पाकिस्तान और अफगानिस्तान का कितना लंबा है बॉर्डर, किसके पास ज्यादा टैंक, फाइटर प्लेन और सैनिक, देखें किसमें कितना दम

जब दोनों देशों के बीच हालात युद्ध जैसे बन गए हैं, तो यह समझना जरूरी हो जाता है कि दोनों की सैन्य ताकत कितनी है, किसके पास कितने हथियार हैं, वायुसेना कितनी मजबूत है और आखिर डूरंड लाइन का इतिहास क्या है, जो इस टकराव की जड़ में है.

पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच युद्ध

Pakistan-Afghanistan War: अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच जंग का बिगुल बज चुका है. डूरंड लाइन पर दोनों देशों के बीच युद्ध जारी है. इस ताजा संघर्ष की शुरुआत गुरुवार देर रात हुई, जब अफगानिस्तान ने पाकिस्तान पर हमला किया. बताया जा रहा है कि यह कार्रवाई 22 फरवरी को अफगानिस्तान में हुई पाकिस्तानी एयर स्ट्राइक के जवाब में की गई. अफगानिस्तान का दावा है कि उसने पाकिस्तानी सेना के एक हेडक्वॉर्टर और 19 चौकियों पर कब्जा कर लिया है. इसके बाद पाकिस्तान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए तालिबान शासित अफगानिस्तान के कई ठिकानों पर हवाई हमले और बमबारी की. पाकिस्तान ने अफगान तालिबान सरकार के खिलाफ “ऑपरेशन गजब-उल-हक” शुरू किया है.

ऐसे में जब दोनों देशों के बीच हालात युद्ध जैसे बन गए हैं, तो यह समझना जरूरी हो जाता है कि दोनों की सैन्य ताकत कितनी है, किसके पास कितने हथियार हैं, वायुसेना कितनी मजबूत है और आखिर डूरंड लाइन का इतिहास क्या है, जो इस टकराव की जड़ में है.

रैंक में कौन सा देश किस नंबर पर

Global Firepower यानी जीएफपी मिलिट्री इंडेक्स 2026 के मुताबिक पाकिस्तान दुनिया के 145 देशों में 14वें नंबर पर है. यानी दुनिया की ताकतवर सेनाओं में पाकिस्तान काफी ऊपर गिना जाता है. वहीं अफगानिस्तान इस सूची में 121वें स्थान पर है. यानी सैन्य ताकत के मामले में दोनों देशों के बीच बड़ा अंतर है. पाकिस्तान के पास करीब 6 लाख 60 हजार एक्टिव सैनिक हैं. इनमें लगभग 5 लाख 60 हजार सेना में, 70 हजार वायुसेना में और 30 हजार नौसेना में हैं. अफगानिस्तान की तालिबान सेना के पास करीब 1 लाख 72 हजार एक्टिव लड़ाके बताए जाते हैं. हालांकि तालिबान ने सेना को बढ़ाकर 2 लाख तक करने की योजना की बात कही है.

दोनों देश एयरक्राफ्ट के मामले में किस पायदान पर खड़े हैं

फाइटर एयरक्राफ्ट के मामले में अफगानिस्तान के पास फिलहाल एक भी लड़ाकू विमान नहीं है. वहीं पाकिस्तान के पास 331 फाइटर जेट हैं. एरियल टैंकर की बात करें तो अफगानिस्तान के पास एक भी नहीं है, जबकि पाकिस्तान के पास 4 हैं. हेलिकॉप्टर के मामले में अफगानिस्तान के पास केवल 3 हेलिकॉप्टर हैं.

वहीं पाकिस्तान के पास 379 हेलिकॉप्टर हैं. अटैक हेलिकॉप्टर की बात करें तो अफगानिस्तान के पास एक भी नहीं है, जबकि पाकिस्तान के पास 55 अटैक हेलिकॉप्टर हैं. इससे साफ है कि हवाई ताकत के मामले में पाकिस्तान काफी मजबूत स्थिति में है.

