PMS नियमों की समीक्षा करेगा SEBI, बदलते बाजार हालात में निवेशकों के लिए नए बदलाव के संकेत
सेबी ने पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विस से जुड़े नियमों की व्यापक समीक्षा का ऐलान किया है. चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने कहा कि छह साल पुराने नियमों को मौजूदा बाजार परिस्थितियों के अनुरूप अपडेट किया जाएगा. इस कदम का असर PMS इंडस्ट्री, निवेशकों और ब्रोकरेज सेक्टर पर पड़ सकता है.
शेयर बाजार से जुड़े निवेशकों और पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विस (PMS) में पैसा लगाने वालों के लिए एक अहम संकेत सामने आया है. बाजार नियामक सेबी अब PMS से जुड़े नियमों की बड़े स्तर पर समीक्षा करने जा रहा है. सेबी चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने साफ कहा है कि मौजूदा नियमों को बदलते बाजार हालात के हिसाब से और प्रभावी बनाने की जरूरत है. इस बयान के बाद यह चर्चा तेज हो गई है कि आने वाले समय में PMS इंडस्ट्री के नियमों में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं.
PMS नियमों की होगी व्यापक समीक्षा
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ सिक्योरिटीज मार्केट (NISM) में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान सेबी चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने कहा कि सेबी, SEBI (Portfolio Managers) Regulations, 2020 की व्यापक समीक्षा करने जा रहा है. उन्होंने बताया कि यह नियम करीब छह साल पुराने हो चुके हैं और बाजार की मौजूदा जरूरतों के मुताबिक इनमें कुछ पहलुओं को तर्कसंगत बनाने की जरूरत है. सेबी का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि PMS से जुड़ा फ्रेमवर्क प्रभावी, लचीला और बदलते बाजार ट्रेंड के अनुरूप बना रहे.
निवेश साइज पर सवाल, कंसल्टेशन पेपर लाएगा सेबी
कार्यक्रम के बाद मीडिया से बातचीत में पांडे से पूछा गया कि क्या सेबी PMS में न्यूनतम निवेश राशि की भी समीक्षा कर सकता है, खासकर तब जब सेबी ने हाल ही में म्यूचुअल फंड और PMS के बीच की कैटेगरी के तौर पर स्पेशलाइज्ड इन्वेस्टमेंट फंड (SIF) पेश किया है. हालांकि, इस सवाल पर सेबी चेयरमैन ने कोई सीधा जवाब नहीं दिया. इससे संकेत मिलते हैं कि इस मुद्दे पर फिलहाल चर्चा जारी है, लेकिन कोई फैसला जल्दबाजी में नहीं लिया जाएगा.
तुहिन कांत पांडे ने यह भी स्पष्ट किया कि सेबी हमेशा की तरह इस प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखेगा. पहले एक कंसल्टेशन पेपर जारी किया जाएगा, जिस पर बाजार से जुड़े सभी पक्ष अपनी राय दे सकेंगे. इसके बाद ड्राफ्ट रेगुलेशन लाकर पब्लिक कमेंट्स मांगे जाएंगे. इससे निवेशकों और इंडस्ट्री को बदलावों के लिए तैयार होने का समय मिलेगा.
ब्रोकर्स की RBI गाइडलाइंस पर चिंता
सेबी चेयरमैन ने बताया कि स्टॉक ब्रोकर्स ने RBI की नई लेंडिंग गाइडलाइंस को लेकर अपनी चिंताएं जाहिर की हैं. गौरतलब है कि 1 अप्रैल से RBI बैंकों को ब्रोकर्स की प्रॉप्राइटरी ट्रेडिंग के लिए लोन देने से रोकने और अन्य मामलों में 100 फीसदी कोलैटरल की शर्त लागू करने की तैयारी में है. सेबी ने कहा है कि वह इस मामले को RBI के साथ उठाएगा, हालांकि उन्होंने पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं की है.
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AI से बढ़ी निगरानी और सख्ती
सेबी चीफ ने यह भी बताया कि सेबी अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित टूल्स का इस्तेमाल कर रहा है. इनका उपयोग खासतौर पर फिनफ्लुएंसर्स की निगरानी और यह सुनिश्चित करने के लिए किया जा रहा है कि निवेश सलाह और प्रमोशन के बीच की सीमा का उल्लंघन न हो. इसके अलावा, हाल ही में एक सीनियर अधिकारी पर हुई कार्रवाई को लेकर भी सेबी ने माना कि गंभीर चूक पाए जाने पर शुरुआती कदम उठाए गए हैं.
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