फालतू हॉर्न बजाने से पहले हो जाएं सावधान, लग सकता है भारी जुर्माना; जानें क्या हैं नियम
भारत में फालतू हॉर्न बजाने पर सख्त नियम लागू हैं. साइलेंट जोन में हॉर्न बजाने पर 1000-2000 रुपये जुर्माना और अनावश्यक हॉर्न बजाने पर 500 रुपये का जुर्माना लग सकता है. ध्वनि प्रदूषण रोकने और यातायात व्यवस्था सुधारने के लिए ये नियम महत्वपूर्ण हैं. जानिए क्या हैं ट्रैफिक नियम.
India Horn Laws: जब आप सड़कों पर गाड़ी लेकर निकलते हैं और कोई फालतू में हॉर्न बजाता है, तो मूड खराब होना स्वाभाविक है. कुछ लोग तो ऐसे होते हैं जो तरह-तरह के हॉर्न अपनी गाड़ियों में लगवाते हैं. ऐसे में जब वे पास से गुजरते हैं, तो जोर से हॉर्न बजाना नहीं छोड़ते. अब सवाल उठता है कि क्या ऐसे लोगों पर लगाम नहीं लगनी चाहिए? इसका जवाब है, बिलकुल लगनी चाहिए. और इसके लिए बाकायदा नियम भी बनाए गए हैं. आइए जानते हैं, हॉर्न बजाने से जुड़े नियम क्या हैं और फालतू हॉर्न बजाने पर कितना जुर्माना लग सकता है.
क्यों जरूरी हैं ये नियम
विशेषज्ञों के अनुसार, लगातार हॉर्न की आवाज से न केवल ध्वनि प्रदूषण होता है, बल्कि इससे लोगों में तनाव, उच्च रक्तचाप और नींद की समस्या भी उत्पन्न हो सकती है. यातायात पुलिस “no honking” अभियान के अंतर्गत लोगों को जागरूक कर रही है.
क्या कहते हैं नियम
भारतीय मोटर वाहन अधिनियम के तहत अब निम्नलिखित नियम लागू किए गए हैं:
- साइलेंट जोन में हॉर्न बजाना बैन है: अस्पतालों, स्कूलों, धार्मिक स्थलों और न्यायालयों के आसपास के क्षेत्रों को ‘साइलेंट जोन’ घोषित किया गया है. इन इलाकों में हॉर्न बजाने पर 1000 से 2000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है.
- अत्यधिक तेज हॉर्न पर बैन: 95 डेसिबल से अधिक आवाज वाले हॉर्न या म्यूजिकल हॉर्न का उपयोग अब गैरकानूनी है. ऐसे हॉर्न लगवाने पर 10,000 रुपये तक का जुर्माना लग सकता है.
- अनावश्यक हॉर्न बजाने पर कार्रवाई: ट्रैफिक जाम या रेड लाइट पर बेवजह हॉर्न बजाने वाले चालकों पर 500 रुपये का जुर्माना लगाया जा सकता है.
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हॉर्न की आवाज बदलने की तैयारी
केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने हाल ही में कहा कि वह एक ऐसा कानून लाने की योजना बना रहे हैं, जिसके तहत सभी वाहनों के हॉर्न भारतीय संगीत वाद्ययंत्रों पर आधारित होंगे ताकि उन्हें सुनना अधिक सुखद लगे. इनमें बांसुरी, तबला, वायलिन और हारमोनियम जैसे वाद्ययंत्रों की ध्वनियों को शामिल किया जा सकता है. अब देखना दिलचस्प होगा कि यह कानून कब से बनाया जाता है और इसे कब लागू किया जाएगा.
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