Gold-Silver Rate: चांदी ₹700 उछली, गोल्ड भी चढ़ा; पश्चिम एशिया टेंशन से बढ़ी सेफ-हेवन की डिमांड

21 अप्रैल को सर्राफा बाजार में सोना और चांदी दोनों में तेजी देखने को मिली. चांदी 700 रुपये बढ़कर 2.58 लाख रुपये प्रति किलो पहुंच गई, जबकि सोना भी 300 रुपये चढ़ा. पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के चलते निवेशक सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं, हालांकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों पर दबाव बना हुआ है.

सोने-चांदी का भाव Image Credit: @Money9live

Gold Silver Price on 21 April (सोने चांदी के आज का भाव): मंगलवार, 21 अप्रैल को सर्राफा बाजार में सोने-चांदी की कीमतों में हल्की तेजी देखने को मिली, जहां एक ओर चांदी ने तेज छलांग लगाई तो वहीं सोना भी मजबूती के साथ ऊपर की ओर बढ़ा. राजधानी में चांदी की कीमत 700 रुपये उछलकर 2.58 लाख रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई, जो निवेशकों के बीच सुरक्षित निवेश की बढ़ती मांग को दर्शाता है.

सोना भी महंगा

सोने की बात करें तो 99.9 फीसदी शुद्धता वाला सोना 300 रुपये चढ़कर 1,57,300 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गया. घरेलू बाजार में यह बढ़त ऐसे समय पर आई है जब पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने निवेशकों को फिर से सेफ-हेवन एसेट्स की ओर मोड़ दिया है. बाजार के जानकारों का मानना है कि अनिश्चित वैश्विक माहौल में सोना-चांदी जैसी धातुएं निवेशकों के लिए सुरक्षित विकल्प बन जाती हैं.

अंतरराष्ट्रीय बाजार रुख कैसा?

हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजार का रुख घरेलू ट्रेंड से अलग नजर आया. ग्लोबल मार्केट में चांदी की कीमत करीब 1.29 फीसदी गिरकर 78.69 डॉलर प्रति औंस पर आ गई, जबकि सोना भी लगभग 1 फीसदी फिसलकर 4,776 डॉलर प्रति औंस के आसपास ट्रेड करता दिखा. मजबूत डॉलर और वैश्विक अनिश्चितताओं ने इन कीमतों पर दबाव बनाया.

क्या है एक्सपर्ट्स की राय?

विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच संभावित बातचीत को लेकर स्थिति अभी भी साफ नहीं है. अमेरिका की ओर से बातचीत के संकेत जरूर मिले हैं, लेकिन ईरान की तरफ से कोई ठोस प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है. ऐसे में निवेशक सतर्क हैं और हर नई अपडेट पर नजर बनाए हुए हैं. बाजार विश्लेषकों का कहना है कि आने वाले दिनों में सोने की दिशा काफी हद तक पश्चिम एशिया की जियो पॉलिटिकल स्थिति पर निर्भर करेगी.

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अगर तनाव बढ़ता है तो कीमतों में और तेजी देखने को मिल सकती है, जबकि किसी भी तरह की शांति वार्ता या समझौता कीमतों पर दबाव डाल सकता है. इसके साथ ही कच्चे तेल की कीमतें और महंगाई से जुड़ी आशंकाएं भी सोने-चांदी की चाल तय करने में अहम भूमिका निभाएंगी.