ईरान-इजराइल टेंशन से बढ़ी ब्रेंट क्रूड में उछाल की आशंका, होर्मुज स्ट्रेट में शिपमेंट रुकी; सप्लाई बाधित

ईरान-इजराइल-अमेरिका तनाव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य से कच्चे तेल की शिपमेंट अस्थायी रूप से रोक दी गई है, जिससे वैश्विक तेल सप्लाई पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है. यह जलमार्ग दुनिया के अहम एनर्जी कॉरिडोर में शामिल है और यहां व्यवधान से ब्रेंट क्रूड की कीमतों में तेज उछाल संभव है.

ईरान इजरायल तनाव Image Credit: tv9 bharatvarsh

Iran Israel conflict oil impact: मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव का असर अब वैश्विक तेल सप्लाई पर दिखाई देने लगा है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान-इजराइल-अमेरिका टकराव के बीच कई ऑयल मेजर्स और बड़े ट्रेडिंग हाउस ने होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते कच्चे तेल और फ्यूल की शिपमेंट अस्थायी रूप से रोक दी है. यह जलमार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण एनर्जी कॉरिडोर में से एक माना जाता है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है. इसी बीच ईरान ने ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ को बंद कर दिया है.

शिपमेंट रोकी, जहाज रुके

एक प्रमुख ट्रेडिंग डेस्क के अधिकारी ने रॉयटर्स को बताया कि उनके जहाज कुछ दिनों तक आगे नहीं बढ़ेंगे और यहीं खड़े रहेंगे. माना जा रहा है कि सुरक्षा चिंताओं और संभावित सैन्य गतिविधियों के कारण यह कदम उठाया गया है. होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाली सप्लाई बाधित होने पर एशिया और यूरोप के लिए कच्चे तेल की सप्लाई प्रभावित हो सकती है, जिससे कीमतों में अस्थिरता बढ़ने का खतरा है.

सैन्य तनाव ने बढ़ाई अनिश्चितता

रिपोर्ट्स के मुताबिक, इजराइल ने ईरान के खिलाफ स्ट्राइक की, जबकि अमेरिका ने भी कुछ ठिकानों पर हमले शुरू किए. दो अमेरिकी अधिकारियों ने रॉयटर्स को बताया कि ईरान में टार्गेटेड सैन्य कार्रवाई की गई है. ईरानी मीडिया ने तेहरान में विस्फोटों की खबर दी, जबकि इजरायल में भी सायरन बजने की सूचना है. पहले भी इस क्षेत्र में 12 दिन के हवाई संघर्ष के बाद यह ताजा तनाव वैश्विक बाजारों के लिए नई चिंता बन गया है.

तेल बाजार पर क्या होगा असर

होर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया की बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और गैस गुजरती है. अगर यहां लंबे समय तक व्यवधान रहता है, तो ब्रेंट क्रूड की कीमतों में तेज उछाल संभव है. पहले भी क्षेत्रीय तनाव के दौरान तेल बाजार में अचानक तेजी देखी गई है. एनर्जी एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर शिपमेंट में रुकावट लंबी चली, तो आयातक देशों के लिए सप्लाई और कीमत दोनों मोर्चों पर दबाव बढ़ सकता है.

कूटनीतिक प्रयासों पर असर

हाल ही में अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर वार्ता फिर शुरू हुई थी, लेकिन ताजा घटनाक्रम से कूटनीतिक समाधान की संभावनाएं कमजोर पड़ती दिख रही हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि क्षेत्रीय संघर्ष के बढ़ने से न केवल एनर्जी मार्केट, बल्कि वैश्विक वित्तीय बाजारों में भी अस्थिरता बढ़ सकती है. फिलहाल निवेशकों की नजर कच्चे तेल की कीमतों और सैन्य गतिविधियों के अगले कदम पर टिकी है.

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