जनवरी में GST कलेक्शन 6.2% बढ़कर 1.93 लाख करोड़ के पार, इंपोर्ट टैक्स बना बड़ी ताकत
जनवरी में जीएसटी कलेक्शन में मजबूत बढ़त दर्ज की गई है. आयात से बढ़ी टैक्स इनकम और कम रिफंड के चलते नेट जीएसटी रेवेन्यू 7.6 फीसदी उछलकर 1.71 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया, जबकि जीएसटी दरों में कटौती के बावजूद राजस्व आधार स्थिर बना हुआ है.
January GST Collection: जनवरी महीने में देश के GST कलेक्शन में अच्छी बढ़त देखने को मिली है. सरकारी रिपोर्ट के मुताबिक, जनवरी में सकल जीएसटी कलेक्शन 6.2 फीसदी बढ़कर 1.93 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा पहुंच गया. इस बढ़ोतरी की सबसे बड़ी वजह आयात से होने वाली टैक्स इनकम में तेज इजाफा बताया जा रहा है. हालांकि, इस दौरान रिफंड की रकम में कमी दर्ज की गई है. जनवरी में कुल जीएसटी रिफंड 3.1 फीसदी घटकर 22,665 करोड़ रुपये रह गया. रिफंड कम रहने का असर नेट जीएसटी रेवेन्यू पर सकारात्मक रूप से दिखा.
नेट जीएसटी रेवेन्यू में 7.6 फीसदी की मजबूती
अगर रिफंड को घटाकर देखा जाए, तो जनवरी में सरकार का नेट जीएसटी रेवेन्यू 7.6 फीसदी की बढ़त के साथ करीब 1.71 लाख करोड़ रुपये रहा. यह आंकड़ा बताता है कि टैक्स कलेक्शन का कुल आधार अब भी मजबूत बना हुआ है, भले ही कुछ सेक्टर में टैक्स दरें घटाई गई हों.
तंबाकू से सेस कलेक्शन में आई गिरावट
जनवरी में तंबाकू उत्पादों से मिलने वाला सेस कलेक्शन 5,768 करोड़ रुपये रहा. यह पिछले साल जनवरी के मुकाबले काफी कम है. जनवरी 2025 में सेस कलेक्शन 13,009 करोड़ रुपये था. उस समय तंबाकू के साथ-साथ लग्जरी, ‘सिन’ और डिमेरिट गुड्स जैसे कारों पर भी सेस लगाया जाता था. अब स्थिति बदल चुकी है. सितंबर 2025 से सरकार ने जीएसटी सिस्टम में बड़े बदलाव किए हैं.
22 सितंबर 2025 से करीब 375 वस्तुओं पर जीएसटी दरें घटा दी गईं, जिससे कई सामान सस्ते हो गए. इसके अलावा, अब कंपनसेशन सेस सिर्फ तंबाकू और उससे जुड़े प्रोडक्ट्स पर ही लगाया जा रहा है. पहले यह सेस लग्जरी और डिमेरिट गुड्स पर भी लगता था. इसी वजह से सेस कलेक्शन में कमी देखने को मिली है.
डोमेस्टिक और इंपोर्ट टैक्स का हाल
जनवरी में घरेलू लेनदेन से होने वाला सकल टैक्स कलेक्शन 4.8 फीसदी बढ़कर 1.41 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया. वहीं, आयात से मिलने वाला टैक्स कहीं ज्यादा तेजी से बढ़ा. इंपोर्ट से होने वाली जीएसटी इनकम 10.1 फीसदी की छलांग के साथ 52,253 करोड़ रुपये रही.
कुल मिलाकर क्या संकेत?
जनवरी के आंकड़े यह संकेत देते हैं कि जीएसटी दरों में कटौती के बावजूद टैक्स कलेक्शन स्थिर बना हुआ है. आयात से बढ़ती इनकम ने रेवेन्यू को सहारा दिया है, जबकि घरेलू मांग भी धीरे-धीरे मजबूती दिखा रही है. आने वाले महीनों में सरकार की नजर इस बात पर रहेगी कि जीएसटी दरों में कटौती के बाद कलेक्शन किस तरह संतुलन बनाए रखता है.
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