शेयर बाजार में 11 मार्च को क्यों आई बड़ी गिरावट, सिर्फ पश्चिम एशिया संकट ही नहीं बल्कि ये भी हैं बड़ी वजहें
शेयर बाजार में बुधवार को गिरावट देखने को मिली. सेंसेक्स 900 और निफ्टी 250 अंक से अधिक टूटकर कारोबार कर रहे थे. एफआईआई की लगातार बिकवाली और मुनाफावसूली से बाजार पर दबाव रहा. ऑटो, आईटी और फाइनेंशियल शेयरों में गिरावट रही, जबकि मिडकैप सपाट और स्मॉलकैप में हल्की बढ़त दिखी. आइये जानते हैं कि मार्केट में गिरावट क्यों आई?
11 मार्च को घरेलू शेयर बाजार की शुरुआत बढ़त के साथ हुई थी, लेकिन कुछ ही घंटों में बाजार में तेज गिरावट देखने को मिली. कारोबार के दौरान बीएसई सेंसेक्स और एनएसई निफ्टी 50 दोनों ही अपने ओपनिंग लेवल से काफी नीचे आ गए. बीएसई सेंसेक्स आज 78,238.91 के स्तर पर खुला था, लेकिन गिरावट के दबाव में यह फिसलकर दिन के निचले स्तर 77,295.70 तक पहुंच गया. इस तरह सेंसेक्स अपने ओपनिंग लेवल से करीब 910 अंक टूट गया. वहीं एनएसई निफ्टी 50 24,231.85 पर खुला था लेकिन कारोबार के दौरान यह गिरकर 23,986 के लो लेवल तक पहुंच गया. यानी निफ्टी अपने ओपनिंग स्तर से 250 अंक से अधिक लुढ़क गया. आइये जानते हैं कि बाजार में क्यों गिरावट आई?
गिरावट के प्रमुख कारण
विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी
10 मार्च को विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) ने भारतीय बाजार में बड़ी बिकवाली की. उन्होंने करीब 4,673 करोड़ रुपये के शेयर बेचे. वहीं घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने 6,333 करोड़ रुपये से अधिक की खरीदारी की. एफआईआई और डीआईआई के बीच पिछले एक साल जैसा पैटर्न फिर देखने को मिल रहा है जहां एफआईआई लगातार बिकवाली कर रहे हैं और डीआईआई उतनी ही मजबूती से खरीदारी कर रहे हैं. विदेशी निवेशकों की भारत के प्रति फिलहाल उदासीन रवैया देखने को मिल रहा है जिसने बाजार पर नेगेटिव असर डाला है.
मुनाफावसूली का असर
पिछले कारोबारी सत्र यानी 10 मार्च को बेंचमार्क इंडेक्स हल्की बढ़त के साथ बंद हुए थे और बाजार में खरीदारी देखने को मिली थी. निफ्टी 50 करीब 24,261 पर और सेंसेक्स करीब 78,206 के स्तर पर बंद हुआ था. उस समय निवेशकों ने खरीदी की थी. सेक्टर के लिहाज से ऑटो, फाइनेंशियल और कंज्यूमर से जुड़े शेयरों ने बाजार की रिकवरी में अहम भूमिका निभाई थी जबकि आईटी और ऑयल-एंड-गैस सेक्टर के कुछ शेयरों में दबाव देखा गया था. 11 मार्च को ऑटो, फाइनेंशियल, आईटी और एफएमसीजी सेक्टर में गिरावट देखने को मिली. इन सेक्टरों के इंडेक्स करीब 0.6% से 1.3% तक नीचे कारोबार कर रहे थे. मुनाफावसूली के चलते बैंकिंग और ऑटो शेयरों पर दबाव देखने को मिला. बुधवार को 16 प्रमुख सेक्टरों में से 8 सेक्टर गिरावट में रहे. इस दौरान एचडीएफसी बैंक और आईसीआईसीआई बैंक जैसे बड़े शेयर करीब 1.4% तक गिर गए.
पश्चिम एशिया संकट का असर
पश्चिम एशिया में जारी तनाव ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है. अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर अब तक के सबसे भारी हमलों में से कुछ हमले किए हैं. हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को कहा कि यह संघर्ष “जल्द खत्म हो सकता है.
ऑयल-गैस सप्लाई पर संकट
पश्चिम एशिया में जारी तनाव और हॉर्मुज स्ट्रेट में बाधा के चलते क्रूड ऑयल और नेचुरल गैस की सप्लाई पर असर पड़ा है. भारत में सप्लाई चेन प्रभवित होने की आशंका के चलते भी ऑयल, पेंट, एविएशन और इससे जुड़े अन्य शेयरों पर दबाव देखने को मिल रहा है.
रुपये में कमजोरी
बुधवार को भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले 14 पैसे गिरकर 91.94 रुपये प्रति डॉलर पर पहुंच गया. विदेशी मुद्रा बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच रुपये में कमजोरी देखने को मिली. रुपये के कमजोर होने से भारत के लिए कच्चे तेल का आयात महंगा हो जाता है. इसका सीधा असर पेट्रोल और डीजल जैसी ईंधन कीमतों पर पड़ता है, जिससे महंगाई बढ़ने का खतरा रहता है. इसका असर शेयर बाजार पर भी पड़ता है.
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