पाकिस्तान जैसी गलती कर बैठा वेनेजुएला, चीन ने दिया धोखा, अमेरिका ने ऑपरेशन सिंदूर जैसे कर दिए हालात
वेनेजुएला को दक्षिण अमेरिका की सबसे मजबूत एयर डिफेंस रखने वाला देश माना जाता था. इस घटना ने न सिर्फ चीन के हथियारों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए हैं, बल्कि उन देशों को भी सोचने पर मजबूर कर दिया है जो भविष्य में ऐसी तकनीक खरीदने की योजना बना रहे हैं.
Pakistan and Venezuela: चीन की सैन्य तकनीक को लेकर बड़े-बड़े दावे किए जाते रहे हैं. खास तौर पर रडार सिस्टम को लेकर यह कहा जाता है कि वे स्टेल्थ विमानों को भी पकड़ सकते हैं. लेकिन हालिया घटनाओं ने इन दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. पाकिस्तान के बाद अब वेनेजुएला का उदाहरण सामने आया है, जहां अमेरिकी हमले के दौरान चीन से खरीदे गए रडार पूरी तरह फेल हो गए. नतीजा यह हुआ कि अमेरिका के हेलिकॉप्टर और विमान बिना किसी रुकावट के राजधानी कराकास तक पहुंच गए.
यह इसलिए भी अहम है क्योंकि वेनेजुएला को दक्षिण अमेरिका की सबसे मजबूत एयर डिफेंस रखने वाला देश माना जाता था. इस घटना ने न सिर्फ चीन के हथियारों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए हैं, बल्कि उन देशों को भी सोचने पर मजबूर कर दिया है जो भविष्य में ऐसी तकनीक खरीदने की योजना बना रहे हैं.
अमेरिकी हमले में वेनेजुएला की बड़ी चूक
अमेरिका के एक सैन्य ऑपरेशन के दौरान वेनेजुएला की वायु सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह नाकाम साबित हुई. रिपोर्ट के अनुसार अमेरिकी विशेष बलों के हेलिकॉप्टर और विमान बिना किसी विरोध के कराकास में दाखिल हो गए. वेनेजुएला के रडार किसी भी विमान या हेलिकॉप्टर को पहचान नहीं सके. इसकी सबसे बड़ी वजह चीन से खरीदे गए रडार सिस्टम का फेल होना बताया जा रहा है.
कौन से चीनी रडार हुए फेल
वेनेजुएला ने चीन से कई आधुनिक रडार खरीदे थे. इनमें JYL-1 लंबी दूरी का 3D सर्विलांस रडार शामिल है, जिसकी रेंज 300 से 470 किलोमीटर बताई जाती है. इसके अलावा JY-27 और JY-27A मीटर वेव रडार भी थे, जिन्हें स्टेल्थ विमान पकड़ने वाला रडार कहा जाता है. इनकी रेंज 300 से 500 किलोमीटर बताई गई थी. इन रडारों को वेनेजुएला की एयर डिफेंस की रीढ़ माना जाता था.
हमले के दौरान अमेरिका ने इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर तकनीक का इस्तेमाल किया. अमेरिकी जामिंग सिस्टम ने वेनेजुएला के रडार सिग्नल को पूरी तरह ब्लॉक कर दिया. नतीजा यह हुआ कि रडार स्क्रीन पर कुछ भी नजर नहीं आया. जिन रडारों को स्टेल्थ हंटर कहा जाता था, वे एक भी लक्ष्य नहीं पकड़ सके. शुरुआती हमले में ही पूरी एयर डिफेंस नेटवर्क बेअसर हो गया.
पाकिस्तान जैसा ही रहा अनुभव
यह पहली बार नहीं है जब चीनी रडार सिस्टम पर सवाल उठे हों. इससे पहले पाकिस्तान में भी ऐसा ही देखने को मिला था. 2025 के एक सैन्य ऑपरेशन के दौरान पाकिस्तान की वायु रक्षा प्रणाली भारतीय हमलों को रोकने में नाकाम रही थी. पाकिस्तान के पास भी चीन से खरीदे गए HQ-9 और LY-80 जैसे सिस्टम थे. कई जगहों पर रडार साइट्स तबाह कर दी गई थीं और पूरा सिस्टम अंधा हो गया था.
क्यों फेल हो रहे हैं चीनी रडार
विशेषज्ञों का कहना है कि इसकी कई वजहें हैं. पहली वजह अमेरिका और भारत जैसे देशों की Advanced electronic jamming technology है . दूसरी वजह ऑपरेटरों की ट्रेनिंग और सिस्टम की सही देखरेख की कमी है. तीसरी वजह यह भी मानी जा रही है कि चीनी मीडिया में किए गए दावे हकीकत में उतने मजबूत साबित नहीं होते.
भविष्य के खरीदारों के लिए चेतावनी
वेनेजुएला की घटना के बाद चीन की सैन्य तकनीक पर भरोसा करने वाले देशों के लिए यह एक चेतावनी मानी जा रही है. जिस एयर डिफेंस सिस्टम को सबसे मजबूत बताया जा रहा था, वह कुछ ही घंटों में बेकार हो गया. ऐसे में भविष्य में चीनी हथियार खरीदने से पहले कई देश दो बार सोच सकते हैं.
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