अश्लील कंटेंट पर सख्ती, सरकार ने 5 OTT प्लेटफॉर्म को किया ब्लॉक, IT नियम ना मानना पड़ा भारी, जानें डिटेल

केंद्र सरकार ने अश्लील और नियमों के खिलाफ कंटेंट दिखाने के आरोप में 5 OTT प्लेटफॉर्म को ब्लॉक कर दिया है. यह कार्रवाई सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने IT नियम 2021 के तहत की है. सरकार का कहना है कि संबंधित ऐप कानूनी मानकों का पालन नहीं कर रहे थे. इससे पहले भी कई OTT प्लेटफॉर्म पर इसी तरह की कार्रवाई हो चुकी है.

5 OTT प्लेटफॉर्म को सरकार ने ब्लॉक किया है.

OTT Ban: केंद्र सरकार ने 5 ऑनलाइन स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म पर बड़ी कार्रवाई करते हुए पांच OTT ऐप को ब्लॉक कर दिया है. सरकार का कहना है कि इन प्लेटफॉर्म पर अश्लील और नियमों के खिलाफ कंटेंट दिखाया जा रहा था. यह कदम सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने IT नियम 2021 के तहत उठाया है. हाल के समय में OTT प्लेटफॉर्म की संख्या और पहुंच तेजी से बढ़ी है. ऐसे में सरकार कंटेंट को लेकर सख्ती बरत रही है.

किन OTT प्लेटफॉर्म पर लगा बैन

सरकार ने जिन पांच OTT ऐप को ब्लॉक किया है उनमें MoodXVIP, Koyal Playpro, Digi Movieplex, Feel और Jugnu हैं. अधिकारियों के अनुसार इन प्लेटफॉर्म पर ऐसा कंटेंट स्ट्रीम किया जा रहा था जो कानूनी स्टैंडर्ड के खिलाफ था. जांच के बाद पाया गया कि ये सर्विस IT नियमों का पालन नहीं कर रही थीं. इसके बाद इन्हें भारत में ब्लॉक करने का फैसला लिया गया.

किस कानून के तहत हुई कार्रवाई

यह कार्रवाई IT नियम 2021 के तहत की गई है. नियम 3 AB के अनुसार कोई भी प्लेटफॉर्म अश्लील, आपत्तिजनक, प्राइवेसी का उल्लंघन करने वाला या हिंसा और नफरत को बढ़ावा देने वाला कंटेंट होस्ट नहीं कर सकता. सरकार का कहना है कि जो प्लेटफॉर्म इन नियमों का पालन नहीं करेंगे उन्हें कानूनी सुरक्षा नहीं मिलेगी. ऐसे मामलों में आगे कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है.

पहले भी हो चुकी है बड़ी कार्रवाई

जुलाई 2025 में भी सरकार ने 25 OTT प्लेटफॉर्म से जुड़ी वेबसाइट और ऐप को ब्लॉक करने का आदेश दिया था. उन पर भी अश्लील और आपत्तिजनक कंटेंट दिखाने का आरोप था. सरकार का कहना है कि यह अभियान लगातार चल रहा है और नियम तोड़ने वालों पर नजर रखी जा रही है. इससे साफ है कि आने वाले समय में और सख्ती देखी जा सकती है.

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कई मंत्रालयों ने मिलकर लिया फैसला

अधिकारियों के अनुसार इस कार्रवाई से पहले कई मंत्रालयों से सलाह ली गई. इनमें गृह मंत्रालय, महिला और बाल विकास मंत्रालय, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय और विधि मंत्रालय शामिल हैं. उद्योग संगठनों और महिला और बाल अधिकार से जुड़े एक्सपर्ट से भी राय ली गई. समीक्षा के बाद ही यह फैसला लिया गया.