टैंक के मामले में कहां खड़े हैं दोनों देश

ग्लोबल फायर पावर के मुताबिक पाकिस्तान के पास 2,677 टैंक हैं. वहीं अफगानिस्तान के पास एक भी टैंक नहीं है. बख्तरबंद वाहनों की बात करें तो पाकिस्तान के पास 59,044 बख्तरबंद गाड़ियां हैं, जबकि अफगानिस्तान के पास 3,902. बख्तरबंद वाहन वे सैन्य गाड़ियां होती हैं जो गोलियों और धमाकों से बचाव के लिए मजबूत कवच से ढकी होती हैं. इन्हें आम भाषा में कवचित गाड़ियां भी कहा जाता है.

टेबल से समझें

पैरामीटर पाकिस्तानअफगानिस्तान
ग्लोबल रैंक (145 देशों में)14वां121वां
एक्टिव सैनिक6,60,0001,72,000 (लगभग)
सेना (Army)5,60,000
वायुसेना (Air Force)70,000
नौसेना (Navy)30,000नहीं है
रक्षा बजट9.1 अरब डॉलर+14.5 करोड़ डॉलर
फाइटर जेट3310
एरियल टैंकर40
कुल हेलिकॉप्टर3793
अटैक हेलिकॉप्टर550
टैंक2,6770
बख्तरबंद वाहन59,0443,902
नौसेना जहाज120नहीं है
पनडुब्बी8नहीं है
फ्रिगेट9नहीं है

नेवी के मामले में किसकी सेना ज्यादा ताकतवर है

Afghanistan एक लैंडलॉक्ड देश है, यानी इसका समुद्र से सीधा संपर्क नहीं है. इसलिए इसकी कोई नौसेना नहीं है. वहीं Pakistan के पास कुल 120 जहाजों का बेड़ा है. पाकिस्तान के पास 8 पनडुब्बियां और 9 फ्रिगेट भी हैं. इस लिहाज से नौसेना के मामले में पाकिस्तान का पलड़ा भारी है.

कितना खर्च करते हैं दोनों देश डिफेंस पर खर्च ?

ग्लोबल फायर पावर की रिपोर्ट के अनुसार अफगानिस्तान अपने रक्षा बजट पर लगभग 14 करोड़ 50 लाख डॉलर खर्च करता है. वहीं पाकिस्तान का रक्षा बजट करीब 9 अरब 10 करोड़ डॉलर से ज्यादा है. यानी रक्षा खर्च के मामले में भी पाकिस्तान कई गुना आगे है. ज्यादा बजट का मतलब है ज्यादा हथियार, बेहतर ट्रेनिंग और आधुनिक तकनीक.

दोनों देशों के बीच सीमा रेखा डूरंड लाइन और विवाद का इतिहास

दरअसल साल 1893 में ब्रिटिश भारत के विदेश सचिव Mortimer Durand और अफगान अमीर Abdur Rahman Khan के बीच एक समझौता हुआ. इस समझौते के तहत ब्रिटिश भारत और अफगानिस्तान के बीच 2,640 किलोमीटर लंबी सीमा तय की गई.

उस समय पाकिस्तान अस्तित्व में नहीं था. 1947 में जब ब्रिटिश भारत का विभाजन हुआ और पाकिस्तान बना, तो उसने इस सीमा को अपनी अंतरराष्ट्रीय सीमा मान लिया. अफगानिस्तान का तर्क है कि 1893 का समझौता ब्रिटिश हुकूमत के दबाव में हुआ था और यह स्थायी अंतरराष्ट्रीय सीमा नहीं थी.

इसके अलावा, डूरंड लाइन ने पश्तून और बलोच समुदायों को दो हिस्सों में बांट दिया. बड़ी संख्या में पश्तून आबादी पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा इलाके में रहती है, जबकि उनकी सांस्कृतिक जड़ें अफगानिस्तान से जुड़ी हैं. अफगानिस्तान की सरकारें (चाहे राजशाही, लोकतांत्रिक या तालिबान शासन) अक्सर इस सीमा को आधिकारिक रूप से मान्यता देने से बचती रही हैं.

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