Budget 2026: कैपिटल गुड्स मैन्युफैक्चरिंग और ऑटो सेक्टर पर होगा जोर, ₹23000 करोड़ के इंसेंटिव से मिलेगा बूस्ट! ये है प्लान
बजट 2026 में सरकार कैपिटल गुड्स और ऑटो सेक्टर में घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को तेज करने के लिए इंसेंटिव पैकेज का ऐलान कर सकती है, ताकि आयात पर निर्भरता घटे. इसमें कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट के स्वदेशीकरण और ऑटो सेक्टर में ADAS व हाई-टेक कंपोनेंट्स की लोकल मैन्युफैक्चरिंग पर खास फोकस रहेगा.
Budget 2026: आगामी बजट में भारत सरकार घरेलू मैन्युफैक्चरिंग और ऑटो सेक्टर की गति को बढ़ाने पर फोकस कर सकती है. सूत्रों के मुताबिक बजट 2026 में सरकार कैपिटल गुड्स और ऑटो सेक्टर में घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को तेज करने के लिए ₹23,000 करोड़ तक के इंसेंटिव पैकेज का ऐलान कर सकती है. इससे आयात पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी, साथ ही हाई-वैल्यू कैपिटल गुड्स का देश में उत्पादन बढ़ेगा.
ईटी की रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि ₹14,000–16,000 करोड़ की योजना कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट सेक्टर के लिए लगभग तय हो चुकी है, जबकि ₹7,000 करोड़ की एक अलग स्कीम ऑटोमोबाइल सेक्टर में मजबूत ग्लोबल वैल्यू चेन (GVC) तैयार करने के लिए लाई जा रही है. मामले से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक योजनाएं तैयारी के अंतिम चरण में हैं और इन्हें बजट में पेश किया जा सकता है.
टनल बोरिंग मशीन और क्रेनों पर फोकस
रिपोर्ट के मुताबिक कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट पैकेज के तहत टनल बोरिंग मशीन, हाई-एंड क्रेन और भारी मशीनरी के स्वदेशीकरण पर जोर होगा. फिलहाल इस सेक्टर के करीब आधे कंपोनेंट्स चीन, जापान, दक्षिण कोरिया और जर्मनी से आयात किए जाते हैं. चीन की ओर से टनल बोरिंग मशीन के निर्यात पर लगाए गए प्रतिबंधों ने पहले भारत की कई इंफ्रा परियोजनाओं को प्रभावित किया था.
ऑटो सेक्टर में ADAS समेत इन चीजों पर फोकस
ऑटो सेक्टर के लिए प्रस्तावित GVC स्कीम में ADAS, 360 डिग्री कैमरा, सेंसर और टेलीमैटिक्स जैसे आधुनिक कंपोनेंट्स के स्थानीय निर्माण को बढ़ावा दिए जाने का प्लान है. योजना के तहत कम से कम 50% घरेलू वैल्यू एडिशन वाले प्रोजेक्ट्स को सपोर्ट मिलेगा, जिससे निर्यात के नए अवसर भी खुल सकते हैं.
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सप्लाई चेन मजबूत करने की तैयारी
नई स्कीम में ऑटो पार्ट्स निर्माण में इस्तेमाल होने वाले मोल्ड्स, पावर टूल्स और प्रोटोटाइपिंग सेंटर्स के लिए सब्सिडी भी दी जा सकती है. इसका मकसद प्री-प्रोडक्शन टेस्टिंग को आसान बनाना और इंडस्ट्री पार्टनरशिप के जरिए सप्लाई चेन को मजबूत करना है.
पहले भी मिल चुका है सपोर्ट
पिछले साल के बजट में भी सरकार ने ईवी और मोबाइल बैटरी निर्माण में राहत दी थी. सरकरार ने इससे जुड़े 63 कैपिटल गुड्स पर कस्टम ड्यूटी छूट दी थी. जिससे घरेलू लिथियम-आयन बैटरी मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा मिला है.
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