इन 5 कंपनियों में प्रमोटर होल्डिंग Zero, फिर भी हिट; ITC, HDFC, BSE जैसे दिग्गज शामिल, रिटर्न दमदार
शेयर बाजार में प्रमोटर होल्डिंग को भरोसे का पैमाना माना जाता है, लेकिन भारत में कई दिग्गज कंपनियां ऐसी भी हैं जहां प्रमोटर की हिस्सेदारी शून्य है. इसके बावजूद ये कंपनियां मजबूत फंडामेंटल, प्रोफेशनल मैनेजमेंट और शानदार ट्रैक रिकॉर्ड के दम पर निवेशकों की पहली पसंद बनी हुई हैं. देखें कुछ कंपनियों की लिस्ट.
Zero Percent Promoter Stake Companies: भारतीय शेयर बाजार में जब भी किसी स्टॉक का विश्लेषण किया जाता है, तो निवेशक कई पैमानों को ध्यान में रखते हैं- जैसे कंपनी की कमाई, ग्रोथ, मैनेजमेंट, PE रेशियो और प्रमोटर होल्डिंग. आमतौर पर माना जाता है कि किसी कंपनी में प्रमोटर्स की बड़ी हिस्सेदारी उनके बिजनेस पर भरोसे का संकेत होती है. लेकिन भारतीय बाजार में कुछ ऐसी दिग्गज कंपनियां भी हैं, जिनमें प्रमोटर होल्डिंग शून्य है, फिर भी वे निवेशकों के बीच बेहद भरोसेमंद और मजबूत मानी जाती हैं. आज हम जीरो प्रमोटर होल्डिंग वाली कुछ कंपनियों के बारे में ही बताने वाले हैं. उनमें से कुछ तो मार्केट कैप के मामले में देश की टॉप 10 कंपनियों में शुमार है.
भारत की बड़ी कंपनियां, जहां प्रमोटर होल्डिंग शून्य
भारतीय बाजार में कई बड़ी और भरोसेमंद कंपनियां हैं, जिनका कोई प्रमोटर नहीं है, लेकिन उनका बिजनेस मॉडल और फाइनेंशियल परफॉर्मेंस बेहद मजबूत है. इस सूची में सबसे पहला नाम HDFC बैंक का आता है.
HDFC Bank
HDFC Bank इसका सबसे बड़ा उदाहरण है. HDFC Ltd के साथ मर्जर के बाद यह पूरी तरह प्रोफेशनली मैनेज्ड बैंक बन गया. आज यह देश का सबसे बड़ा प्राइवेट सेक्टर बैंक है, जिसकी मार्केट कैप 15 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा है. मजबूत बैलेंस शीट और स्थिर ग्रोथ इसे निवेशकों की पहली पसंद बनाती है. जून, 2023 के बाद इस कंपनी में प्रमोटर की हिस्सेदारी 25.52 फीसदी से शून्य हो गई. शेयरहोल्डिंग पैटर्न की बात करें तो कंपनी में FIIs की हिस्सेदारी 48.38 फीसदी, DIIs की हिस्सेदारी 36.07 फीसदी, सरकार की 0.18 फीसदी और पब्लिक की 15.33 फीसदी है.

स्टॉक और रिटर्न?
कंपनी के शेयर 1.57 फीसदी की गिरावट के साथ 962.20 रुपये पर ट्रेड करते हुए बंद हुए. हालांकि, सालभर में स्टॉक ने 10.68 फीसदी का रिटर्न दिया है. वहीं, 3 साल में इसमें 20.22 फीसदी की तेजी दिखी है. कंपनी का मार्केट कैप 15,04,150 करोड़ रुपये दर्ज किया गया.
ICICI Bank
ICICI Bank भी ऐसा ही एक बैंक है, जो दशकों से बिना किसी प्रमोटर के सफलतापूर्वक काम कर रहा है. इसकी व्यापक मौजूदगी, डिजिटल फोकस और मजबूत मुनाफा इसे लॉन्ग टर्म निवेश के लिए आकर्षक बनाता है. देश के बड़े प्राइवेट सेक्टर बैंकों की सूची में इसका नाम भी काफी ऊपर है. कंपनी में प्रमोटर्स की हिस्सेदारी बिल्कुल नहीं है. वहीं, FIIs और DIIs की हिस्सेदारी कंपनी में क्रमश: 45.56 फीसदी और 45.06 फीसदी है. इससे इतर, सरकार का स्टेक कंपनी में 0.27 फीसदी है वहीं, पब्लिक स्टेक 9.11 फीसदी है.

स्टॉक और रिटर्न का हाल?
मंगलवार, 6 जनवरी को कंपनी का स्टॉक 2.89 फीसदी की तेजी के साथ 1,411.20 रुपये पर बंद हुआ. सालभर में स्टॉक ने 11.19 फीसदी का रिटर्न दिया है. वहीं, 3 साल के दौरान इसमें 60.41 फीसदी की बढ़ोतरी दिखी है. कंपनी का मार्केट कैप 9,80,701 करोड़ रुपये दर्ज किया गया.
ITC
ITC एक विविध कारोबार वाली कंपनी है, जिसका FMCG, सिगरेट, पेपरबोर्ड और होटल जैसे सेक्टर्स में मजबूत दबदबा है. ITC लंबे समय से प्रोफेशनली रन कंपनी का उदाहरण रही है. इसका हाई ROCE और स्थिर कैश फ्लो इसे डिफेंसिव और भरोसेमंद स्टॉक बनाता है. लेकिन इसकी भी वहीं कहानी- कंपनी के शेयरहोल्डिंग से प्रमोटर की गैरमौजूदगी. वहीं, FIIs और DIIs का स्टेक कंपनी में क्रमश: 37.39 फीसदी और 47.41 फीसदी है. वहीं, बचे हुए स्टेक में सरकार की हिस्सेदारी 0.04 फीसदी और पब्लिक की 15.16 फीसदी है.

