सीनियर सिटीजन अब ऐसे बचा सकते हैं अपना TDS, बार-बार फॉर्म भरने की नहीं होगी झंझट, जानें तरीका
सीनियर सिटीजन जिनकी टैक्स देनदारी शून्य है, वे अब फॉर्म 15 एच के जरिए अपना टीडीएस कटने से बचा सकते हैं. पहले यह फॉर्म हर बैंक या संस्था में अलग- अलग जमा करना पड़ता था, जिससे प्रक्रिया लंबी हो जाती थी. अब एक बार डिपॉजिटरी को सेल्फ डिक्लेरेशन देने पर जानकारी सभी संबंधित संस्थाओं तक पहुंच जाएगी.
Income Tax Relief: सीनियर सिटीजन के लिए TDS कटना हमेशा एक परेशानी का कारण रहा है. खासकर तब जब उनकी कुल टैक्स देनदारी शून्य हो. बैंक FD या अन्य निवेश पर ब्याज मिलने के बाद TDS कट जाता था और उसे वापस लेने के लिए रिटर्न फाइल करनी पड़ती थी. इस पूरी प्रक्रिया में समय और मेहनत दोनों लगते थे. अब इस सिस्टम को आसान बना दिया गया है. नए बदलाव से सीनियर सिटीजन को बड़ी राहत मिलने वाली है.
क्या है फॉर्म 15G/15H
फॉर्म 15G/15H सीनियर सिटीजन के लिए होता है जिनकी टैक्स देनदारी शून्य है. अगर उनकी कुल इनकम पर टैक्स नहीं बनता तो वे यह डिक्लेरेशन दे सकते हैं कि उनका TDS न काटा जाए. पहले यह फॉर्म हर बैंक या संस्था में अलग- अलग देना पड़ता था. इससे प्रक्रिया थोड़ी जटिल हो जाती थी. अब इसे सरल बना दिया गया है.
पहले कैसे कट जाता था TDS
मान लीजिए किसी सीनियर सिटीजन को बैंक FD से सालाना 1 लाख रुपये ब्याज मिलता है. बैंक तय लिमिट से ऊपर ब्याज होने पर TDS काट लेता था. भले ही उस व्यक्ति की कुल इनकम टैक्स के दायरे में न आती हो. बाद में रिफंड पाने के लिए इमकम टैक्स रिटर्न भरनी पड़ती थी. रिफंड आने में भी समय लगता था.
अब क्या बदला है नया नियम
अब सीनियर सिटीजन को हर जगह जाकर फॉर्म 15G/15H जमा करने की जरूरत नहीं होगी. अगर वे एक बार डिपॉजिटरी के माध्यम से सेल्फ डिक्लेरेशन दे देते हैं तो वही जानकारी सभी संबंधित संस्थाओं तक पहुंच जाएगी. यानी एक ही बार डिक्लेरेशन करने से अलग-अलग जगह पर TDS नहीं कटेगा. इससे पूरी प्रक्रिया काफी आसान हो जाएगी.
कैसे मिलेगा सीधा फायदा
इस बदलाव से सीनियर सिटीजन को रिफंड के लिए इंतजार नहीं करना पड़ेगा. उनकी रकम पहले से ही सुरक्षित रहेगी और कैश फ्लो बेहतर रहेगा. बार-बार फॉर्म जमा करने की झंझट भी खत्म होगी. समय और कागजी काम दोनों में कमी आएगी.
किन बातों का रखें ध्यान
सीनियर सिटीजन को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनकी कुल इनकम पर वास्तव में टैक्स देनदारी शून्य हो. गलत घोषणा करने पर भविष्य में परेशानी हो सकती है. समय पर सही जानकारी देना जरूरी है. सही तरीके से फॉर्म भरने पर ही TDS से राहत मिलेगी. यह बदलाव सीनियर सिटीजन के लिए कंप्लायंस को आसान बनाने और अनावश्यक TDS कटौती रोकने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है.
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