क्या हैं REIT और InvIT? जिन्होंने उड़ाए सबके होश, Nifty TRI को पछाड़कर निकले आगे
India में REITs और InvITs तेजी से फेमस हो रहे हैं. ICRA Analytics के आंकड़ों के मुताबिक, साल 2025 में इन दोनों कैटेगरी ने मिलकर करीब 19.5 प्रतिशत का रिटर्न दिया, जो कई बड़े शेयर सूचकांकों और सरकारी बॉन्ड इंडेक्स से बेहतर रहा.
REITs and InvITs: शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव के दौर में निवेशक ऐसे विकल्प ढूंढ रहे हैं, जहां नियमित कमाई भी हो और पूंजी सेफ रहने की उम्मीद भी बनी रहे. इसी वजह से India में REITs और InvITs तेजी से फेमस हो रहे हैं. ICRA Analytics के आंकड़ों के मुताबिक, साल 2025 में इन दोनों कैटेगरी ने मिलकर करीब 19.5 प्रतिशत का रिटर्न दिया, जो कई बड़े शेयर सूचकांकों और सरकारी बॉन्ड इंडेक्स से बेहतर रहा.
खास बात यह है कि बाजार में अस्थिरता के बावजूद इन निवेश साधनों ने निवेशकों को स्थिर इनकम का भरोसा दिया. रियल एस्टेट से जुड़ी किराये की कमाई और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स से आने वाले तयशुदा पेमेंट ने इन्हें इक्विटी और डेट निवेश के बीच एक मजबूत ऑप्शन बना दिया है.
REITs और InvITs क्या हैं और क्यों चर्चा में हैं
- REITs: REIT यानी रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट ऐसे निवेश साधन होते हैं, जिनके जरिए निवेशक दफ्तरों, मॉल, वेयरहाउस जैसी प्रॉपर्टी से जुड़ी कमाई में हिस्सा लेते हैं, बिना खुद कोई मकान या जमीन खरीदे. ये शेयर बाजार में लिस्टेड होते हैं और आम शेयरों की तरह खरीदे-बेचे जा सकते हैं. इनकी आमदनी मुख्य रूप से किराये और प्रॉपर्टी बेचने से मिलने वाले मुनाफे से आती है.
- InvITs: InvIT यानी इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट सड़कों, बिजली ट्रांसमिशन लाइन, रिन्यूएबल एनर्जी जैसे प्रोजेक्ट्स में निवेश करते हैं. इनमें लंबे समय के कॉन्ट्रैक्ट होते हैं, जिससे कैश फ्लो आमतौर पर स्थिर रहता है. ICRA Analytics के मुताबिक साल 2025 में REITs का रिटर्न बढ़कर करीब 29.7 प्रतिशत हो गया, जबकि पावर InvITs ने भी मजबूत बढ़त दिखाई.
| एसेट क्लास | 2024 का रिटर्न (%) | 2025 का रिटर्न (%) |
|---|---|---|
| निफ्टी 50 TRI | 10.04% | 11.42% |
| सरकारी बॉन्ड इंडेक्स (G-Sec) | 10.06% | 6.81% |
| REIT | 16.81% | 29.68% |
| InvIT – पावर | 9.43% | 20.22% |
| InvIT – रोड | 9.49% | 6.55% |
टैक्स और निवेशकों के लिए मायने
REITs और InvITs पर टैक्स इनकम टैक्स कानून की खास धारा के तहत लगाया जाता है, जिसमें ट्रस्ट स्तर पर दोबारा टैक्स नहीं लगता और आय सीधे यूनिट होल्डर के हाथ में टैक्स होती है. ब्याज, किराया और डिविडेंड आपकी टैक्स स्लैब के हिसाब से करयोग्य होते हैं, जबकि यूनिट बेचने पर कैपिटल गेन टैक्स लगता है.
डिस्क्लेमर: Money9live किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है. यहां पर केवल स्टॉक्स की जानकारी दी गई है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.
ये भी पढ़ें- 31 मार्च 2026 से पहले पूरे कर लें टैक्स से जुड़े ये जरुरी काम, नहीं तो बढ़ सकता है Income Tax बोझ
Latest Stories
शेयर बाजार की बदली तस्वीर! टॉप कंपनियों की वैल्यू में 4.55 लाख करोड़ रुपये का उछाल, RIL को बड़ा मुनाफा
सोमवार को इन दो स्टॉक पर रहेगी नजर, स्टॉक स्प्लिट से लकेर बोनस शेयर देने जा रही कंपनी, जानें रिकॉर्ड डेट
भारत-अमेरिका डील से लौटने लगे FPIs! तीन महीने में निकाले ₹62,338 करोड़, अब ₹8100 करोड़ के साथ की एंट्री
52-वीक हाई से 65% तक टूटे विजय केडिया के ये 10 स्टॉक, पोर्टफोलियो में 19 फीसदी की गिरावट, जानें कहां निवेश करते हैं दिग्गज
