गैस संकट के चलते इंडक्शन हीटर प्रोडक्शन बढ़ाने की तैयारी में सरकार, 18000 करोड़ रुपये का पड़ेगा बोझ
वैश्विक तनाव का असर अब घरेलू जरूरतों पर भी दिखने लगा है. कुकिंग गैस को लेकर बढ़ती चिंता के बीच लोग तेजी से विकल्प तलाश रहे हैं. सरकार ने भी हालात को देखते हुए तैयारी शुरू कर दी है, जिससे आने वाले समय बाजार बदलता नजर आ सकता है.
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर अब आम लोगों की रसोई तक पहुंचता दिख रहा है. एलपीजी गैस सप्लाई को लेकर बनी अनिश्चितता के बीच देश में इंडक्शन हीटर और उससे जुड़े बर्तनों की मांग अचानक बढ़ गई है. हालात को देखते हुए सरकार भी हरकत में आ गई है और घरेलू उत्पादन बढ़ाने पर जोर दे रही है, ताकि किसी संभावित संकट से निपटा जा सके.
सरकार ने की अहम बैठक
पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, शुक्रवार को इस मुद्दे पर सरकार ने एक उच्चस्तरीय बैठक की. बैठक की अध्यक्षता वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने की, जिसमें कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए. इसमें इंडक्शन हीटर और उससे जुड़े बर्तनों के उत्पादन को तेजी से बढ़ाने पर चर्चा हुई.
रिपोर्ट में अधिकारी के हवाले से बताया गया है कि सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि बढ़ती मांग को जल्द पूरा किया जा सके और बाजार में सप्लाई की कमी न हो.
क्यों बढ़ रही है मांग?
पश्चिम एशिया संकट के चलते होर्मुज स्ट्रेट से तेल और गैस ले जाने वाले जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है. इससे एलपीजी सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ गई है.
इसी वजह से लोग तेजी से इंडक्शन हीटर और इलेक्ट्रिक केतली जैसे विकल्प खरीद रहे हैं. बाजार में इन उत्पादों की बिक्री “हॉट केक” की तरह हो रही है, यानी मांग बहुत तेज हो गई है.
सप्लाई चेन बनाए रखने की कोशिश
सरकार सिर्फ घरेलू उपकरणों तक सीमित नहीं है, बल्कि अन्य सेक्टर की सप्लाई भी बनाए रखने पर काम कर रही है. इसी के तहत पेट्रोकेमिकल उत्पादों के आयात पर तीन महीने के लिए कस्टम ड्यूटी हटा दी गई है.
इस कदम से फार्मा, टेक्सटाइल, केमिकल और ऑटो सेक्टर को राहत मिलेगी. हालांकि इससे सरकार पर करीब 1800 करोड़ रुपये का बोझ पड़ेगा.
यह भी पढ़ें: Gold-Silver Ratio बढ़कर 65 के करीब, गिरती कीमतों के बीच सोना या चांदी, किसमें बन रहा है निवेश का मौका?
बढ़ती कीमतों का असर
इस संकट का असर कच्चे तेल की कीमतों पर भी पड़ा है. अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर हमले के बाद कच्चे तेल की कीमतें करीब 50% तक बढ़ चुकी हैं. भारत, जो तेल और उर्वरक का बड़ा आयातक है, उसके लिए यह स्थिति चिंता का कारण बन सकती है.
Latest Stories
ईरान-इजरायल संकट से भारत को हो सकता है फायदा, डेटा सेंटर सेक्टर में बढ़ी मांग; 200-500 MW कैपेसिटी शिफ्ट होने के संकेत
पश्चिम एशिया तनाव के बीच सोने-चांदी में हल्की तेजी के संकेत, RBI पॉलिसी और US डेटा तय करेंगे अगला रुख
पेट्रोल-डीजल पर टैक्स से किसे कितना फायदा? केंद्र और राज्यों के राजस्व का ये है पूरा हिसाब; जानें टॉप पर कौन शामिल
