New labour code से गिग वर्कर्स को मिलेगी सोशल सिक्योरिटी, Swiggy-Uber जैसे एग्रीगेटर्स अब देंगे 1-2% वेलफेयर में योगदान

21 नवम्बर 2025 से लागू नये लेबर कोड ने भारत के गिग और प्लैटफार्म वर्कर्स के लिये मजबूत सोशल सिक्योरिटी ढांचा तैयार किया है. पहली बार गिग वर्कर और एग्रीगेटर की कानूनी परिभाषा लागू हुई है. अब Swiggy, Uber, Zomato और Urban Company जैसे एग्रीगेटर्स को अपनी वार्षिक टर्नओवर का 1-2 फीसदी वेल्फेयर फंड में योगदान देना अनिवार्य होगा.

न्यू लेबर कोड Image Credit: ai generated

New labour code: 21 नवम्बर 2025 से लागू हुए नये लेबर कोड ने भारत के गिग और प्लैटफार्म वर्कर्स के लिये अहम सुरक्षा ढांचा तैयार कर दिया है. पहली बार कानून में गिग वर्कर, प्लैटफार्म वर्कर और एग्रीगेटर जैसे शब्दों की औपचारिक परिभाषा शामिल की गयी है. अब Swiggy, Urban Company, Uber समेत सभी एग्रीगेटर्स को अपनी वार्षिक टर्नओवर का 1-2 फीसदी गिग वर्कर्स के वेलफेयर कोष में देना अनिवार्य होगा, जो वर्कर्स को हेल्थकेयर, एक्सीडेंट कवर, मेटरनिटी लाभ और ओल्ड-एज प्रोटेक्शन उपलब्ध करायेगा.

गिग वर्कर्स को मिलेगा UAN और पोर्टेबल बेनिफिट्स

सरकार ने स्पष्ट किया है कि गिग और प्लैटफार्म वर्कर्स को अब आधार-लिंक्ड यूनिवर्सल अकाउंट नंबर जारी किया जायेगा. इस UAN के जरिये वर्कर चाहे जिस राज्य में काम करे, लाभ पूरी तरह पोर्टेबल रहेंगे. पंजीकरण 16 वर्ष से ऊपर सभी गिग वर्कर्स के लिये अनिवार्य होगा, जो सेल्फ-डिक्लेरेशन और आधार के जरिए पर पूरा किया जायेगा. इस प्रक्रिया को आसान बनाने के लिये हेल्पलाइन और फैसिलिटेशन सेंटर्स भी स्थापित किये जा सकते हैं.

5 फीसदी की कैप

नये प्रावधानों के तहत Swiggy, Zomato, Urban Company, Ola, Uber और अन्य एग्रीगेटर्स को अपनी वार्षिक टर्नओवर का 1-2 फीसदी गिग वर्कर्स सामाजिक सुरक्षा कोष में जमा करना होगा. यह योगदान उन राशियों के 5 फीसदी से अधिक नहीं होगा, जो सीधे वर्कर्स को भुगतान की गयी हों.

यह राशि राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा कोष में जायेगी, जिसका उपयोग केन्द्र द्वारा गिग वर्कर्स के लिये सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के संचालन में किया जायेगा. बोर्ड का विस्तार कर इसमें एग्रीगेटर्स और गिग वर्कर्स के प्रतिनिधि भी शामिल किये जायेंगे.

कर्नाटक और तेलंगाना पहले ही बना चुके हैं स्ट्रक्चर

नये कोड्स से पहले ही कर्नाटक और तेलंगाना इस दिशा में अहम कदम उठा चुके हैं. कर्नाटक ने 12 सितम्बर 2025 को अपना प्लैटफार्म-बेस्ड गिग वर्कर्स एक्ट लागू किया था, जिसमें प्रति ट्रांजेक्शन 1-5 फीसदी वेल्फेयर फी अनिवार्य की गयी है. यह कानून वर्कर राइट्स को मजबूत बनाता है और प्लैटफार्म एल्गोरिदम की पारदर्शिता सुनिश्चित करता है. तेलंगाना ने भी हाल ही में ड्राफ्ट एक्ट मंजूर किया है, जो लगभग 3 लाख से अधिक गिग वर्कर्स को कवर करने वाला है.

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