स्टॉक और रिटर्न हिस्ट्री?
आईटीसी के शेयर 2.07 फीसदी की गिरावट के साथ मंगलवार, 6 जनवरी को 342.45 रुपये पर ट्रेड करते हुए बंद हुए. सालभर के दौरान कंपनी के शेयरों का भाव 24.64 फीसदी तक घटा है. वही, 3 साल के दौरान इसमें केवल 2.58 फीसदी की तेजी दिखी है. कंपनी का मार्केट कैप 4,38,138 करोड़ रुपये दर्ज किया गया.
L&T
Larsen & Toubro (L&T) इंजीनियरिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर की दिग्गज कंपनी है. बड़े-बड़े प्रोजेक्ट्स, मजबूत ऑर्डर बुक और प्रोफेशनल मैनेजमेंट के दम पर L&T बिना किसी प्रमोटर के भी इंडस्ट्री लीडर बनी हुई है. इस कंपनी से भी प्रमोटर गायब हैं. कंपनी में FIIs, DIIs, सरकार और पब्लिक की हिस्सेदारी क्रमश: 19.48 फीसदी, 43.34 फीसदी, 0.24 फीसदी और 36.92 फीसदी है.

स्टॉक और रिटर्न?
मंगलवार, 6 जनवरी को स्टॉक का भाव 2.57 फीसदी की तेजी के साथ 4,302.40 रुपये पर ट्रेड करते हुए बंद हुआ. सालभर में स्टॉक का भाव 10 फीसदी तक टूटा है. हालांकि, 3 साल के दौरान इसमें 17.78 फीसदी तक की तेजी दिखाई है. कंपनी का मार्केट कैप 46,740 करोड़ रुपये दर्ज किया गया.
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BSE
इसके अलावा BSE (बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज) भी एक ऐसा संस्थान है, जहां स्वामित्व पूरी तरह से व्यापक शेयरहोल्डिंग में बंटा हुआ है और यह प्रोफेशनल तरीके से संचालित होता है. कंपनी में सबसे ज्यादा हिस्सेदारी 63.76 फीसदी के साथ पब्लिक की है. इससे इतर, FIIs और DIIs के पास क्रमश: 16.25 फीसदी और 19.91 फीसदी का स्टेक है. सरकार के पास कंपनी की हिस्सेदारी महज 0.09 फीसदी है.

शेयर और रिटर्न हिस्ट्री?
BSE के शेयर 1.21 फीसदी की तेजी के साथ मंगलवार, 6 जनवरी को 2,706.30 रुपये पर बंद हुआ. सालभर के दौरान इसमें 51 फीसदी से ज्यादा की तेजी दर्ज की. वहीं, 3 साल में स्टॉक का भाव 1,379 फीसदी तक बढ़ा है. कंपनी का मार्केट कैप 1,08,908 करोड़ रुपये दर्ज किया गया.
प्रमोटर नहीं, प्रोफेशनल मैनेजमेंट का भरोसा
जिन कंपनियों में प्रमोटर होल्डिंग 0 फीसदी होती है, वे पूरी तरह प्रोफेशनल मैनेजमेंट द्वारा चलाई जाती हैं. इनका स्वामित्व किसी एक व्यक्ति या परिवार के हाथ में नहीं होता, बल्कि शेयरहोल्डिंग रिटेल निवेशकों, म्यूचुअल फंड्स, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) और घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) में बंटी होती है. इस तरह की संरचना में फैसले बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स और प्रोफेशनल मैनेजमेंट टीम द्वारा लिए जाते हैं, जिससे कॉरपोरेट गवर्नेंस और ट्रांसपेरेंसी मजबूत होती है.
क्या 0% प्रमोटर होल्डिंग कमजोरी है?
अक्सर निवेशकों के मन में यह सवाल आता है कि क्या प्रमोटर होल्डिंग न होना किसी कंपनी के लिए नेगेटिव संकेत है. हकीकत इससे अलग है. 0 फीसदी प्रमोटर होल्डिंग आमतौर पर यह दिखाती है कि कंपनी एक परिपक्व स्टेज पर पहुंच चुकी है, जहां उसका संचालन प्रोफेशनल्स के हाथ में है और फैसले किसी एक व्यक्ति के बजाय शेयरहोल्डर्स के व्यापक हित में लिए जाते हैं. ऐसी कंपनियों में आमतौर पर कॉरपोरेट गवर्नेंस बेहतर होती है, फैसलों में पारदर्शिता रहती है, मैनेजमेंट पर संस्थागत निवेशकों की कड़ी निगरानी होती है.
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डिस्क्लेमर: Money9live किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है. यहां पर केवल स्टॉक्स की जानकारी दी गई है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.
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