1 साल में फर्जी निवेश के नाम पर कर्नाटक में 6156 लोगों के साथ ठगी, जानें कैसे होती है ठगी
कर्नाटक में साइबर अपराध के मामलों को लेकर चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं. जहां “डिजिटल अरेस्ट” की घटनाएं चर्चा में हैं, वहीं 2025 में सबसे ज्यादा मामले निवेश धोखाधड़ी के दर्ज हुए. फर्जी ऐप, सोशल मीडिया और पार्ट-टाइम जॉब के नाम पर लोगों को ठगा जा रहा है, जिससे हजारों लोग आर्थिक नुकसान झेल रहे हैं.
Cyber Fraud: कर्नाटक में साइबर अपराध के मामलों को लेकर हाल के दिनों में “डिजिटल अरेस्ट” की खूब चर्चा हो रही है. प्रधानमंत्री से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक इस मुद्दे पर बात कर चुके हैं. लेकिन आंकड़े बताते हैं कि साल 2025 में राज्य में सबसे ज्यादा मामले निवेश धोखाधड़ी (इन्वेस्टमेंट फ्रॉड) के दर्ज हुए हैं. डिजिटल अरेस्ट के 346 मामलों के मुकाबले निवेश धोखाधड़ी के 6156 मामले सामने आए, जो चिंता का बड़ा कारण है.
निवेश के नाम पर सबसे ज्यादा ठगी
विधानसभा सत्र में पेश आंकड़ों के मुताबिक 6156 निवेश धोखाधड़ी के मामलों में से 3487 मामलों में लोगों को फर्जी ऐप के जरिए शेयर बाजार में निवेश का झांसा दिया गया. वहीं 2669 मामलों में लोगों को सोशल मीडिया और मैसेजिंग ऐप के जरिए पार्ट-टाइम जॉब, ऑनलाइन टास्क और प्रोडक्ट रिव्यू के नाम पर फंसाया गया. ठग पहले छोटे-छोटे काम करवाकर थोड़ा पैसा देते हैं, ताकि लोगों का भरोसा जीत सकें. इसके बाद ज्यादा मुनाफे का लालच देकर निवेश करने को कहते हैं. एक बार पैसा लगाने के बाद न तो रकम वापस मिलती है और न ही कोई संपर्क रहता है.
फर्जी ऐप और मैसेजिंग ग्रुप का जाल
एक और तरीका यह है कि लोगों को मैसेजिंग ऐप पर बने ग्रुप में जोड़ा जाता है, जहां मुफ्त में शेयर टिप्स दिए जाते हैं. बाद में एक खास ऐप के जरिए निवेश करने को कहा जाता है. ऐप पर भारी मुनाफा दिखता है, जिससे लोग और पैसा लगाते हैं. मुश्किल तब शुरू होती है जब पैसा निकालने की कोशिश की जाती है. ऐप पैसे निकालने नहीं देता और अलग-अलग शुल्क के नाम पर और रकम मांगी जाती है. आखिर में लोगों को पता चलता है कि वे ठगी का शिकार हो चुके हैं.
तुम डाल-डाल, मैं पात-पात
साइबर ठगी के तरीके लगातार बदलते रहते हैं. जब किसी एक तरह की ठगी पर सख्ती बढ़ती है, तो ठग दूसरा तरीका अपना लेते हैं. कुछ साल पहले लोन ऐप के जरिए लोगों को परेशान करने के मामले खूब सामने आए थे. जांच एजेंसियों की कार्रवाई के बाद कई फर्जी ऐप हटाए गए, लेकिन 2025 में भी ऐसे 210 मामले दर्ज हुए हैं. यानी साइबर ठग तुम डाल-डाल, मैं पात-पात के नियम अपना रहे हैं.
ऐसे ही होती है ठगी
इसके अलावा ऑनलाइन मनी ट्रांसफर, ओटीपी फ्रॉड और क्रेडिट कार्ड धोखाधड़ी के मामले भी बड़ी संख्या में दर्ज हो रहे हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि आसान और जल्दी पैसे कमाने का लालच ही ठगों का सबसे बड़ा हथियार है. लोगों को अनजान लिंक, ऐप और ऑफर से सतर्क रहने की जरूरत है, क्योंकि ज्यादा मुनाफे का वादा अक्सर धोखे की शुरुआत साबित होता है.
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