पश्चिम एशिया युद्ध से किस शेयर बाजार को सबसे बड़ा नुकसान? दुबई, अबू धाबी या भारत; जानें कहां डूबा ज्यादा पैसा

अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच युद्ध का असर ग्लोबल बाजारों पर साफ दिख रहा है. UAE से 10.8 लाख करोड़ रुपये और भारत से 41 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति साफ हो चुकी है, जिससे निवेशकों में भारी चिंता है. मालूम हो कि अभी भी पश्चिम एशिया का माहौल तनावपूर्ण बना हुआ है.

अबू धाबी-दुबई-भारत: कहां हुआ सबसे ज्यादा नुकसान? Image Credit: @Money9live

Abu Dhabi, Dubai or India Share Market Loss: पश्चिम एशिया में 28 फरवरी 2026 से शुरू हुए अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच सैन्य टकराव ने वैश्विक वित्तीय बाजारों को हिला कर रख दिया है. इस संघर्ष का असर केवल कूटनीतिक और सैन्य मोर्चे तक सीमित नहीं रहा, बल्कि शेयर बाजारों में भी तेज गिरावट के रूप में सामने आया है. खासतौर पर संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और भारत जैसे बड़े और उभरते बाजारों में निवेशकों की संपत्ति में भारी गिरावट दर्ज की गई है. अगर इस नुकसान को रुपये में समझें (1 डॉलर 90 रुपये के आधार पर), तो यह गिरावट और भी बड़ी और गंभीर नजर आती है.

UAE में 10.8 लाख करोड़ रुपये की गिरावट

सबसे पहले बात UAE की करें तो दुबई और अबू धाबी के शेयर बाजार इस संकट से बुरी तरह प्रभावित हुए हैं. युद्ध शुरू होने के बाद से दुबई फाइनेंशियल मार्केट (DFM) में लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप लगभग 45 अरब डॉलर घट गया है, जो भारतीय मुद्रा में करीब 4.05 लाख करोड़ रुपये के बराबर है. वहीं, अबू धाबी के ADX एक्सचेंज में इससे भी बड़ी गिरावट दर्ज की गई है, जहां करीब 75 अरब डॉलर यानी लगभग 6.75 लाख करोड़ रुपये की वैल्यू मिट गई. इस तरह दोनों बाजारों को मिलाकर UAE से करीब 120 अरब डॉलर, यानी लगभग 10.8 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति खत्म हो चुकी है. इंडेक्स के स्तर पर भी दबाव साफ दिखा, दुबई का प्रमुख सूचकांक करीब 16 फीसदी टूटा, जबकि अबू धाबी में लगभग 9 फीसदी की गिरावट आई.

निवेशकों को बड़ा झटका

यह गिरावट ऐसे समय में आई है जब UAE खुद को वैश्विक वित्तीय केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में तेजी से काम कर रहा था. हालांकि इसे स्थायी नुकसान नहीं बल्कि निवेशकों के भरोसे पर पड़ा अस्थायी झटका मान रहे हैं. युद्ध के चलते हवाई यात्रा और पर्यटन पर भी असर पड़ा है, जो UAE की अर्थव्यवस्था का अहम हिस्सा है. हजारों उड़ानों के रद्द होने से दुबई जैसे अंतरराष्ट्रीय ट्रांजिट हब की गतिविधियों पर सीधा असर पड़ा है, जिससे बाजार भावना कमजोर हुई.

भारत का सबसे बड़ा झटका

अब अगर भारत की बात करें तो यहां नुकसान का पैमाना और भी बड़ा है. युद्ध शुरू होने के बाद से भारतीय शेयर बाजारों में जबरदस्त बिकवाली देखने को मिली है. 27 फरवरी को जहां BSE में लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप 463.5 लाख करोड़ रुपये था, वह 2 अप्रैल तक घटकर 422.4 लाख करोड़ रुपये रह गया. यानी महज कुछ हफ्तों में निवेशकों की करीब 41 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति साफ हो गई. सेंसेक्स और निफ्टी 50 दोनों में लगभग 10 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई, जबकि व्यापक बाजार को दर्शाने वाला निफ्टी 500 इंडेक्स भी करीब 10 फीसदी नीचे आया. कई मिड और स्मॉलकैप शेयरों में तो 30-40 फीसदी तक की गिरावट देखने को मिली.

कई दूसरे फैक्टर्स ने भी तोड़ी कमर

भारतीय बाजार पर दबाव के पीछे कई बड़े कारण रहे. सबसे अहम रहा कच्चे तेल की कीमतों में उछाल, क्योंकि ईरान द्वारा होर्मुज स्ट्रेट पर नियंत्रण से सप्लाई बाधित होने की आशंका बढ़ गई. इसके अलावा, रुपये में कमजोरी और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली ने बाजार की गिरावट को और तेज कर दिया. फरवरी में थोड़ी बहुत खरीदारी के बाद विदेशी निवेशकों ने फिर से बिकवाली शुरू कर दी, जिससे बाजार में घबराहट का माहौल बना.

दूसरे देशों की स्थिति बेहतर!

दूसरे खाड़ी देशों की स्थिति अपेक्षाकृत कम खराब रही. कतर के शेयर बाजार में करीब 4 फीसदी और बहरीन में लगभग 7 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई. वहीं, सऊदी अरब और ओमान जैसे बाजारों ने इस अवधि में अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया और कुछ हद तक मजबूती दिखाई. वैश्विक स्तर पर भी असर साफ दिखा, अमेरिका का S&P 500 इंडेक्स करीब 7 फीसदी गिरा, जो निवेशकों की बढ़ती चिंता और अनिश्चितता को दर्शाता है.

किस देश पर पड़ी सबसे बड़ी मार?

अगर कुल नुकसान की तुलना करें, तो स्पष्ट रूप से भारत सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है. जहां UAE के बाजारों से करीब ₹10.8 लाख करोड़ की वैल्यू घटी, वहीं भारत में यह आंकड़ा ₹41 लाख करोड़ तक पहुंच गया. बाजार के आकार और निवेशकों की भागीदारी को देखते हुए भारत में गिरावट का असर कई गुना ज्यादा दिखाई दिया. हालांकि, यह गिरावट लंबी अवधि की कमजोरी का संकेत नहीं है. इसे एक अस्थायी झटका माना जा रहा है, जो जियो पॉलिटिकल टेंशन के कारण आया है. जैसे ही हालात सामान्य होंगे, बाजारों में रिकवरी की संभावना भी उतनी ही मजबूत मानी जा रही है.

ये भी पढ़ें- चीन पर सख्ती से बदला CCTV मार्केट का खेल! इस कंपनी के लिए खुला बड़ा मौका, क्या बनेगी सबसे बड़ी विजेता?