आलू-टमाटर नहीं सोना-चांदी बना RBI का नया मीटर, जानें कैसे पड़ेगा आपकी जेब पर असर
महंगाई को लेकर केंद्रीय बैंक के ताजा संकेतों ने बाजार और निवेशकों का ध्यान खींचा है. सोने और चांदी की कीमतों में आई तेजी ने नीति निर्माताओं की चिंता बढ़ाई है, हालांकि रोजमर्रा की महंगाई फिलहाल नियंत्रण में बताई जा रही है. आने वाले महीनों में किन फैक्टर्स पर सबसे ज्यादा नजर रहेगी, जानें खबर में.
भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (RBI MPC) ने इस बार महंगाई को लेकर एक नया संकेत दिया है. अब तक जिस महंगाई पर काबू की बात हो रही थी, उसमें सोना और चांदी की बढ़ती कीमतें एक अहम फैक्टर बनकर सामने आई हैं. शुक्रवार को जारी बयान में RBI ने साफ कहा कि भले ही कुल मिलाकर महंगाई की स्थिति संतुलित दिख रही हो, लेकिन कीमती धातुओं की तेजी ने उसके महंगाई अनुमान को थोड़ा ऊपर की ओर धकेला है. यह संकेत बताता है कि महंगाई की तस्वीर अब सिर्फ खाने-पीने और ईंधन तक सीमित नहीं रही.
सोना-चांदी ने बदला महंगाई का गणित
RBI के मुताबिक, सोने और चांदी की कीमतों में आई तेजी महंगाई के अनुमान में 60 से 70 बेसिस प्वाइंट का योगदान दे रही है. यानी कुल महंगाई पर इन धातुओं का असर अब नजरअंदाज करने लायक नहीं रहा. हालांकि केंद्रीय बैंक ने यह भी साफ किया कि अगर सोने को महंगाई के आंकड़ों से अलग कर दिया जाए, तो कोर महंगाई दिसंबर में 2.6 फीसदी पर स्थिर बनी हुई थी. इससे यह संकेत मिलता है कि अर्थव्यवस्था में बाकी क्षेत्रों से कीमतों का दबाव अभी भी सीमित है.
सोना और चांदी इसलिए महंगे हो रहे हैं क्योंकि दुनिया में अनिश्चितता बढ़ी हुई है. युद्ध, तनाव और डर के माहौल में लोग पैसा सोने-चांदी में लगा रहे हैं. इससे इनकी कीमतें तेजी से बढ़ीं और इसी वजह से RBI को अपना महंगाई अनुमान थोड़ा बढ़ाना पड़ा.
कैसे पड़ेगा आपके जेब पर असर
सोने और चांदी की कीमतों में तेजी का सीधा असर आपकी जेब पर ब्याज दरों के रास्ते पड़ सकता है. जब इन कीमती धातुओं के महंगे होने से महंगाई का अनुमान ऊपर जाता है, तो RBI को ब्याज दरों में कटौती को लेकर सतर्क होना पड़ता है. यही वजह है कि महंगाई के दबाव के बीच रेपो रेट में कट नहीं किया गया, जिससे होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन की EMI फिलहाल सस्ती नहीं होंगी. यानी रोजमर्रा की चीजें भले बहुत महंगी न हों, लेकिन कर्ज पर राहत मिलने में देरी आपकी मासिक जेब पर दबाव बनाए रख सकती है.
RBI ने कहा कि खाद्य और ईंधन को छोड़कर मापी जाने वाली कोर महंगाई फिलहाल काबू में है. सोना-चांदी को छोड़ दें तो बाकी सामान और सेवाओं की कीमतों में कोई बड़ी उछाल नहीं दिख रही. यही वजह है कि केंद्रीय बैंक का मानना है कि आने वाले कुछ तिमाहियों में रिटेल महंगाई उसके लक्ष्य के आसपास बनी रह सकती है.
खाने-पीने की चीजों से राहत
खाद्य महंगाई को लेकर RBI का रुख फिलहाल राहत भरा है. अच्छी खरीफ फसल, पर्याप्त खाद्यान्न भंडार और रबी की अनुकूल बुवाई के चलते खाने-पीने की चीजों की कीमतें नियंत्रण में रहने की उम्मीद है. बैंक का कहना है कि अगर कोई बड़ा झटका नहीं आता, तो खाद्य महंगाई निकट भविष्य में दबाव नहीं बनाएगी.
हालांकि RBI ने आगाह भी किया है. वैश्विक स्तर पर जारी भू-राजनीतिक तनाव, ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव और मौसम से जुड़ी अनिश्चितताएं महंगाई के लिए जोखिम बनी हुई हैं.
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