SEBI ने NCDEX, मेट्रोपॉलिटन स्टॉक एक्सचेंज की ऑप्शन मार्केट में एंट्री पर लगाई रोक, जानें- क्या है वजह
पिछले साल के आखिर में नेशनल कमोडिटी एंड डेरिवेटिव्स एक्सचेंज (NCDEX) और मेट्रोपॉलिटन स्टॉक एक्सचेंज (MSE) ने इक्विटी कैश और डेरिवेटिव प्रोडक्ट्स लॉन्च करने और डेवलप करने के लिए सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) से अलग-अलग मंजूरी मांगी थी.
मार्केट रेगुलेटर ने देश के दो सबसे नए एक्सचेंज को इक्विटी डेरिवेटिव्स में ट्रेडिंग ऑफर करने से रोक दिया है और उनसे पहले अपने शेयर-ट्रेडिंग बिजनेस को बढ़ाने को कहा है. रायटर्स ने दो रेगुलेटरी सूत्रों के हवाले से इस बात की जानकारी दी है. एक्सचेंज के खुलासे के मुताबिक, पिछले साल के आखिर में नेशनल कमोडिटी एंड डेरिवेटिव्स एक्सचेंज (NCDEX) और मेट्रोपॉलिटन स्टॉक एक्सचेंज (MSE) ने इक्विटी कैश और डेरिवेटिव प्रोडक्ट्स लॉन्च करने और डेवलप करने के लिए सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) से अलग-अलग मंजूरी मांगी थी.
एग्रीकल्चरल कमोडिटीज ट्रेड
NCDEX ज्यादातर एग्रीकल्चरल कमोडिटीज में ट्रेड करता है, जबकि MSE ज्यादातर करेंसी डेरिवेटिव्स ऑफर करता है और इसका इक्विटी वॉल्यूम बहुत कम है. दोनों एक्सचेंज अपने बिजनेस को डायवर्सिफाई करने की कोशिश कर रहे हैं. SEBI का यह फैसला भारत के बढ़ते इक्विटी डेरिवेटिव्स मार्केट को लेकर लगातार सावधानी को दिखाता है, जहां प्रीमियम अब कैश मार्केट के साइज से लगभग दोगुने हैं, जबकि बड़ी ग्लोबल इकोनॉमी में यह 2% से 3% है.
सबसे एक्टिव डेरिवेटिव एक्सचेंज
डेरिवेटिव ट्रेडिंग को कम करने के लिए उठाए गए कदमों के बावजूद, वर्ल्ड फेडरेशन ऑफ एक्सचेंज के डेटा के मुताबिक, भारत का NSE सबसे एक्टिव डेरिवेटिव एक्सचेंज बना हुआ है, जो दुनिया भर में ट्रेड होने वाले इंडेक्स ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट का 70 से ज्यादा हिस्सा है.
इस महीने की शुरुआत में सरकार ने डेरिवेटिव ट्रेडिंग वॉल्यूम को कम करने में मदद के लिए ट्रांजेक्शन टैक्स बढ़ा दिएय स्टडीज से पता चला है कि 90 फीसदी रिटेल इन्वेस्टर्स को नुकसान होता है.
कैश इक्विटी और इक्विटी डेरिवेटिव
पहले सोर्स ने कहा, ‘SEBI चाहता है कि कैश इक्विटी और इक्विटी डेरिवेटिव के लॉन्च के बीच कम से कम छह महीने का गैप हो.’ एक्सचेंजों को तब तक डेरिवेटिव लॉन्च करने की परमिशन नहीं दी जाएगी जब तक SEBI इस बात से सैटिस्फाइड नहीं हो जाता कि एक अंडरलाइंग लिक्विड कैश मार्केट है.’
सोर्स ने कहा कि रेगुलेटर नहीं चाहता कि नए प्लेयर्स पहले अंडरलाइंग कैश मार्केट बनाए बिना डेरिवेटिव ट्रेडिंग को और बढ़ावा दें. दूसरे सोर्स ने कहा, ‘डेरिएटिव लॉन्च करने की परमिशन देने से पहले एक्सचेंजों को कैश मार्केट में काफी पार्टिसिपेशन, लिक्विडिटी और प्राइस डिस्कवरी दिखानी होगी.’
सोर्स ने पहचान बताने से मना कर दिया क्योंकि वे मीडिया से बात करने के लिए ऑथराइज्ड नहीं हैं. SEBI और NCDEX ने कमेंट के लिए रिक्वेस्ट का जवाब नहीं दिया.
NSE और BSE का दबदबा
MSE ने अपने इक्विटी डेरिवेटिव्स प्लान के बारे में सवालों का जवाब नहीं दिया, लेकिन रॉयटर्स को पिछले महीने जारी एक बयान का जिक्र किया जिसमें कहा गया था कि वह अपने इक्विटी सेगमेंट में लिक्विडिटी और मार्केट डेप्थ को मजबूत करने के लिए मार्केट मेकर्स को अपॉइंट करने के प्रोसेस में है.’ भारत में इक्विटी ट्रेडिंग पर NSE और उसके पुराने साथी BSE का दबदबा है.
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