इजराइल- ईरान युद्ध के बीच तेल की कीमतों में बड़ी उछाल, Brent और WTI 100 डॉलर के पार, ओपेक ने किया कटौती का ऐलान

मध्य-पूर्व में बढ़ते युद्ध और ईरान से जुड़े तनाव के कारण वैश्विक तेल बाजार में बड़ी उथल-पुथल देखी जा रही है. होरमुज बंद होने और प्रमुख तेल उत्पादक देशों द्वारा उत्पादन घटाने से कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़कर करीब 110 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं. WTI और Brent crude दोनों में तेज उछाल दर्ज किया गया है.

क्रूड ऑयल Image Credit: canva

Crude Oil Price Surge: मध्य-पूर्व में बढ़ते युद्ध और ईरान से जुड़े तनाव के कारण ग्लोबल ऑयल मार्केट में भारी उथल-पुथल देखने को मिल रही है. होरमुज स्ट्रेट बंद होने और प्रमुख तेल उत्पादक देशों द्वारा प्रोडक्शन घटाने से कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़कर लगभग 110 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं. यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रही तो ग्लोबल एनर्जी मार्केट और महंगाई पर इसका बड़ा असर पड़ सकता है.

ग्लोबल मार्केट में ऐतिहासिक तेजी

इन परिस्थितियों के बीच अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) कच्चे तेल की कीमत लगभग 20% बढ़कर 109 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई, जबकि ब्रेंट क्रूड भी करीब 18% उछलकर लगभग 109 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया. पिछले सप्ताह अमेरिकी कच्चे तेल में करीब 35% की तेजी दर्ज की गई, जो 1983 के बाद से वायदा बाजार में सबसे बड़ी साप्ताहिक बढ़त मानी जा रही है. यदि होरमुज स्ट्रेट जल्द नहीं खुलता तो तेल कीमतों में और तेजी देखने को मिल सकती है.

होरमुज स्ट्रेट बंद होने से सप्लाई संकट

होरमुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल खपत का लगभग 20% हिस्सा गुजरता है. ईरान युद्ध के कारण इस जलमार्ग के बंद होने से तेल की सप्लाई बाधित हो गई है. जहाज मालिक और टैंकर कंपनियां संभावित हमलों के डर से इस मार्ग से गुजरने से बच रही हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की उपलब्धता कम हो गई है और कीमतों में तेजी आई है.

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बहुत छोटी कीमत

अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान को लेकर बढ़ते संघर्ष के बीच तेल की बढ़ती कीमतों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अगर ईरान के परमाणु खतरे को खत्म करने के लिए कच्चे तेल की कीमतें कुछ समय के लिए बढ़ती हैं, तो यह अमेरिका और पूरी दुनिया की सुरक्षा और शांति के लिए चुकाई जाने वाली बहुत छोटी कीमत है. उन्होंने कहा कि जब ईरान के परमाणु खतरे का अंत हो जाएगा तो तेल की कीमतें तेजी से गिर जाएंगी और जो लोग इससे अलग सोचते हैं, वे गलत हैं.