सिगरेट महंगी हुई, स्मोकर्स खिसके और शेयर लुढ़के…लेकिन टैक्स आंधी के लिए पहले से तैयार थी Godfrey, क्या ITC को देगी मात?

सिगरेट पर टैक्स बढ़ते ही बाजार में हलचल तेज हो गई. कीमतें बढ़ीं तो स्मोकर्स का रुख बदला और ITC, Godfrey Phillips जैसे बड़े शेयर दबाव में आ गए. लेकिन इस टैक्स झटके के बीच Godfrey Phillips पहले से तैयार नजर आता है, जिससे अब यह सवाल उठने लगा है कि क्या बदले हालात में वह ITC को कड़ी टक्कर दे सकता है.

Best Tobacco Stock Image Credit: AI Generated

Tobacco Stock to buy: भारत के सिगरेट सेक्टर में अचानक आए टैक्स झटके ने बाजार की जमी-जमाई सेंटीमेंट को हिला दिया है. संसद से नए कानून के पास होते ही सिगरेट की कीमतें बढ़ने लगी है और इसका असर सीधा आम खरीदार की जेब पर पड़ रहा है. बाजार में यह धारणा तेजी से मजबूत हुई कि महंगी सिगरेट से खपत घटेगी, कंपनियों की बिक्री और मुनाफे पर दबाव आएगा और बाजार हिस्सेदारी का खेल नए सिरे से शुरू होगा.

शेयर बाजार ने इस बदलाव को बिना देर किए रिफ्लेक्ट कर दिया. टैक्स ऐलान के दो दिन बाद ITC (-14%), Godfrey Phillips (-21%) और VST Industries (-4%) जैसे दिग्गज शेयरों में तेज गिरावट देखने को मिली. हालांकि बाजार में ये शिफ्ट सिर्फ नुकसान नहीं लाते, बल्कि कंपनियों को अपनी रणनीति में बेहतर बदलाव लाने का मौका भी देते हैं. कई बार वही कंपनियां आगे निकल जाती हैं, जिनका बिजनेस मॉडल पहले से बदलते माहौल के लिए तैयार होता है.

एक सिगरेट पर कैसे और कितनी लगेगी ड्यूटी

वित्त मंत्रालय ने सिगरेट के लिए नया एक्साइज ढांचा लागू किया है, जो फिल्टर और नॉन-फिल्टर सिगरेट और उनकी लंबाई पर आधारित है. अब 1,000 सिगरेट पर एक्साइज ड्यूटी 2,050 रुपये से लेकर 8,500 रुपये तक होगी.

लंबी और प्रीमियम सिगरेट पर सबसे ज्यादा टैक्स लगेगा, जबकि छोटी सिगरेट पर अपेक्षाकृत कम बढ़ोतरी होगी. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के मुताबिक, यह नया एक्साइज सिस्टम पुराने जीएसटी कंपेंसेशन सेस की जगह लेगा और इससे मिलने वाले रेवेन्यू का 41 प्रतिशत राज्यों को दिया जाएगा.

अगर प्रति सिगरेट लागत देखें तो 65 मिलीमीटर तक की छोटी नॉन-फिल्टर सिगरेट पर करीब 2.05 रुपये और इसी साइज की फिल्टर सिगरेट पर लगभग 2.10 रुपये अतिरिक्त ड्यूटी लगेगी. 65 से 70 मिलीमीटर की मीडियम सिगरेट पर प्रति स्टिक 3.60 से 4 रुपये तक का बोझ आएगा. 70 से 75 मिलीमीटर की लंबी प्रीमियम सिगरेट पर यह बढ़ोतरी करीब 5.40 रुपये प्रति स्टिक हो सकती है.

उदाहरण के तौर पर, जो सिगरेट अभी 18 रुपये में मिल रही है, उस पर पहले 40 प्रतिशत जीएसटी लगेगा, जिससे कीमत करीब 19.70 रुपये हो जाएगी. इसके बाद 1 से 2 रुपये एक्साइज जुड़ने पर रिटेल कीमत 21 से 22 रुपये तक पहुंच सकती है. वहीं गोल्ड फ्लेक प्रीमियम, रेड एंड व्हाइट किंग साइज, क्लासिक, मार्लबोरो और आइस बर्स्ट जैसे प्रीमियम और किंग साइज ब्रांड्स पर प्रति स्टिक 5 से 5.50 रुपये तक की बढ़ोतरी हो सकती है. इसके उलट छोटी सिगरेट अपेक्षाकृत सस्ती रहेंगी.

