AI Impact Summit: अब धरती नहीं, अंतरिक्ष में बनेगा भारत का डेटा सेंटर, 2.5 मिलीसेकंड में होगा डेटा ट्रांसफर; 3D प्रिंटेड रॉकेट से होगा लॉन्च

दिल्ली में चल रहे AI Impact Summit 2026 में भारत की एक प्राइवेट कंपनी ने बताया कि अब अंतरिक्ष में देश का पहला AI डेटा सेंटर बनाने की तैयारी कर रही है. यह डेटा सेंटर जमीन पर नहीं बल्कि अंतरिक्ष में काम करेगा. कंपनी का दावा है कि इससे डेटा तेजी से प्रोसेस होगा और लागत भी कम होगी.

अंतरिक्ष में बनेगा भारत का डेटा सेंटर Image Credit: Money9 live

Data Centre in space: भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और स्पेस टेक्नोलॉजी का नया दौर शुरू होने वाला है. दिल्ली में चल रहे AI Impact Summit 2026 में एक ऐसी तकनीक सामने आई है जो भविष्य को पूरी तरह बदल सकती है. भारत की एक प्राइवेट कंपनी अब अंतरिक्ष में देश का पहला AI डेटा सेंटर बनाने की तैयारी कर रही है. यह डेटा सेंटर जमीन पर नहीं बल्कि अंतरिक्ष में काम करेगा.

कंपनी का दावा है कि इससे डेटा तेजी से प्रोसेस होगा और लागत भी कम होगी. साथ ही यह प्राकृतिक आपदाओं से भी सुरक्षित रहेगा. इस प्रोजेक्ट में भारतीय स्टार्टअप NeevCloud और स्पेस कंपनी Agnikul Cosmos मिलकर काम कर रही हैं. अगर यह योजना सफल होती है तो भारत दुनिया के चुनिंदा देशों में शामिल हो जाएगा जो स्पेस में डेटा सेंटर बना रहे हैं.

स्पेस में डेटा सेंटर की तैयारी

AI Impact Summit में NeevCloud ने अपने स्पेस डेटा सेंटर का लाइव मॉडल पेश किया. कंपनी का कहना है कि इस प्रोजेक्ट को साल 2026 के अंत तक लॉन्च किया जा सकता है. यह भारत का पहला प्राइवेट ऑर्बिटल AI डेटा सेंटर होगा जो लो अर्थ ऑर्बिट में काम करेगा.

जमीन से ज्यादा तेज काम

मनी 9 लाइव से खास बातचीत करते हुए कंपनी के CEO नरेंद्र सेन के अनुसार जमीन पर डेटा सेंटर बनाने में करीब 24 महीने लगते हैं और लागत भी ज्यादा होती है. लेकिन अंतरिक्ष में डेटा सेंटर लगाने से यह प्रक्रिया तेज और सस्ती हो सकती है. डेटा की स्पीड भी काफी बढ़ जाएगी. उदाहरण के तौर पर दिल्ली से मुंबई डेटा भेजने में जमीन पर 15 से 20 मिलीसेकंड लगते हैं, जबकि स्पेस से यह काम सिर्फ 2.5 मिलीसेकंड में हो सकता है.

कम लागत और ज्यादा सुरक्षा

इस स्पेस डेटा सेंटर का एक बड़ा फायदा यह भी है कि यह प्राकृतिक आपदाओं जैसे बाढ़ या भूकंप से प्रभावित नहीं होगा. इससे डेटा ज्यादा सुरक्षित रहेगा. साथ ही जमीन पर बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत भी कम होगी जिससे लागत घटेगी. इस मिशन में अलग से सैटेलाइट भेजने की जरूरत नहीं होगी. रॉकेट के ऊपरी हिस्से को ही डेटा सेंटर के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा. इससे खर्च कम होगा और स्पेस में कचरा भी नहीं बढ़ेगा.

कब होगा लॉन्च

कंपनी का प्लान है कि साल 2026 के अंत तक इसका पहला पायलट प्रोजेक्ट लॉन्च किया जाए. इसके लिए 3D प्रिंटेड रॉकेट का इस्तेमाल किया जाएगा. अगर यह सफल रहा तो भारत स्पेस और AI दोनों क्षेत्रों में बड़ी छलांग लगा सकता है.

ये भी पढ़ें- Gold-Silver Price Today 16-02-2026: चांदी में आई गिरावट लेकिन सोना हुआ महंगा, जानें कहां पहुंची कीमतें