टैरिफ विवाद के बीच PM मोदी और जिनपिंग ने ट्रंप को भेजा सख्त संदेश, भारत-अमेरिका के बीच दूरी से क्यों खुश चीन?

PM Modi China Visit: इस द्विपक्षीय वार्ता की शुरुआत दोनों नेताओं के बीच हाथ मिलाने से हुई, जो दोनों पुराने प्रतिद्वंद्वियों के बीच सुलह की दिशा में अगले कदम का संकेत था. यह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए भी एक संदेश था. अपनी ओर से शी जिनपिंग ने प्रधानमंत्री मोदी का स्वागत किया.

पीएम मोदी और शी जिनपिंग की मुलकात से ट्रंप को संदेश. Image Credit: PTI

PM Modi China Visit: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को चीन के पोर्ट शहर तियानजिन में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन से इतर चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की. सात साल बाद चीन पहुंचे पीएम मोदी ने जिनपिंग के साथ बैठक के दौरान कहा कि भारत-चीन संबंधों का गाइडेंस आपसी विश्वास और सम्मान से होना चाहिए. इस द्विपक्षीय वार्ता की शुरुआत दोनों नेताओं के बीच हाथ मिलाने से हुई, जो दोनों पुराने प्रतिद्वंद्वियों के बीच सुलह की दिशा में अगले कदम का संकेत था. साथ ही, यह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए भी एक संदेश था, जिनके टैरिफ संबंधी आक्रामक रुख ने नई दिल्ली और बीजिंग, दोनों के साथ वाशिंगटन के संबंधों को खराब कर दिया है.

एक घंटे की बैठक के दौरान, प्रधानमंत्री मोदी ने द्विपक्षीय संबंधों में हाल की प्रगति का जिक्र किया, जिसमें सीमा गतिरोध पर विशेष प्रतिनिधियों के बीच समझौते से लेकर कैलाश मानसरोवर यात्रा की बहाली और दोनों देशों के बीच सीधी उड़ानों की बहाली शामिल है. प्रधानमंत्री ने कहा, ‘दोनों देशों के 2.8 अरब लोगों के हित हमारे सहयोग से जुड़े हैं. इससे संपूर्ण मानवता के कल्याण का मार्ग भी प्रशस्त होगा.’ उन्होंने कहा, ‘हम आपसी विश्वास, सम्मान और संवेदनशीलता के आधार पर अपने संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.’

‘ड्रैगन और हाथी’

अपनी ओर से शी जिनपिंग ने प्रधानमंत्री मोदी का स्वागत किया और नई दिल्ली को बीजिंग का ‘महत्वपूर्ण मित्र’ बताया. उन्होंने कहा कि दोनों देशों को अपने संबंधों को ‘रणनीतिक और लॉन्ग टर्म दृष्टिकोण से’ संभालना चाहिए.राष्ट्रपति ने कहा कि चीन और भारत दो सबसे सभ्य देश हैं. हम दुनिया के दो सबसे अधिक आबादी वाले देश हैं और ग्लोबल साउथ का हिस्सा हैं. दोस्त और अच्छे पड़ोसी बनना और ड्रैगन और हाथी का एक साथ आना बेहद जरूरी है.

प्रधानमंत्री मोदी सात साल बाद चीन की यात्रा पर पहुंचे हैं. साल 2018 में उनकी वुहान यात्रा, डोकलाम गतिरोध के बाद हुई थी. इस बार, दोनों एशियाई शक्तियां ट्रंप के टैरिफ से मची उथल-पुथल से निपटने के लिए आर्थिक और रणनीतिक तालमेल पर केंद्रित हैं.

भारत के साथ खड़ा नजर आया है चीन

हाल के दिनों में, चीन ने भारतीय निर्यात पर 50 फीसदी के दंडात्मक टैरिफ की स्पष्ट रूप से निंदा की है और कहा है कि वह ‘भारत के साथ दृढ़ता से खड़ा है’ और अमेरिका को ‘बुली’ करार दिया है. ट्रंप द्वारा चल रही बातचीत के बीच बीजिंग पर आसमान छूते टैरिफ को फिर से लागू करने में 90 दिनों की और देरी के बाद, अमेरिका और चीन के बीच एक असहज टैरिफ युद्धविराम लागू है.

चीन तब और नाराज हो गया जब इस हफ्ते की शुरुआत में ट्रंप ने धमकी दी कि अगर वह अमेरिका को रेयर अर्थ मैग्नेट के एक्सपोर्ट पर रोक लगाता है, तो उस पर 200 फीसदी टैरिफ लगाया जाएगा.

ट्रंप को सख्त संदेश

जानकारों का कहना है कि यह बैठक केवल भारत और चीन के बारे में नहीं थी, जो साथ मिलकर काम करने के लिए तैयार हैं, बल्कि कई चिंतित देशों के समूह के बारे में भी थी. यह एक दिखावे का क्षण है और आगे कहा कि यह अमेरिका को भारत के प्रति उसके मनमाने एक्शन के लिए एक बहुत कड़ा संदेश देता है.

अमेरिकी टैरिफ मोदी, शी जिनपिंग और पुतिन को करीब लाते हैं

प्रधानमंत्री मोदी सोमवार को तियानजिन में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से भी मिलने वाले हैं. अमेरिका द्वारा भारत पर 50 फीसदी टैरिफ लगाने के बाद, मोदी और पुतिन के बीच पहली मुलाकात होगी. ट्रंप ने रूसी तेल खरीदना बंद करने से इनकार करने पर भारतीय वस्तुओं पर टैरिफ दोगुना करके 50 फीसदी कर दिया है. अमेरिका के दंडात्मक टैरिफ से पहले भी भारत व्यापार बढ़ाने की कोशिश करते हुए, निवेश और टेक्नोलॉजी के सोर्स के रूप में चीन के प्रति सावधानी से दोस्ताना रवैया अपना रहा था.

संबंधों में सुधार की शुरुआत

डोकलाम गतिरोध के बाद पनपे अविश्वास और फिर 2020 में गलवान घाटी में हुई घातक झड़पों के बाद, दोनों पड़ोसियों के बीच संबंध अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए थे. संबंधों में पिछले अक्टूबर में ही सुधार आना शुरू हुआ, जब प्रधानमंत्री और शी जिनपिंग लंबे समय तक बहुपक्षीय प्लेटफॉर्म पर एक-दूसरे से दूर रहने के बाद रूस में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में मिले. यह मुलाकात दोनों पक्षों द्वारा वास्तविक नियंत्रण रेखा पर शेष टकराव वाले प्वाइंट पर पीछे हटने पर सहमत होने के बाद हुई थी.

अब, अमेरिका-भारत संबंधों में गिरावट के साथ, नई दिल्ली के पास बीजिंग के साथ तनाव कम करने का एक नया प्रोत्साहन है. विश्लेषकों का कहना है कि ट्रंप के व्यापार युद्ध ने दशकों पुरानी अमेरिकी कूटनीति को उलट दिया है, जिसने भारत को चीन के प्रतिपक्ष के रूप में स्थापित किया था.

क्या रिश्ते और भी मधुर हो रहे हैं?

ट्रंप और मोदी के बीच नए तनाव के कारण दोनों साझेदारों के बीच बढ़ते सुरक्षा संबंधों में कमी आने से चीन को खुशी हो रही है. चीनी अधिकारी भारत, अमेरिका और उसके सहयोगी ऑस्ट्रेलिया व जापान के बीच क्वाड सुरक्षा वार्ता के विस्तार को बेचैनी से देख रहे हैं, जिसे व्यापक रूप से चीन का मुकाबला करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है.

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