अब समझिए कैसे गॉडफ्रे फिलिप्स सेक्टर में बनाएगी बढ़त

इस पूरे घटनाक्रम में गॉडफ्रे फिलिप्स के पास एक खास बढ़त नजर आती है. कंपनी ने पिछले कुछ सालों में मार्लबोरो के सस्ते वर्जन जैसे मार्लबोरो कॉम्पैक्ट और फाइन टच पहले ही लॉन्च कर दिए थे. इससे स्मोकर्स को वही ग्लोबल ब्रांड थोड़े कम दाम में मिल जाते हैं. मार्केट एक्सपर्ट का मानना है कि कीमत बढ़ने पर ग्राहक ब्रांड छोड़ने की बजाय उसी ब्रांड के छोटे या सस्ते विकल्प पर शिफ्ट कर सकता है.

वहीं ITC के लिए स्थिति थोड़ी अलग है. इक्विटी मास्टर की रिपोर्ट के मुताबिक, उसका प्रीमियम ब्रांड क्लासिक अगर 18 रुपये से बढ़कर 23 या 24 रुपये प्रति स्टिक तक पहुंचती है, तो कीमत को लेकर दबाव बढ़ेगा. आईटीसी के पास गोल्ड फ्लेक, प्लेयर्स, पावर और कैप्सटन जैसे दूसरे ब्रांड जरूर है, लेकिन क्लासिक से इनमें शिफ्ट होना ग्राहक को साफ तौर पर डाउनग्रेड जैसा लग सकता है. यही जगह है जहां गॉडफ्रे की ब्रांड निरंतरता काम आ सकती है.

मजबूत ब्रांड पोर्टफोलियो का फायदा

गॉडफ्रे फिलिप्स सिर्फ मार्लबोरो पर निर्भर नहीं है. उसके पास स्टेलर, स्टेलर शिफ्ट, फोकस, रेड एंड व्हाइट और फोर स्क्वायर जैसे मास और सेमी-मास ब्रांड भी है. इससे कंपनी अलग-अलग कीमत और पसंद वाले ग्राहकों को अपने दायरे में रख सकती है. अगर कोई ग्राहक प्रीमियम मार्लबोरो छोड़ता भी है, तो उसके पास उसी कंपनी के दूसरे विकल्प मौजूद हैं.

आईटीसी के पास भी बड़ा पोर्टफोलियो है, लेकिन ब्रांड की छवि का फर्क यहां अहम हो जाता है. क्लासिक से नीचे आना कई ग्राहकों के लिए थोड़ा मुश्किल फैसला हो सकता है.

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शहरों पर फोकस और एक्सपोर्ट की ताकत

आईटीसी की सबसे बड़ी ताकत उसका देशभर में फैला डिस्ट्रीब्यूशन है. शहर से लेकर गांव तक उसकी पहुंच है. गॉडफ्रे फिलिप्स ने इसके उलट शहरी और सेमी-अर्बन बाजारों पर ज्यादा ध्यान दिया है, जहां प्रीमियम ब्रांड की मांग ज्यादा है. 2024 से 2026 के बीच कंपनी ने दक्षिण भारत और कुछ टियर-2 शहरों में मार्लबोरो की मौजूदगी बढ़ाई है.

इसके अलावा गॉडफ्रे की करीब एक चौथाई सिगरेट बिक्री एक्सपोर्ट से आती है. वह 35 से ज्यादा देशों में अपने ब्रांड बेचती है. इससे भारतीय टैक्स बढ़ोतरी का असर उसके पूरे बिजनेस पर नहीं पड़ता, जबकि आईटीसी का सिगरेट कारोबार लगभग पूरी तरह भारत पर निर्भर है.

क्या है कंपनियों के शेयरों का हाल?

अंत में किसका पलड़ा भारी

यह साफ है कि नया टैक्स सभी सिगरेट कंपनियों के लिए मुश्किलें लाएगा. कीमतें बढ़ेंगी और खपत पर दबाव पड़ेगा. फिर भी गॉडफ्रे फिलिप्स के पास सस्ते मार्लबोरो विकल्प, मजबूत ब्रांड पोर्टफोलियो, शहरी रणनीति और एक्सपोर्ट का सहारा है, जो उसे इस झटके से बेहतर तरीके से निपटने में मदद कर सकता है. आईटीसी अब भी सबसे बड़ा खिलाड़ी है और उसकी पहुंच उसे मजबूत बनाए रखेगी. लेकिन इस टैक्स बदलाव ने खेल को थोड़ा और खुला बना दिया है, जहां आगे की बाजी ग्राहक के बदलते व्यवहार से तय होगी.

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