क्या अमेरिका के इस कदम से ऑटोमोबाइल और दवा इंपोर्ट पर पड़ने वाला है असर, जानें क्या कहते हैं निर्यातक
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने मंगलवार को कहा था कि ऑटो, सेमीकंडक्टर और दवा आयात पर 25 फीसदी टैरिफ लगाया जा सकता है और इसकी घोषणा 2 अप्रैल तक हो सकती है. लेकिन भारतीय उद्योग नेताओं ने कहा है कि वे नुकसान को सीमित करने के लिए नीतियां लागू कर सकते हैं.
Automobile and pharmaceutical imports: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ऑटोमोबाइल और दवा इंपोर्ट पर हाई टैरिफ लगाने के ऐलान किए जाने से पूरी दुनिया के कारोबारी परेशान हैं, लेकिन भारत में कुछ अलग ही नजारा देखने को मिल रहा है. कहा जा रहा है कि अमेरिका के इस कदम से भारतीय निर्यातकों पर कोई बड़ा असर पड़ने वाला नहीं है. क्योंकि अमेरिका का यह ऐलान मुख्य रूप से अमेरिकी घरेलू उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए है. लेकिन इसका भारतीय निर्यातकों पर बहुत अधिक प्रभाव नहीं पड़ने की संभावना नहीं है.
दोनों क्षेत्रों (ऑटोमोबाइल और दवा ) के अधिकारियों और उद्योग निकाय प्रमुखों का कहना है कि अमेरिका की ओर से किसी भी तरह हाई टैरिफ लगाए जाने से भारतीय कंपनियों की निर्यात बाजार में प्रतिस्पर्धा करने की क्षमता पर कोई असर नहीं पड़ेगा. क्योंकि एशिया में अन्य राइवल भी समान रूप से प्रभावित होंगे.
प्रभाव पड़ने की नहीं है संभावना
भारतीय दवा निर्यात संवर्धन परिषद के महानिदेशक राजा भानु ने कहा कि दक्षिण एशियाई देश की जेनेरिक दवाओं पर उच्च शुल्कों का नकारात्मक प्रभाव पड़ने की संभावना नहीं है. क्योंकि टैरिफ में किसी भी तरह की बढ़ोतरी से कॉम्पिटिटर्स पर भी समान रूप से असर पड़ेगा. भानु ने कहा कि भारत जेनेरिक दवा निर्माण का केंद्र है और अमेरिका में जेनेरिक नुस्खों में इसके उत्पादों का हिस्सा 40 फीसदी से अधिक है.
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8.7 बिलियन डॉलर की दवा निर्यात
उदाहरण के लिए, भानु ने कहा कि भारत को अमेरिकी फॉर्मूलेशन आयात पर मौजूदा टैरिफ हटा देना चाहिए. इससे व्हाइट हाउस की ओर से उद्योग पर किसी भी उच्च शुल्क के जोखिम को कम किया जा सकता है. भारत के वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, दक्षिण एशियाई राष्ट्र ने 2023-24 में अमेरिका को 8.7 बिलियन डॉलर की दवाएं और फार्मास्यूटिकल्स निर्यात किए. दोनों देश इस साल एक व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने का भी लक्ष्य बना रहे हैं, जो भारत को ट्रंप की बढ़ोतरी के प्रभाव से बचा सकता है.
40 फीसदी कमाई अमेरिका से
ऑटो कंपोनेंट निर्माता सोना बीएलडब्ल्यू प्रिसिजन फोर्जिंग्स लिमिटेड, को भी अपने व्यवसाय पर न्यूनतम प्रभाव की उम्मीद है. यह अपने रेवेन्यू के लगभग 40 फीसदी के लिए अमेरिका पर निर्भर है. इसके शीर्ष कार्यकारी ने कहा कि भले ही ट्रम्प पारस्परिक टैरिफ की अपनी योजनाओं को आगे बढ़ा रहे हैं, लेकिन भारत द्वारा आयात किए जाने वाले लगभग सभी ऑटो कंपोनेंट भारत में केवल 7.5 फीसदी के मूल आयात शुल्क के अधीन हैं.
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