केबल इंडस्ट्री का बादशाह कौन? Bajaj-Adani-Birla की एंट्री से मचा हलचल, निवेशकों की नजर RR Kabel से Polycab तक

जैसे-जैसे देश में शहरीकरण बढ़ रहा है, नए घर बन रहे हैं और सरकार इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च बढ़ा रही है, वैसे-वैसे तार और केबल की मांग भी तेजी से बढ़ रही है. अब इस सेक्टर में एक नया मोड़ आ रहा है. बजाज, अडानी और आदित्य बिरला जैसे बड़े कारोबारी ग्रुप इसमें उतरने की तैयारी कर चुके हैं.

केबल स्टॉक Image Credit: Money 9 Live

Cable Stocks: भारत में केबल और वायर का कारोबार अक्सर चर्चा में नहीं रहता. लेकिन बिजली, मकान, सड़क, रेलवे, डेटा सेंटर और सोलर प्रोजेक्ट जैसे हर बड़े काम के पीछे यही सबसे जरूरी कड़ी होती है. जैसे-जैसे देश में शहरीकरण बढ़ रहा है, नए घर बन रहे हैं और सरकार इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च बढ़ा रही है, वैसे-वैसे तार और केबल की मांग भी तेजी से बढ़ रही है. अब इस सेक्टर में एक नया मोड़ आ रहा है. बजाज, अडानी और आदित्य बिरला जैसे बड़े कारोबारी ग्रुप इसमें उतरने की तैयारी कर चुके हैं. इससे बाजार में मुकाबला तेज होने वाला है. सवाल यह है कि क्या इससे पुराने खिलाड़ी दबाव में आएंगे या फिर पूरा इंडस्ट्री और बड़ा हो जाएगा.

क्या है इंडस्ट्री की स्थिति

भारत का वायर और केबल बाजार साल 2024 में करीब 9.3 अरब डॉलर का था. अनुमान है कि साल 2032 तक यह 17 अरब डॉलर से ज्यादा का हो सकता है. इसकी बड़ी वजह बिजली नेटवर्क का विस्तार, सोलर और विंड एनर्जी, नए शहर, मेट्रो प्रोजेक्ट और इलेक्ट्रिक गाड़ियां हैं. सोलर प्रोजेक्ट इसमें खास भूमिका निभा रहे हैं. एक मेगावाट के सोलर प्लांट में करीब 50 किलोमीटर केबल लगती है. सरकार के बड़े सोलर टारगेट के चलते आने वाले सालों में करोड़ों किलोमीटर केबल की जरूरत पड़ेगी. इसके साथ ही इंटरनेट और डेटा की बढ़ती खपत से ऑप्टिकल फाइबर और हाई स्पीड केबल की मांग भी तेजी से बढ़ रही है.

बजाज की एंट्री क्या बदलेगी

बजाज इलेक्ट्रिकल्स ने जनवरी 2026 में वायर कारोबार में उतरने का ऐलान किया. कंपनी फिलहाल सिर्फ वायर पर ध्यान देगी. ‘केबल’ अभी उसकी प्राथमिकता नहीं है. बजाज अपनी मजबूत ब्रांड पहचान, दुकानों के नेटवर्क और इलेक्ट्रिशियन से जुड़ाव का फायदा उठाना चाहती है. शुरुआती दौर में इसका असर खास तौर पर घरों में इस्तेमाल होने वाले वायर बाजार पर पड़ सकता है. यहां ब्रांड और कीमत दोनों अहम होते हैं. आगे चलकर अगर कारोबार बढ़ता है तो बजाज केबल में भी उतर सकती है.

कंपनीशेयर कीमत (₹)मार्केट कैपP/E रेश्यो52 हफ्ते हाई52 हफ्ते लोडिविडेंड
RR Kabel1,407.75₹16,128 करोड़38.24₹1,563.10₹750.500.44%
Bajaj Electricals410.80₹4,730 करोड़45.96₹749.35₹383.250.73%
KEI Industries3,999.55₹38,270 करोड़44.44₹4,588.15₹2,443.700.14%
Polycab India6,977.25₹1.05 लाख करोड़40.11₹7,947.35₹4,557.450.50%
Finolex Cables738.45₹11,280 करोड़17.01₹1,059.05₹701.001.08%
Havells India1,293.70₹81,040 करोड़54.58₹1,712.95₹1,257.450.77%
सोर्स: BSE

अडानी की रणनीति लंबी दौड़ की

अडानी ग्रुप ने मार्च 2025 में केबल और वायर क्षेत्र में कदम रखने की घोषणा की थी. यह कारोबार उसके कॉपर और इंफ्रास्ट्रक्चर नेटवर्क से जुड़ा होगा. अडानी की योजना धीरे-धीरे बड़ा बनने की है. भविष्य में इसका असर रेलवे, बिजली ट्रांसमिशन और बड़े सरकारी प्रोजेक्ट में दिख सकता है. अभी तुरंत झटका लगने की संभावना कम है. लेकिन लंबे समय में कीमतों पर दबाव बन सकता है.

आदित्य बिरला भी मैदान में

आदित्य बिरला ग्रुप ने फरवरी 2025 में इस सेक्टर में उतरने का ऐलान किया. गुजरात में नया प्लांट लगाने के लिए करीब 1,800 करोड़ रुपये निवेश होंगे. प्रोडक्शन 2026 के आखिर तक शुरू होने की उम्मीद है. बिरला ग्रुप की छवि मजबूत है और वह धैर्य के साथ कारोबार खड़ा करने के लिए जाना जाता है. इसलिए इसे पुराने खिलाड़ियों के लिए एक बड़ा भविष्य का मुकाबला माना जा रहा है.

पुराने खिलाड़ियों पर क्या असर होगा

Polycab, KEI और RR केबल जैसी कंपनियां फिलहाल मजबूत स्थिति में हैं. इनके पास बड़ा नेटवर्क, अलग-अलग तरह के ग्राहक और निर्यात बाजार भी हैं. बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर और हाई वोल्टेज केबल बनाना आसान नहीं होता. इसमें सर्टिफिकेशन और भरोसे की जरूरत होती है. इसलिए यहां नई कंपनियों को समय लगेगा. लेकिन आने वाले सालों में कीमतों का दबाव बढ़ सकता है, खासकर आम किस्म के केबल में.

वायर सेगमेंट में ज्यादा टक्कर

वायर बनाना केबल के मुकाबले आसान होता है. यहां ब्रांड और बिक्री नेटवर्क ज्यादा मायने रखते हैं. इसलिए बजाज जैसी कंपनियां जल्दी असर डाल सकती हैं. RR Cables, Havells और Finolex जैसी कंपनियों पर यहां ज्यादा दबाव पड़ सकता है, क्योंकि इनके कारोबार में वायर की हिस्सेदारी ज्यादा है. बजाज, अडानी और बिरला की एंट्री से मुकाबला जरूर बढ़ेगा. लेकिन बाजार भी तेजी से फैल रहा है. नई कंपनियों को भरोसा और नेटवर्क बनाने में समय लगेगा. वहीं पुराने खिलाड़ी अपने अनुभव और पैमाने के दम पर टिके रह सकते हैं.

सोर्स: Trendlyne, Groww, TB

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