FII निवेश के लिए सरकार का बड़ा फैसला, कैपिटल गेन और विदहोल्डिंग टैक्स खत्म, एक अप्रैल 2026 से मिलेगा फायदा
विदेशी निवेशकों को आकर्षित करने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. सरकार ने सरकारी प्रतिभूतियों (G-Secs) से होने वाली ब्याज आय और कैपिटल गेन पर विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) को टैक्स में छूट देने का फैसला किया है. आयकर (संशोधन) अध्यादेश, 2026 के तहत यह राहत 1 अप्रैल 2026 से लागू होगी, जिससे भारतीय बॉन्ड बाजार में विदेशी निवेश बढ़ने की उम्मीद है.
विदेशी निवेशकों को भारतीय सरकारी बॉन्ड यानी G-Secs में निवेश के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. Income-tax (Amendment) Ordinance, 2026 के तहत विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) को G-Secs से होने वाले इनकम और कैपिटल गेन पर टैक्स से छूट दी गई है. यह व्यवस्था 1 अप्रैल 2026 से लागू होगी. यानी इसका फायदा विदेशी निवेश रेट्रोस्पेक्टिव रुप से उठा सकेंगे
सरकारी बॉन्ड में विदेशी निवेशकों के लिए क्या बदला?
- G-Secs से मिलने वाले ब्याज पर अब टैक्स नहीं लगेगा.
- पहले लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन (LTCG) पर 12.5% टैक्स लगता था, जिसे खत्म कर दिया गया है.
- पहले ब्याज आय पर 20% विदहोल्डिंग टैक्स लगता था, अब यह भी नहीं लगेगा.
- बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स (BIS) को भी यही टैक्स छूट दी गई है.
- नए नियम 1 अप्रैल 2026 से लागू होंगे.
क्यों जारी किया अध्यादेश?
इस कैलेंडर वर्ष में अब तक विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने भारतीय बाजार से कुल 2.47 लाख करोड़ रुपये निकाल लिए हैं. यह रकम 2025 में निकाले गए 1.04 लाख करोड़ रुपये से दोगुने से भी ज्यादा है. 20 मई को रुपया डॉलर के मुकाबले गिरकर अपने सबसे निचले स्तर 96.96 पर पहुंच गया था. हालांकि, इसके बाद रुपये में कुछ सुधार देखने को मिला. रुपये पर लगातार बढ़ते दबाव और भारतीय बाजार से बाहर निकलते विदेशी निवेशकों को आकर्षित करने के लिए सरकार ने यह अध्यादेश जारी किया है.
क्या मिलेगा फायदा?
दुनिया भर के शेयर बाजारों की रैंकिंग में भारत 7वें स्थान पर आता है. अमेरिका, चीन, जापान, हॉन्गकॉन्ग, ताइवान और दक्षिण कोरिया के बाजार इस रैंकिंग में भारत से आगे हैं. सरकार के हालिया फैसले से विदेशी निवेशक ताइवान, हॉन्गकॉन्ग और जापान जैसे बाजारों से पैसा निकालकर भारतीय बाजार में निवेश करेंगे. इससे बाजार पर दबाव घटेगा. यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है, जब पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध ने देश के वित्तीय बाजारों की कमर तोड़ दी है.
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