तेल नहीं चीन है वेनेजुएला पर अमेरिकी हमले की वजह, जानें रॉबर्ट कियोसाकी ने क्यों इराक से की तुलना
अमेरिका ने 3 जनवरी 2026 को वेनेजुएला पर बड़ा सैन्य हमला किया और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो व उनकी पत्नी को गिरफ्तार कर न्यूयॉर्क ले गया. ट्रंप ने कहा कि अब अमेरिका वेनेजुएला को चलाएगा और उसके विशाल तेल भंडार को ऑपरेट करेगा. दुनिया भर में इसकी निंदा हो रही है. रॉबर्ट कियोसाकी ने इसे तेल से ज्यादा आर्थिक ताकत और चीन के नियंत्रण तोड़ने की जंग बताया.
US Attacks Venezuela: अमेरिका ने 3 जनवरी 2026 को वेनेजुएला पर बड़ा सैन्य हमला किया. इस हमले में राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को पकड़ लिया गया और उन्हें अमेरिका ले जाकर न्यूयॉर्क में रखा गया. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अब अमेरिका कुछ समय के लिए वेनेजुएला को चलाएगा और उसके तेल भंडारों से फायदा उठाएगा. अमेरिकी तेल कंपनियां अरबों डॉलर लगाकर तेल उद्योग को ठीक करेंगी. मशहूर लेखक रॉबर्ट कियोसाकी ने कहा कि ये सिर्फ तेल की लड़ाई नहीं, बल्कि आर्थिक और मुद्रा की बड़ी जंग है, जिसमें चीन भी शामिल है.
वेनेजुएला में क्या हुआ?
शनिवार सुबह काराकास में जोरदार धमाके हुए. अमेरिकी लड़ाकू विमानों और हेलीकॉप्टरों ने सैन्य ठिकानों, एयर डिफेंस और रडार पर मिसाइलें दागीं. अमेरिकी स्पेशल फोर्सेस (डेल्टा फोर्स) ने मादुरो दंपति को उनके घर से पकड़ा. हमले में कोई अमेरिकी सैनिक नहीं मारा गया, लेकिन वेनेजुएला में करीब 40 लोग मारे गए, ज्यादातर सैनिक और कुछ आम लोग. मादुरो को पहले यूएसएस इवो जिमा जहाज पर ले जाया गया, फिर न्यूयॉर्क पहुंचाया गया. वहां उन पर ड्रग तस्करी और आतंकवाद (नार्को-टेररिज्म) के पुराने आरोपों में मुकदमा चलेगा. वेनेजुएला सरकार ने इसे आक्रमण बताया और देश में इमरजेंसी लगा दी.
तेल पर कब्जा और देश चलाना
ट्रंप ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि अमेरिका अब वेनेजुएला को चलाएगा जब तक सही बदलाव नहीं हो जाता. उन्होंने कहा, “हमारी बड़ी अमेरिकी तेल कंपनियां अरबों डॉलर लगाएंगी, खराब हो चुके तेल सिस्टम को ठीक करेंगी.” वेनेजुएला के पास दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडार हैं. करीब 300 अरब बैरल.
तेल बहाना, असली लड़ाई आर्थिक ताकत और चीन से
‘रिच डैड पुअर डैड’ किताब के लेखक रॉबर्ट कियोसाकी ने सोशल मीडिया पर लिखा कि इराक, ईरान और वेनेजुएला की लड़ाई सिर्फ तेल के लिए नहीं है. असली मुद्दा चीन है. उन्होंने इराक का उदाहरण दिया कि 2000 में सद्दाम हुसैन ने तेल को डॉलर के बजाय यूरो में बेचने की कोशिश की, जो अमेरिकी डॉलर सिस्टम के लिए खतरा था. अब चीन बिना हमला किए लॉन्ग टर्म एग्रीमेंट, कर्ज के बदले तेल और डॉलर के बदले दूसरी करेंसी में ट्रांजेक्शन से तेल बाजार कंट्रोल कर रहा है. कियोसाकी ने कहा कि ईरान और वेनेजुएला का ज्यादातर तेल डिस्काउंट पर और गुप्त रास्तों से चीन जाता है. अमेरिका प्रतिबंध लगाकर, जहाज पकड़कर और अब हमला करके चीन की इन जंजीरों को तोड़ रहा है.
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