भारत-अमेरिका डील से लौटने लगे FPIs! तीन महीने में निकाले ₹62,338 करोड़, अब ₹8100 करोड़ के साथ की एंट्री

लंबे समय बाद शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों की वापसी देखने को मिली है. हालिया वैश्विक संकेतों, नीतिगत घटनाक्रम और कुछ आर्थिक फैक्टर्स ने निवेशकों का ध्यान दोबारा भारत की ओर खींचा है. हालांकि बीते महीनों की स्थितियों को देखते हुए बाजार में अब भी सतर्कता बनी हुई है.

FPIs Image Credit: FreePik

FPIs Inflow in Feb 2026: लगातार तीन महीनों तक भारतीय शेयर बाजार से बड़ी बिकवाली करने के बाद विदेशी निवेशकों का रुख अब बदलता दिख रहा है. फरवरी के पहले हफ्ते में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने एक बार फिर भारतीय शेयरों में भरोसा जताया है और 8,100 करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश किया है. बेहतर होते ग्लोबल संकेत, जोखिम लेने की बढ़ती इच्छा और भारत-अमेरिका ट्रेड डील से जुड़ी सकारात्मक खबरों ने इस बदलाव में अहम भूमिका निभाई है.

तीन महीने की भारी बिकवाली के बाद राहत

डिपॉजिटरी के आंकड़ों के मुताबिक, जनवरी में FPIs ने भारतीय शेयर बाजार से 35,962 करोड़ रुपये निकाले थे. इससे पहले दिसंबर में 22,611 करोड़ रुपये और नवंबर में 3,765 करोड़ रुपये की निकासी हुई थी. कुल मिलाकर साल 2025 में अब तक FPIs करीब 1.66 लाख करोड़ रुपये भारतीय इक्विटी से निकाल चुके हैं, जो हाल के वर्षों के सबसे कमजोर दौर में से एक माना जा रहा है.

फरवरी में बदला निवेशकों का मूड

फरवरी की शुरुआत में तस्वीर कुछ बदली नजर आई. 6 फरवरी तक FPIs ने इस महीने 8,129 करोड़ रुपये का निवेश किया है. मॉर्निंगस्टार इनवेस्टमेंट रिसर्च इंडिया के प्रिंसिपल मैनेजर हिमांशु श्रीवास्तव के मुताबिक, यह खरीदारी निवेशकों के बढ़ते जोखिम लेने के भरोसे और भारत की ग्रोथ स्टोरी पर दोबारा भरोसे को दिखाती है. उनका कहना है कि ग्लोबल अनिश्चितताओं में कुछ कमी, घरेलू ब्याज दरों को लेकर स्थिरता और भारत-अमेरिका ट्रेड से जुड़े सकारात्मक संकेतों ने सेंटिमेंट को सपोर्ट किया है.

भारत-अमेरिका ट्रेड डील और बजट का असर

एंजेल वन के सीनियर एनालिस्ट वकारजावेद खान का मानना है कि भारत-अमेरिका ट्रेड बातचीत में प्रगति से भू-राजनीतिक तनाव कुछ कम हुआ है, जिससे बाजार में तेजी देखने को मिली. इसके साथ ही अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में स्थिरता और बजट 2026 में घोषित फिस्कल सपोर्ट व सेक्टर-स्पेसिफिक इंसेंटिव्स ने भी निवेशकों को भरोसा दिया है.

यह भी पढ़ें: रूस से तेल बिजनेस पर बड़ा अपडेट! भारत धीरे-धीरे घटाएगा खरीद, जानें रिफाइनरियों को क्या कहा जा रहा..

जियोजित इनवेस्टमेंट्स के चीफ इनवेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वीके विजयकुमार के अनुसार, रुपये की मजबूती भी एक अहम फैक्टर रही है. रुपया हाल ही में डॉलर के मुकाबले 90.30 के रिकॉर्ड निचले स्तर से मजबूत हुआ था, हालांकि बाद में यह 90.70 के आसपास बंद हुआ. उनका अनुमान है कि मार्च 2026 के अंत तक रुपया 90 से नीचे जा सकता है, जिससे आगे और FPI निवेश आ सकता है.