ट्रंप का बड़ा ऐलान: क्रेडिट कार्ड पर 10% से ज्यादा ब्याज नहीं, दिग्गज निवेशक ने कहा- “यह गलती है”
एक बड़े आर्थिक फैसले ने अमेरिका में उपभोक्ता वित्त को लेकर नई बहस छेड़ दी है. आम लोगों को राहत देने के इरादे से किए गए इस ऐलान पर बैंकिंग सेक्टर और निवेशकों की प्रतिक्रियाएं बंटी हुई नजर आ रही हैं. आने वाले समय में इसके असर पर सबकी नजर रहेगी.
US credit card interest cap: अमेरिका में क्रेडिट कार्ड यूजर्स के लिए बड़ी राहत की बात सामने आई है. President Donald Trump ने क्रेडिट कार्ड ब्याज दरों को लेकर एक बड़ा ऐलान किया है, जिसने अमेरिका के वित्तीय और राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज कर दी है. ट्रंप ने 20 जनवरी 2026 से एक साल के लिए क्रेडिट कार्ड ब्याज दरों पर 10 फीसदी की अधिकतम सीमा लगाने की बात कही है. उनका कहना है कि इससे आम अमेरिकी नागरिकों को राहत मिलेगी, जो लंबे समय से ऊंची ब्याज दरों से परेशान हैं.
20 जनवरी से लागू होंगे नियम
डोनाल्ड ट्रंप ने 10 जनवरी (भारतीय समय के अनुसार) को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर यह घोषणा की. उन्होंने कहा कि 20 जनवरी 2026 से क्रेडिट कार्ड इंटरेस्ट रेट पर 10 फीसदी की कैप लगाई जाएगी. यह तारीख उनके दूसरे कार्यकाल के एक साल पूरे होने के साथ भी जुड़ती है. ट्रंप ने कहा कि कंपनियां जो 20 से 30 फीसदी या उससे भी ज्यादा ब्याज वसूल रही हैं, अब अमेरिकी जनता को “लूटा” नहीं सकतीं.

ट्रंप के मुताबिक, यह कदम अमेरिका में “अफोर्डेबिलिटी” यानी खर्च उठाने की क्षमता को बेहतर बनाने के लिए उठाया गया है. उन्होंने सीधे तौर पर अपने पूर्वी राष्ट्रपति जो बाइडेन पर निशाना साधते हुए कहा कि उनके कार्यकाल में ऊंची ब्याज दरों को बिना रोक-टोक चलने दिया गया. ट्रंप ने कहा कि उनकी सरकार आम लोगों के हितों को सबसे ऊपर रखती है और यह फैसला उसी दिशा में एक बड़ा कदम है.
चुनावी वादा पूरा करने की कोशिश
यह प्रस्ताव ट्रंप के 2024 के राष्ट्रपति चुनाव से पहले किए गए अहम चुनावी वादों में से एक था. अपने पहले कार्यकाल में इसे लागू न कर पाने को लेकर उन्हें आलोचना भी झेलनी पड़ी थी. अब दूसरे कार्यकाल के दौरान उन्होंने इसे सार्वजनिक रूप से लागू करने का फैसला लेकर अपने समर्थकों को एक मजबूत संदेश देने की कोशिश की है.
डेमोक्रेटिक सीनेटर Bernie Sanders और रिपब्लिकन सीनेटर Josh Hawley ने मिलकर 10 फीसदी की ब्याज सीमा का प्रस्ताव रखा था, लेकिन वह कानून का रूप नहीं ले सका. इसके अलावा, 2025 में ट्रंप प्रशासन ने बाइडेन काल के उस नियम को भी रद्द कर दिया था, जिसमें क्रेडिट कार्ड लेट फीस को 8 डॉलर तक सीमित करने की बात कही गई थी.
निवेशक क्यों जहा रहे चिंता
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, फिलहाल इस ऐलान पर अमेरिका के बड़े बैंकों की ओर से कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है. American Express, Bank of America, Capital One, Citigroup और JPMorgan जैसे बड़े कार्ड जारीकर्ताओं ने भी अभी तक इस पर कोई बयान नहीं दिया है. रिपोर्ट में कहा गया है कि इस मुद्दे पर स्पष्ट नियम और कानूनी ढांचा सामने आना अभी बाकी है.
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अरबपति निवेशक Bill Ackman ने इस फैसले की आलोचना की है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि यह कदम एक “गलती” हो सकता है. Ackman का कहना है कि अगर कार्ड कंपनियों को जोखिम के हिसाब से ब्याज वसूलने की अनुमति नहीं मिली, तो वे लाखों उपभोक्ताओं के कार्ड बंद कर सकती हैं. ऐसे में लोग मजबूरी में अवैध साहूकारों या ज्यादा महंगे विकल्पों की ओर जा सकते हैं.
फिलहाल ट्रंप का यह ऐलान एक “कॉल” या प्रस्ताव के तौर पर सामने आया है. इसे लागू करने के लिए कानूनी और नियामकीय प्रक्रियाओं से गुजरना होगा. आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि क्या यह योजना वास्तव में लागू हो पाती है या राजनीतिक और कारोबारी दबावों में इसमें बदलाव किया जाता है.
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