AI के डर से हिला सॉफ्टवेयर सेक्टर, Infosys 27% और TCS 32% नीचे, क्यों छाया है ये मंजर, क्या कहते हैं दिग्गज
भारत के IT सेक्टर में हालिया उतार-चढ़ाव ने निवेशकों और बाजार विशेषज्ञों को सोचने पर मजबूर कर दिया है. शेयरों में तेज गिरावट के बीच AI, ग्लोबल संकेत और वैल्यूएशन को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं. यह गिरावट डर का संकेत है या किसी बड़े बदलाव की शुरुआत, इसका जवाब आने वाले वक्त में धीरे-धीरे साफ होगा.
IT Stock Crash: भारत का सॉफ्टवेयर सर्विस सेक्टर लंबे समय से निवेशकों के लिए भरोसे का दूसरा नाम रहा है. लेकिन बीते कुछ दिनों में जिस तरह IT शेयरों में गिरावट आई है, उसने इस सेक्टर की स्थिर छवि को झटका दिया है. सिर्फ आठ ट्रेडिंग सेशंस में IT कंपनियों का करीब ₹5.7 लाख करोड़ का मार्केट वैल्यू साफ हो चुका है. Nifty IT इंडेक्स लगभग 19 प्रतिशत टूट चुका है, और बाजार में अब यह सवाल गूंज रहा है कि क्या यह गिरावट यहीं थमेगी या अभी और नीचे जाना बाकी है.
यह गिरावट किसी एक कंपनी तक सीमित नहीं रही. Infosys (-26%), TCS (-32%), HCL Tech (-14%), Wipro (-30) और Tech Mahindra (-8%), सब पर बिकवाली का दबाव दिखा. TCS की हालत सबसे ज्यादा चौंकाने वाली रही, जिसका शेयर अपने अगस्त 2024 के ऑल-टाइम हाई से करीब 32 प्रतिशत नीचे आ चुका है. कंपनी का मार्केट कैप ₹10 लाख करोड़ से नीचे फिसल गया है, जो करीब साढ़े चार साल पहले के स्तर जैसा है.
AI से कैसे बदल रहा है बिजनेस मॉडल
इस गिरावट की वजह सिर्फ कमजोर नतीजे या स्लो ग्रोथ नहीं है. असली चिंता Artificial Intelligence को लेकर है. Anthropic की नई टेक्नोलॉजी- Claude 4.6 और Cowork जैसे AI एजेंट्स ने बाजार में यह डर पैदा कर दिया है कि क्या AI भारतीय IT कंपनियों के ट्रेडिशनल बिजनेस मॉडल को कमजोर कर देगा.
अब तक IT सर्विस इंडस्ट्री बड़े पैमाने पर headcount-based billing पर चलती रही है, यानी जितने लोग, उतना काम और उतनी कमाई. लेकिन AI ने इस सोच को चुनौती दी है. कई काम अब कम समय और कम लोगों से हो पा रहे हैं.
AI काम की रफ्तार बढ़ा रहा है और रूटीन टास्क ऑटोमेट हो रहे हैं. इसका असर यह हो सकता है कि कुछ क्षेत्रों में कर्मचारियों की जरूरत घटे और कंपनियों की प्राइसिंग पावर पर दबाव आए. उनका मानना है कि आने वाले समय में क्लाइंट outcome-based pricing पर ज्यादा जोर देंगे, जिससे डील्स जीतना पहले से मुश्किल हो सकता है.
अमेरिका से आई और आफत
मार्केट जानकारों के मुताबिक, IT शेयरों की गिरावट को अमेरिका से आए मजबूत रोजगार आंकड़ों ने और हवा दी. US में बेरोजगारी दर में आई हल्की गिरावट ने यह संकेत दिया कि फेडरल रिजर्व जल्द ब्याज दरें नहीं घटाएगा. इसका असर ग्लोबल टेक शेयरों पर पड़ा और वही दबाव भारतीय IT कंपनियों तक भी पहुंच गया. अमेरिका और यूरोप में क्लाइंट्स फिलहाल IT खर्च को लेकर सतर्क नजर आ रहे हैं, खासकर पुराने और डिस्क्रेशनरी प्रोजेक्ट्स पर.
JP Morgan जैसे बड़े ब्रोकरेज का मानना है कि यह मान लेना गलत है कि AI अकेले एंटरप्राइज-ग्रेड सॉफ्टवेयर बना सकता है. IT कंपनियां अब भी सिस्टम को जोड़ने, समझने और चलाने में अहम भूमिका निभाती हैं. मौजूदा स्तरों पर कई बड़ी IT कंपनियों में फ्री कैश फ्लो और डिविडेंड यील्ड आकर्षक हो चुकी है.
IT कंपनीयों का क्या है मौजूदा हाल

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