बिना सपोर्ट सिस्टम से इंडस्ट्री में पहचान तक, ऐसे बनाई इंटीरियर डिजाइन की दुनिया में दीपा देवराजन ने अपनी अलग पहचान

Purple Dreams की फाउंडर दीपा का कहना है कि वह दिन की शुरुआत आसमान के पार शायद और कोई आसमान होगा के विचार से करती है. वह बताती हैं कि एक बार उनकी मां ने उनसे कहा था कि बेटा, हम साउथ के लोग हैं, बिजनेस तुमसे नहीं हो पाएगा. पहले तुम्हें पढ़ाई करनी होगी, फिर एक बढ़िया सी जॉब करनी होगी, जिससे पैसा इकट्ठा होने के बाद अपनी शादी करनी होगी.

दीपा देवराजन

दीपा देवराजन की कहानी किसी बड़े घराने या पैसे वाले बैकग्राउंड से शुरू नहीं होती. वह एक साउथ इंडियन महिला हैं, जिन्होंने हिंदी बोलने वाली और पुरुषों के दबदबे वाली इंडस्ट्री में अपनी अलग पहचान बनाई है. उनका परिवार एक साधारण सर्विस क्लास परिवार है, जहां इंटीरियर डिजाइन का कोर्स करना भी आसान नहीं था. लेकिन प्लानिंग, मेहनत और हिम्मत ने उन्हें इंटीरियर डिजाइन की दुनिया में अलग पहचान दिलाई.

सीमित साधन, लेकिन स्पष्ट सपने

दीपा का सफर किसी भी सटीक सपोर्ट सिस्टम के बिना शुरू हुआ. जहां इंटीरियर डिजाइन जैसे करियर में प्रवेश करना भी एक चुनौती था. इतना ही नहीं, सिर्फ कोर्स में दाखिला लेना भी उनके लिए संघर्ष था. उन्होंने छोटे-छोटे ऑड जॉब किए, हर रुपये को सावधानी से बचाया और अपनी एजुकेशन और फ्यूचर के लिए निवेश किया.

कल्चरल स्टीरियोटाइप्स और पारिवारिक हकीकतें

Purple Dreams की फाउंडर दीपा कहती हैं कि वह दिन की शुरुआत इस विचार के साथ करती हैं — “आसमान के पार शायद और कोई आसमान होगा.” वह बताती हैं कि एक बार उनकी मां ने उनसे कहा था — “बेटा, हम साउथ के लोग हैं, बिजनेस तुमसे नहीं हो पाएगा. पहले तुम्हें पढ़ाई करनी होगी, फिर एक बढ़िया सी जॉब करनी होगी, जिससे पैसा इकट्ठा होने के बाद अपनी शादी करनी होगी.”

फाइनेंशियल प्लानिंग प्लस विजन से रखीं एंटरप्रेन्योरशिप की नींव

दीपा बताती हैं कि वह लॉन्ग टर्म प्लानिंग और अनुशासन में विश्वास करती हैं. फाइनेंशियल फ्रीडम ने उनके निर्णयों को मजबूत किया और धीरे-धीरे उन्होंने अपना खुद का रास्ता बनाया. उन्होंने रेजिडेंशियल और कमर्शियल प्रोजेक्ट्स के लिए इंटीरियर डिजाइन सॉल्यूशन्स देने वाली अपनी फर्म Purple Dreams की स्थापना की. आज उनकी पहचान का आधार है — कड़ी मेहनत, स्ट्रेटेजिक इन्वेस्टमेंट, कंटीन्यूअस प्रोफेशनल अपस्किलिंग और क्लाइंट की जरूरतों के अनुरूप बजट-फ्रेंडली सोल्यूशन्स. वह आर्किटेक्चर और इंटीरियर सजावट के बीच एक गहरा संबंध मानती हैं, जिसके परिणामस्वरूप ऐसे इंटीरियर एनवायरनमेंट बनते हैं जो सोफिस्टिकेटेड कलर पैटर्न, रिफाइंड मटीरियल और डिटेलिंग से पहचाने जाते हैं.

निवेशक के लिए ये बातें जानना जरूरी

म्यूचुअल फंड में निवेश से पहले एक बार KYC (Know Your Customer) प्रोसेस पूरा करना जरूरी होता है. केवाईसी प्रोसेस को केवल पंजीकृत म्यूचुअल फंड कंपनियों के साथ करना चाहिए, जिनकी जानकारी SEBI की वेबसाइट से ली जा सकती है. साथ ही किसी भी शिकायत के लिए निवेशक एएमसी से सीधे संपर्क कर सकते हैं, या फिर SCORES पोर्टल (https://scores.gov.in) पर भी आपत्ति दर्ज करा सकते हैं. अगर समाधान संतोषजनक नहीं है तो Smart ODR पोर्टल (https://smartodr.in/login) का भी इस्तेमाल किया जा सकता है.

एचडीएफसी एएमसी के बारे में

एचडीएफसी एसेट मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड भारत की सबसे बड़ी म्यूचुअल फंड कंपनियों में से एक है. इसकी स्थापना 1999 में हुई थी और साल 2000 में SEBI से इसे मंजूरी मिली थी. जिसके बाद यह इक्विटी, फिक्स्ड इनकम और अन्य निवेश विकल्पों का प्रबंधन करती है और देश भर में शाखाओं, बैंक, स्वतंत्र वित्तीय सलाहकार और नेशनल डिस्ट्रीब्यूटर्स के जरिए अपनी सेवाएं देती है.