बढ़ रहा प्लास्टिक इंडस्ट्री पर दबाव, बोतलबंद पानी समेत रोजमर्रा के सामान होंगे महंगे? पश्चिम एशिया तनाव का असर

पश्चिम एशिया तनाव ने ग्लोबल ऑयल मार्केट में अस्थिरता बढ़ा दी है, जिसका असर अब भारत के प्लास्टिक और कंज्यूमर प्रोडक्ट इंडस्ट्री पर साफ देखने को मिल सकता है. ऐसे में अगर हालात जल्द नहीं सुधरे, तो आम उपभोक्ताओं को महंगाई का और बड़ा झटका लग सकता है.

यूएस ईरान वार

America-Iran War Impact On Plastics Industries: ईरान में जारी तनाव का असर अब धीरे-धीरे आम लोगों की जेब पर साफ दिखने लगा है. कच्चे तेल की कीमतों में उछाल से प्लास्टिक उद्योग पर दबाव बढ़ गया है, जिसका असर FMCG, पेंट और पर्सनल केयर जैसे सेक्टर की लागत पर पड़ रहा है. The Economic Times की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की रिजिड प्लास्टिक पैकेजिंग बनाने वाली कंपनी Alternicq ने बताया है कि ईरान युद्ध शुरू होने के बाद प्लास्टिक बनाने में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल की कीमतों में करीब 40 फीसदी तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है.

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि पॉलीएथिलीन टेरेफ्थेलेट (PET) और पॉलीप्रोपाइलीन (PP) जैसे प्रमुख पॉलिमर, जो सीधे कच्चे तेल से तैयार होते हैं, उनकी कीमतों में यह तेज उछाल देखने को मिला है. यही वजह है कि प्लास्टिक आधारित प्रोडक्ट की लागत तेजी से बढ़ रही है और इसका असर आगे चलकर उपभोक्ताओं तक पहुंच सकता है.

तेल कीमतों का असर कई सेक्टर पर

ईरान संघर्ष के चलते ग्लोबल बाजार में तेल की सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ी है, जिससे कच्चे तेल की कीमतें ऊपर गई हैं. इसका असर सिर्फ प्लास्टिक उद्योग तक सीमित नहीं है, बल्कि FMCG, पेंट और पर्सनल केयर सेक्टर तक फैल गया है.
Marico, Hindustan Unilever और Asian Paints जैसी बड़ी कंपनियां Alternicq की ग्राहक हैं, जिनकी लागत पर इसका सीधा असर पड़ सकता है.

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बढ़ी लागत का बोझ किसपर डाला जाएगा ?

Alternicq ने साफ किया है कि बढ़ी हुई लागत का कुछ हिस्सा ग्राहकों पर डाला जा सकता है, जिससे रोजमर्रा के उत्पाद जैसे बोतलबंद पानी और दूसरे पैकेज्ड सामान महंगे हो सकते हैं. हालांकि अगर ईरान संघर्ष जल्द खत्म हो जाता है, तो अगले 4 से 6 महीनों में कच्चे माल की कीमतें सामान्य हो सकती हैं.

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