टैरिफ पर घर में घिरे ट्रंप, कोर्ट ने टैक्स के फैसले को बताया अवैध, सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगे अमेरिकी राष्ट्रपति
अमेरिका की फेडरल कोर्ट ने डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ पॉलिसी को बड़ा झटका दिया है. अदालत ने कहा कि ट्रंप ने इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर एक्ट (IEEPA) का गलत इस्तेमाल कर अपने अधिकार से अधिक कदम उठाए. हालांकि टैरिफ 14 अक्टूबर तक लागू रहेंगे ताकि सुप्रीम कोर्ट में अपील की जा सके.

Trump Tariff Policy: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भले ही पूरी दुनिया में टैरिफ लगाने का डंका पीट रहे हैं लेकिन उनके कदम को घर में चुनौती मिल रही है. टैरिफ पॉलिसी पर सुनवाई करते हुए फेडरल कोर्ट ने ट्रंप द्वारा लगाए गए टैरिफ को कानून के दायरे से बाहर बताया है. अदालत ने माना कि ट्रंप ने अपने अधिकार से अधिक कदम उठाए. हालांकि कोर्ट ने टैरिफ तुरंत नहीं हटाने का फैसला दिया है और 14 अक्टूबर तक इन्हें लागू रहने दिया गया है. इस बीच ट्रंप ने इसे एक साजिश बताते हुए सुप्रीम कोर्ट जाने का एलान किया है.
अदालत का फैसला क्यों अहम है
फेडरल अपील्स कोर्ट ने यह साफ किया कि 1977 में बने इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर एक्ट यानी IEEPA राष्ट्रपति को असीमित अधिकार नहीं देता. यह कानून सिर्फ इकोनॉमिक इमरजेंसी में वित्तीय लेनदेन को कंट्रोल करने की अनुमति देता है. अदालत ने कहा कि इस कानून का इस्तेमाल कर टैरिफ लगाना सही नहीं है.
ट्रंप ने क्या कहा
फैसले के बाद ट्रंप ने तीखी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि सभी टैरिफ अभी भी लागू हैं और यह फैसला देश के खिलाफ है. ट्रंप ने चेतावनी दी कि अगर टैरिफ हटाए गए तो यह अमेरिका के लिए आर्थिक तबाही साबित होगा. उन्होंने साफ कहा कि वह सुप्रीम कोर्ट तक लड़ाई जारी रखेंगे.
किन टैरिफ पर विवाद है
यह विवाद अप्रैल में लगाए गए टैरिफ से जुड़ा है. ट्रंप ने उन देशों पर 50 फीसदी तक टैरिफ लगाया जिनसे अमेरिका का व्यापार घाटा है. बाकी देशों पर भी 10 फीसदी का शुल्क लगाया गया. जापान और यूरोपीय संघ जैसे देशों ने समझौते कर छूट हासिल की जबकि लाओस और अल्जीरिया पर भारी टैरिफ लगा.
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अब आगे क्या होगा
अदालत ने फिलहाल टैरिफ हटाने का आदेश नहीं दिया है. इन्हें 14 अक्टूबर तक लागू रहने दिया गया है ताकि सुप्रीम कोर्ट में अपील हो सके. अगर सुप्रीम कोर्ट भी इन्हें अवैध ठहराता है तो ट्रंप की पूरी इकोनॉमिक को बड़ा झटका लगेगा. यह फैसला राष्ट्रपति के अधिकार और संसद की भूमिका पर भी बड़ा सवाल खड़ा करता है.
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