ट्रंप का एक और नया टैरिफ वार, स्टील-एल्यूमिनियम-कॉपर पर 50% टैक्स; भारत समेत दुनिया पर पड़ेगा असर
अमेरिका ने एक बार फिर मेटल्स पर बड़ा फैसला लिया है. अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने स्टील, एल्यूमिनियम और कॉपर के आयात पर 50 फीसदी टैरिफ लगा दिया है, लेकिन इसके लागू करने के तरीके में कई बदलाव किए गए हैं. सरकार का कहना है कि इससे नियम आसान होंगे.

Trump Tariffs: दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में जब भी टैरिफ में बदलाव होता है, तो उसका असर सिर्फ उस देश तक सीमित नहीं रहता. बल्कि इसका प्रभाव ग्लोबल ट्रेड, इंडस्ट्री और कीमतों पर भी देखने को मिलता है. इसी कड़ी में अमेरिका ने एक बार फिर मेटल्स पर बड़ा फैसला लिया है. अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने स्टील, एल्यूमिनियम और कॉपर के आयात पर 50 फीसदी टैरिफ लगा दिया है, लेकिन इसके लागू करने के तरीके में कई बदलाव किए गए हैं. सरकार का कहना है कि इससे नियम आसान होंगे, गलत तरीके से कम कीमत दिखाने पर रोक लगेगी और इंडस्ट्री को भी कुछ राहत मिलेगी.
क्या है नया फैसला
अमेरिका ने स्टील, एल्यूमिनियम और कॉपर के आयात पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगा दिया है. लेकिन अब यह टैक्स उस कीमत पर लगेगा जो अमेरिकी ग्राहक वास्तव में चुकाते हैं. इससे पहले कुछ आयातक कम कीमत दिखाकर टैक्स कम देने की कोशिश कर रहे थे. अगर किसी प्रोडक्ट में इन मेटल्स की मात्रा 15 प्रतिशत से कम है, तो उस पर अब 50 प्रतिशत टैरिफ नहीं लगेगा. जैसे किसी परफ्यूम की बोतल का ढक्कन या छोटे स्टील वाले प्रोडक्ट.
इंडस्ट्री के लिए खास राहत
कुछ भारी मशीनरी और बिजली से जुड़े उपकरणों पर टैरिफ को 50 प्रतिशत से घटाकर 15 प्रतिशत कर दिया गया है. यह राहत 2027 तक लागू रहेगी, ताकि इंडस्ट्री को बढ़ावा मिल सके. अगर किसी प्रोडक्ट में 15 प्रतिशत से ज्यादा स्टील, एल्यूमिनियम या कॉपर है, तो उस पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगेगा. यह टैक्स पूरे प्रोडक्ट की कीमत पर लागू होगा.
अमेरिकी धातु से बने प्रोडक्ट
अगर कोई प्रोडक्ट विदेश में बना है लेकिन उसमें इस्तेमाल धातु अमेरिका की है, तो उस पर सिर्फ 10 प्रतिशत टैरिफ लगेगा. सरकार का कहना है कि नए नियम पहले के मुकाबले आसान और साफ हैं. इससे कंपनियों को समझने में आसानी होगी और टैक्स चोरी भी कम होगी. साथ ही सरकार को रेवेन्यू भी बढ़ने की उम्मीद है.
भारत समेत दुनिया पर पड़ेगा असर
अमेरिका द्वारा स्टील, एल्यूमिनियम और कॉपर पर 50 प्रतिशत टैरिफ बनाए रखने का असर भारत समेत पूरी दुनिया पर पड़ सकता है. इससे इन ध से बने प्रोडक्ट महंगे हो सकते हैं, जिससे ग्लोबल सप्लाई चेन और कीमतों पर दबाव बढ़ेगा. भारत जैसे देशों के एक्सपोर्ट पर भी असर पड़ सकता है, क्योंकि अमेरिका में सामान भेजना महंगा हो जाएगा. साथ ही, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है.
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