Income Tax Rules 2026: अप्रैल से Old टैक्स रिजीम में मिलेगा बड़ा फायदा! इन खर्च पर मिलेगी ज्यादा छूट

नए टैक्स सिस्टम के बाद अब पुराने टैक्स सिस्टम को लेकर भी तस्वीर बदलती दिख रही है. सरकार के प्रस्तावित Income Tax Rules 2026 में बच्चों की शिक्षा और हॉस्टल भत्ते की सीमा कई गुना बढ़ाने के साथ ही बेंगलुरु, पुणे जैसे शहरों को HRA के लिए मेट्रो कैटेगरी में लाने की तैयारी है. इन बदलावों से किराए पर रहने वाले और बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाने वाले सैलरीड टैक्सपेयर्स को पुराने सिस्टम में ज्यादा टैक्स बचत का मौका मिल सकता है.

पुराना टैक्स सिस्टम फायदा Image Credit: AI generated

जब सरकार ने नया टैक्स सिस्टम पेश किया था, तब ऐसा लगा था कि अब पुराना टैक्स सिस्टम धीरे-धीरे पीछे छूट जाएगा. कम टैक्स स्लैब, बिना झंझट के फाइलिंग और ज्यादा सीधी गणना ने नए सिस्टम को आकर्षक बना दिया था. लेकिन अब इनकम टैक्स नियमों में प्रस्तावित कुछ बड़े बदलावों ने इस सोच को फिर से बदल दिया है.

सरकार ने Income Tax Rules, 2026 के तहत कुछ ऐसे ड्राफ्ट नियम जारी किए हैं, जिनसे पुराने टैक्स सिस्टम में रहने वाले सैलरीड टैक्सपेयर्स को बड़ा फायदा मिल सकता है, खासकर उन लोगों को जो किराए के घर में रहते हैं और जिनके बच्चे पढ़ाई या हॉस्टल में हैं.

क्या हैं नए प्रस्तावित बदलाव

सरकार ने तीन बड़े मोर्चों पर छूट बढ़ाने का प्रस्ताव रखा है.

  • बच्चों की पढ़ाई का भत्ता
  • हॉस्टल भत्ता
  • HRA यानी हाउस रेंट अलाउंस की सीमा

ये तीनों छूट सिर्फ पुराने टैक्स सिस्टम में मिलती हैं, नए टैक्स सिस्टम में नहीं.

अब तक बच्चों की पढ़ाई के लिए मिलने वाला टैक्स फ्री भत्ता नाममात्र का था। लेकिन नए नियम इसे काफी बढ़ाने का प्रस्ताव रखते हैं.

भत्ताअभी की सीमाप्रस्तावित नई सीमा
बच्चों की शिक्षा भत्ता (प्रति बच्चा)₹100 प्रति माह₹3,000 प्रति माह
सालाना छूट₹1,200₹36,000
अधिकतम बच्चे22

शिक्षा भत्ता, हॉस्टल भत्ता में फायदा

इसका मतलब यह है कि अगर किसी टैक्सपेयर के दो बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं, तो वह सालाना ₹72,000 तक की इनकम टैक्स फ्री कर सकता है. पहले यही रकम सिर्फ ₹2,400 थी. अगर बच्चा हॉस्टल में रहकर पढ़ाई कर रहा है, तो यहां फायदा और भी बड़ा हो जाता है.

भत्ताअभी की सीमाप्रस्तावित नई सीमा
हॉस्टल भत्ता (प्रति बच्चा)₹300 प्रति माह₹9,000 प्रति माह
सालाना छूट₹3,600₹1.08 लाख
अधिकतम बच्चे22

यानि दो बच्चों के लिए हॉस्टल भत्ते में ₹2.16 लाख तक की टैक्स फ्री छूट मिल सकती है. यह मिडिल क्लास परिवारों के लिए बड़ा सहारा बन सकती है.

