर कोई शेयर इनमें से किसी भी मानदंड पर खरा नहीं उतरता, तो उसे F&O से बाहर किया जा सकता है. SEBI ने प्रोडक्ट सक्सेस फ्रेमवर्क को भी स्टॉक डेरिवेटिव्स पर लागू कर दिया है, जिसमें भागीदारी, लिक्विडिटी और ट्रेडिंग गतिविधि की मासिक समीक्षा होगी.
सेबी का मकसद
SEBI के नियमों में बदलाव की वजह निवेशकों की सुरक्षा है. दरअसल कम लिक्विडिटी और छोटे मार्केट कैप वाले शेयरों में मैनिपुलेशन की आशंका ज्यादा रहती है. ऑपरेटर्स ऐसे शेयरों में कीमतों को आसानी से प्रभावित कर सकते हैं. मगर सख्त मानदंडों से ऐसे शेयर छंट जाएंगे और महज मजबूत लिक्विडिटी व व्यापक भागीदारी वाले शेयर ही F&O सेगमेंट में बने रहेंगे. इससे सर्कुलर या मिलीभगत वाली ट्रेडिंग पर भी रोक लगेगी. आने वाले समय में और भी कंपनियां जांच के दायरे में आ सकती हैं.
डिस्क्लेमर: Money9live किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है. यहां पर केवल स्टॉक्स की जानकारी दी गई है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.
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