India-EU FTA पर 20 साल से चल रही थी मशक्कत, 27 जनवरी को लगेगी मुहर; इन्वेस्टमेंट और एक्सपोर्ट में ग्रोथ की उम्मीद
भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच करीब 18 साल बाद FTA को लेकर बड़ी सहमति बनने जा रही है, जिसकी औपचारिक घोषणा 27 जनवरी को होने की संभावना है. इस समझौते से भारत और यूरोप के बीच व्यापार, निवेश और एक्सपोर्ट को नई रफ्तार मिलने की उम्मीद है. FTA के तहत कई सेक्टर में इम्पोर्ट ड्यूटी कम या खत्म हो सकती है, जिससे भारतीय प्रोडक्ट यूरोपीय बाजार में ज्यादा प्रतिस्पर्धी बनेंगे.
India EU FTA: भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच लंबे समय से चल रही FTA बातचीत का औपचारिक समापन 27 जनवरी को होने जा रहा है. 2007 में शुरू हुई यह बातचीत करीब 20 साल बाद अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंची है. अमेरिका के ज्यादा टैरिफ से उत्पन्न अस्थिरता के बीच यह समझौता भारत के लिए रणनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है. इससे भारत और यूरोप के बीच आर्थिक, व्यापारिक और निवेश संबंधों को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है. वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने इस FTA को अब तक की सबसे बड़ी व्यापारिक डील बताते हुए इसे “मदर ऑफ ऑल डील्स” करार दिया है.
भारत–यूरोपीय यूनियन शिखर सम्मेलन में होगी घोषणा
FTA बातचीत के समापन की घोषणा भारत–यूरोपीय यूनियन शिखर सम्मेलन के दौरान की जाएगी. इस अहम बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ यूरोपीय यूनियन की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा शामिल होंगे. उर्सुला वॉन डेर लेयेन 24 जनवरी को चार दिन की भारत यात्रा पर पहुंच चुकी हैं.
FTA में क्या है खास
ऐसे समझौतों में दोनों पक्ष अपने बीच ट्रेड होने वाले 90 प्रतिशत से ज्यादा सामानों पर इंपोर्ट ड्यूटी कम या खत्म कर देते हैं. कई प्रोडक्ट्स (जैसे टेक्सटाइल और फुटवियर जैसे लेबर इंटेंसिव सेक्टर) पर ट्रेड समझौते के लागू होने के पहले ही दिन ड्यूटी तुरंत खत्म हो जाती है. कुछ चीजों पर ड्यूटी पांच, सात या दस साल में धीरे-धीरे खत्म या कम की जाती है.
इसके साथ ही टेलीकम्युनिकेशन, ट्रांसपोर्टेशन, अकाउंटिंग और ऑडिटिंग जैसे सर्विस सेक्टर में ट्रेड को बढ़ावा देने के लिए नियमों को भी आसान बनाया जाता है. कुछ सेक्टर, जैसे अल्कोहलिक बेवरेज और ऑटोमोबाइल (ऑस्ट्रेलिया और UK के साथ ट्रेड डील के मामले में), के लिए कोटा-आधारित मार्केट एक्सेस भी दिया जाता है.
खुलेगा वैकल्पिक रास्ता
अमेरिका द्वारा लगाए गए 50 फीसद तक के टैरिफ से व्यापार प्रभावित हुआ है. ऐसे माहौल में यह FTA भारतीय निर्यातकों को नए बाजार और वैकल्पिक सप्लाई चेन उपलब्ध कराएगा. इससे चीन पर निर्भरता कम करने में भी मदद मिलने की उम्मीद है. यूरोपीय संघ भारत के कुल निर्यात का करीब 17 फीसद हिस्सा है, जबकि भारत यूरोपीय संघ के कुल निर्यात का लगभग 9 फीसद आयात करता है. वर्ष 2024-25 में दोनों के बीच वस्तुओं का द्विपक्षीय व्यापार 136.53 अरब अमेरिकी डॉलर रहा, जबकि सर्विस का व्यापार 83.10 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया.
विदेशी निवेश
यूरोपीय संघ भारत में एक बड़ा निवेशक है. अप्रैल 2000 से सितंबर 2024 के बीच भारत में यूरोपीय संघ से 117.4 अरब अमेरिकी डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश आया है और करीब 6,000 यूरोपीय कंपनियां भारत में सक्रिय हैं. वहीं भारत का यूरोपीय संघ में प्रत्यक्ष निवेश करीब 40.04 अरब अमेरिकी डॉलर आंका गया है.
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