Budget 2025: ये 5 बातें जान लीजिए, देश का बजट आसानी से समझ आ जाएगा; पूरी तस्वीर हो जाएगी साफ

बजट 2025 से पहले आम लोगों के लिए बजट की भाषा समझना जरूरी हो जाता है. केंद्रीय बजट में कई ऐसे शब्दों का इस्तेमाल होता है, जिनका मतलब जाने बिना बजट का असर समझना मुश्किल होता है. वित्त वर्ष, डायरेक्ट टैक्स, इनडायरेक्ट टैक्स, फिस्कल डेफिसिट और जीडीपी जैसे शब्द बजट की रीढ़ माने जाते हैं.

इन शब्दों का मतलब समझ लिया जाए तो बजट को समझना काफी आसान हो जाता है. Image Credit: @Canva/Money9live

Budget 2025 Financial Year: केंद्रीय बजट 2025 का समय नजदीक आ गया है और देश की नजरें एक बार फिर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के बजट भाषण पर टिकी होंगी. संसद का बजट सत्र 28 जनवरी से शुरू होगा. 1 फरवरी को पेश होने वाले बजट में सरकार अपनी आमदनी और खर्च का पूरा हिसाब देती है. लेकिन बजट भाषण में कई ऐसे शब्द आते हैं जो आम लोगों को उलझा देते हैं. अगर इन शब्दों का मतलब समझ लिया जाए तो बजट को समझना काफी आसान हो जाता है.

वित्त वर्ष क्या होता है

वित्त वर्ष को फाइनेंशियल ईयर भी कहा जाता है. यह वह समय अवधि होती है जिसके आधार पर सरकार अपने खर्च और कमाई का हिसाब रखती है. भारत में वित्त वर्ष 1 अप्रैल से शुरू होकर अगले साल 31 मार्च तक चलता है. बजट में सभी योजनाएं और आंकड़े इसी अवधि के हिसाब से पेश किए जाते हैं.

डायरेक्ट टैक्स का मतलब

डायरेक्ट टैक्स वह टैक्स होता है जो व्यक्ति सीधे सरकार को देता है. यह टैक्स किसी और पर ट्रांसफर नहीं किया जा सकता. इनकम टैक्स और कॉरपोरेट टैक्स इसके प्रमुख उदाहरण हैं. आपकी इनकम जितनी ज्यादा होगी डायरेक्ट टैक्स का बोझ भी उतना ही ज्यादा हो सकता है.

इनडायरेक्ट टैक्स क्या है

इनडायरेक्ट टैक्स वह टैक्स होता है जो आप सीधे सरकार को नहीं देते. यह टैक्स सामान या सर्विस की कीमत में जुड़ा होता है. जीएसटी इसका सबसे बड़ा उदाहरण है. दुकानदार या सर्विस प्रोवाइडर यह टैक्स सरकार तक पहुंचाता है लेकिन असली बोझ ग्राहक पर पड़ता है.

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फिस्कल डेफिसिट क्यों अहम है

फिस्कल डेफिसिट यानी राजकोषीय घाटा सरकार की कमाई और खर्च के बीच का अंतर होता है. जब सरकार की आमदनी खर्च से कम होती है तो फिस्कल डेफिसिट बढ़ता है. यह आंकड़ा देश की आर्थिक सेहत दिखाता है. बजट में सरकार इसे कंट्रोल करने की कोशिश करती है.

जीडीपी क्या बताती है

जीडीपी यानी सकल घरेलू उत्पाद किसी एक साल में देश में पैदा होने वाले सभी गुड्स और सर्विस की कुल वैल्यू होती है. यह देश की आर्थिक ताकत को दर्शाती है. बजट में विकास दर और योजनाओं का असर जीडीपी के आधार पर समझा जाता है.

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