HRA नियमों में सबसे अहम बदलाव

अब बात उस बदलाव की, जो सबसे ज्यादा सैलरीड लोगों को प्रभावित करेगा. अब तक HRA में 50 प्रतिशत बेसिक सैलरी की छूट सिर्फ दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई जैसे मेट्रो शहरों में मिलती थी. बाकी शहरों में यह सीमा 40 प्रतिशत थी.

सरकार अब बेंगलुरु, पुणे, हैदराबाद और अहमदाबाद जैसे महंगे शहरों को भी मेट्रो की कैटेगरी में लाने का प्रस्ताव दे रही है.

शहर की कैटेगरीHRA छूट की सीमा
पुराने मेट्रोबेसिक सैलरी का 50%
पहले नॉन-मेट्रोबेसिक सैलरी का 40%
नए प्रस्तावित मेट्रोबेसिक सैलरी का 50%

इसका सीधा मतलब है कि इन शहरों में किराए पर रहने वाले लाखों कर्मचारियों को HRA में ज्यादा टैक्स छूट मिलेगी.

एक उदाहरण से समझिए पूरा गणित

मान लीजिए एक सैलरीड कर्मचारी पुणे में काम करता है.

  • सालाना सैलरी: ₹18 लाख
  • बेसिक सैलरी: 50000
  • HRA छूट: ₹20,000 (रेंट- 40 हजार लेकिन नियमों के अनुसार छूट 40 फीसदी के आधार पर मिलेगी)
  • दो बच्चे हैं : एक बच्चा स्कूल में पढ़ता है. दूसरा बच्चा दूसरे शहर में हॉस्टल में रहकर पढ़ाई करता है

मौजूदा नियम में कितनी मिलती है छूट

पुराने नियमों के तहत इस कर्मचारी को मिलने वाली छूट कुछ इस तरह होती है:

छूट का प्रकारसालाना रकम
बच्चों की शिक्षा भत्ता₹2,400
हॉस्टल भत्ता₹3,600
HRA छूट (40%)₹ 2.40 लाख
80C₹1.5 लाख
स्टैंडर्ड डिडक्शन₹50,000
कुल टैक्स डिडक्शन₹4.46 लाख

इस स्थिति में पुराने टैक्स सिस्टम में टैक्स बचत सीमित रहती है और कई बार नया टैक्स सिस्टम ज्यादा आसान और फायदेमंद लगता है.

नए प्रस्तावित नियम लागू होने के बाद तस्वीर कैसे बदलेगी

अब वही कर्मचारी अगर नए प्रस्तावित नियमों के तहत पुराने टैक्स सिस्टम में रहता है, तो छूट का गणित पूरी तरह बदल जाता है.

छूट का प्रकारसालाना रकम
बच्चों की शिक्षा भत्ता₹72,000
हॉस्टल भत्ता₹1.08 लाख
HRA छूट (50%)₹3.0 लाख
80C₹1.5 लाख
स्टैंडर्ड डिडक्शन₹50,000
कुल टैक्स डिडक्शन₹6.80 लाख

यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि पुणे को मेट्रो शहर मानने से HRA की अधिकतम सीमा बढ़ जाती है, जिससे टैक्स फ्री रकम सीधे बढ़ जाती है. और इस नए गणित के बाद वही कर्मचारी ज्यादा टैक्स छूट क्लेम कर पायेगा, पुराना टैक्स सिस्टम चुनकर नए टैक्स सिस्टम के मुकाबले बेहतर बचत कर सकता है और बच्चों की पढ़ाई और किराए के खर्च पर टैक्स का बोझ हल्का हो जाएगा.

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ये सभी फायदे सिर्फ पुराने टैक्स सिस्टम में मिलेंगे. नए टैक्स सिस्टम में न तो शिक्षा भत्ता, न हॉस्टल भत्ता और न ही HRA की यह छूट मिलती है.सरकार ने इन प्रस्तावों को 22 फरवरी तक पब्लिक कंसल्टेशन के लिए रखा है और इन्हें 1 अप्रैल से लागू करने की योजना है.

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